प्रश्न की मुख्य माँग
- आधारभूत अधिगम में समानता के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- बताइए कि मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा (MTB-MLE) किस प्रकार प्रणालीगत शैक्षिक सुधार को सक्षम बना सकती है?
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उत्तर
भारत की बहुभाषिक विविधता उसकी राष्ट्रीय शक्ति है, किंतु लगभग 44 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो विद्यालयी शिक्षा की शुरुआत अपनी मातृभाषा से भिन्न भाषा में करते हैं। यह असंगति आधारभूत अधिगम में संरचनात्मक असमानताएँ उत्पन्न करती है। मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करना समावेशी और रूपांतरणकारी शैक्षिक सुधार की दिशा में अत्यंत आवश्यक है।
आधारभूत अधिगम में समानता के समक्ष चुनौतियाँ
- समझने में बाधा: बच्चों को अपरिचित भाषा को समझते हुए अवधारणाएँ ग्रहण करने में कठिनाई होती है।
- उदाहरण: एनसीईआरटी (2022) के अनुसार, लगभग 44 प्रतिशत बच्चों को शिक्षण माध्यम की भाषा से असंगति का सामना करना पड़ता है।
- कमजोर आधारभूत साक्षरता: भाषायी अंतर के कारण पढ़ने और गणना कौशल के विकास में विलंब होता है।
- उदाहरण: प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थियों में गैर-मातृभाषा में अध्ययन करने पर संचयी अधिगम हानि देखी जाती है।
- उच्च ड्रॉपआउट जोखिम: आत्मविश्वास में कमी से बच्चों में अरुचि बढ़ती है, जो अंततः विद्यालय से बाहर होने का कारण बन सकती है।
- पहचान का हाशियाकरण: मातृभाषा की उपेक्षा सांस्कृतिक गरिमा और आत्मीयता की भावना को कमजोर करती है।
- उदाहरण: अनेक आदिवासी बच्चों को अपनी मातृभाषा में शैक्षिक सामग्री उपलब्ध नहीं होती।
- संरचनात्मक असमानता: प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी असमान रूप से प्रभावित होते हैं।
- उदाहरण: बहुभाषिक जिलों में विभिन्न भाषा समूहों के बीच अधिगम परिणामों में असमानता देखी जाती है।
मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा प्रणालीगत शैक्षिक सुधार को कैसे सक्षम बना सकती है
- आधारभूत सुदृढ़ीकरण: मातृभाषा में अध्ययन से अवधारणाओं की स्पष्ट समझ विकसित होती है।
- उदाहरण: नई शिक्षा नीति-2020 में प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा को शिक्षण माध्यम बनाने पर बल दिया गया है।
- बेहतर अधिगम परिणाम: यह साक्षरता, गणनात्मक कौशल और कक्षा में सहभागिता को सुदृढ़ करता है।
- उदाहरण: ओडिशा का बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम 21 भाषाओं में लगभग 90,000 आदिवासी बच्चों को समर्थन प्रदान करता है।
- शिक्षक क्षमता में सुधार: बहुभाषी शिक्षण पद्धति समावेशी कक्षाओं को सशक्त बनाती है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (2022–23) में बहुभाषी दृष्टिकोण को समाहित किया गया है।
- संस्थागत समन्वय: समन्वित मिशन-आधारित दृष्टिकोण से व्यापक विस्तार और स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सकता है।
- उदाहरण: यूनेस्को की “भाषा महत्त्वपूर्ण है” रिपोर्ट मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय मिशन की अनुशंसा करती है।
निष्कर्ष
भारत में समानतापूर्ण आधारभूत साक्षरता सुनिश्चित करने के लिए भाषायी विविधता को बाधा के रूप में नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक शक्ति के रूप में स्वीकार करना आवश्यक है। शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार, डिजिटल नवाचार तथा समन्वित नीतिगत प्रयासों के माध्यम से मातृभाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा को संस्थागत रूप देने से आत्मविश्वासी शिक्षार्थियों का निर्माण किया जा सकता है। इसके साथ ही ज्ञान परंपराओं का संरक्षण संभव होगा और 21वीं सदी के बहुभाषी भारत के अनुरूप एक समावेशी शिक्षा मॉडल विकसित किया जा सकेगा।
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