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Q. खरीद और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सुधार के बिना रक्षा व्यय में वृद्धि रणनीतिक परिणामों को सीमित करती है। चर्चा कीजिए कि रक्षा बजट आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति के लिए उत्प्रेरक के रूप में कैसे कार्य कर सकते हैं। (10 अंक, 150 शब्द)

February 6, 2026

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में रक्षा बजट। 
  • तकनीकी प्रगति के उत्प्रेरक के रूप में रक्षा बजट।

उत्तर

खरीद कार्यप्रवाह और संयुक्त निर्णय प्रक्रिया में गहन सुधारों के बिना रक्षा व्यय में वृद्धि से, लागत वृद्धि और अप्रचलित अधिग्रहणों का जोखिम बना रहता है। केंद्रीय बजट 2026-27, जिसने रक्षा के लिए रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ आवंटित किए हैं, यह स्वीकार करता है कि वास्तविक रणनीतिक परिणाम ‘थियेटराइजेशन’ जैसे संस्थागत सुधारों के माध्यम से जनशक्ति-प्रधान बल से प्रौद्योगिकी-संचालित, ‘लीन’ (lean) सैन्य बल की ओर परिवर्तन पर निर्भर करते हैं।

आर्थिक विकास के उत्प्रेरक के रूप में रक्षा बजट

  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना: पूँजीगत बजट का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय फर्मों के लिए आरक्षित करने से एक आत्मनिर्भर औद्योगिक आधार तैयार होता है।
    • उदाहरण: वित्त वर्ष 2026-27 में, पूँजीगत अधिग्रहण बजट का 75% (लगभग ₹1.39 लाख करोड़) घरेलू खरीद के लिए निर्धारित किया गया है।
  • MSME इकोसिस्टम का विस्तार: रक्षा आदेश दीर्घकालिक राजस्व स्पष्टता प्रदान करते हैं, जिससे छोटी इंजीनियरिंग फर्मों को वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के रूप में विकसित होने का अवसर मिलता है।
    • उदाहरण: तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारों में विशिष्ट क्लस्टरों के उभरने से निजी अनुबंध शेयरों में पहले से ही 15% की अनुमानित वृद्धि हुई है।
  • उच्च-कौशल युक्त रोजगार का सृजन: आयात से स्वदेशी उत्पादन (आत्मनिर्भरता) की ओर बढ़ने से सटीक इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और लॉजिस्टिक्स में रोजगार उत्पन्न होता है।
    • उदाहरण: नए बजट के तहत रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) हब के विस्तार से वर्ष 2027 तक 1,00,000 से अधिक रोजगार शामिल होने की उम्मीद है।
  • निर्यात राजस्व सृजन: एक मजबूत बजट अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पादन को बढ़ाने में सक्षम बनाता है, जिससे भारत एक ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ बन जाता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2025 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹23,500 करोड़ तक पहुँच गया, जिसका लक्ष्य 2029 तक ₹50,000 करोड़ है।

तकनीकी प्रगति के उत्प्रेरक के रूप में रक्षा बजट

  • डीप-टेक नवाचार को बढ़ावा देना: अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए लक्षित फंडिंग निजी क्षेत्र को AI और रोबोटिक्स जैसी उच्च-जोखिम वाली तकनीकों के साथ प्रयोग करने की अनुमति देती है।
    • उदाहरण: वर्ष 2026 के बजट ने विशेष रूप से रक्षा R&D के लिए ₹17,250 करोड़ आवंटित किए, जिससे पहली बार निजी स्टार्ट-अप्स के लिए फंड खोले गए।
  • स्वदेशी एयरोस्पेस को गति: एयरो-इंजन और विमानन कार्यक्रमों के लिए निरंतर फंडिंग भारत के प्रौद्योगिकी स्टैक में महत्त्वपूर्ण “प्रोपल्शन गैप” (प्रणोदन अंतराल) को कम करती है।
    • उदाहरण: तेजस Mk-1A और AMCA कार्यक्रमों के लिए बढ़े हुए परिव्यय उन्नत टर्बोफैन प्रौद्योगिकियों के घरेलू विकास को प्रेरित कर रहे हैं।
  • दुहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी का विस्तार : रक्षा क्षेत्र के नवाचार— जैसे सुरक्षित संचार और सामग्री—अक्सर नागरिक वाणिज्यिक क्षेत्र में भी उपयोग किए जाते हैं।
    • उदाहरण: ऑप्टिकल फाइबर-आधारित रक्षा नेटवर्क में निवेश ग्रामीण क्षेत्रों में 5G/6G-सक्षम लचीले डिजिटल बुनियादी ढाँचे के लिए एक मानक के रूप में उभर रहा है।
  • मानवरहित प्रणालियों में सफलता: “ड्रोन शक्ति” और AI-सक्षम हवाई रक्षा (मिशन सुदर्शन चक्र) के लिए बजटीय सहायता भारत को स्वायत्त युद्ध का केंद्र बना रही है।
    • उदाहरण: ideaForge जैसे स्टार्ट-अप अब प्रोटोटाइप से उच्च-ऊँचाई वाले सामरिक UAV के बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं।

निष्कर्ष

वास्तविक युद्ध-शक्ति सृजन के लिए रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) को प्रक्रियात्मक पक्षाघात से मुक्त किया जाए। बजट की सफलता “राजकोषीय अनुशासन के साथ आधुनिकीकरण” को संतुलित करने में निहित है। अंततः, एक अच्छी तरह से क्रियान्वित रक्षा बजट न केवल सीमाओं को सुरक्षित करता है; बल्कि यह एक “गुणक” के रूप में कार्य करता है, जो औद्योगिक और तकनीकी संप्रभुता के माध्यम से भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाता है।

Increased defence expenditure without reform in procurement and decision-making processes limits strategic outcomes. Discuss how defence budgets can also function as catalysts for economic growth and technological advancement. in hindi

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