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Q. वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने की भारत की आकांक्षा उसके रक्षा औद्योगिक आधार से मजबूती से संबंधित है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार के महत्त्व पर चर्चा कीजिए और रक्षा निर्यात बढ़ाने के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

December 20, 2025

GS Paper IIIInternal security

प्रश्न की मुख्य माँग

  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्त्व
  • आर्थिक विकास के लिए महत्त्व
  • रक्षा निर्यात बढ़ाने के उपाय।

उत्तर

वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए, भारत को एक प्रमुख हथियार आयातक से वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र में परिवर्तित होना होगा। एक सशक्त रक्षा औद्योगिक आधार रणनीतिक स्वायत्तता की आधारशिला होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रीय संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि आत्मनिर्भर हों तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के प्रति लचीली बनी रहें।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्त्व

  • रणनीतिक स्वायत्तता: एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता को कम करता है, जिससे संघर्ष की स्थिति में भारत के भू-राजनीतिक निर्णयों पर बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके।
    • उदाहरण: स्वदेशी रूप से विकसित विमानवाहक पोत ‘INS विक्रांत’ भारत की समुद्री हितों को स्वतंत्र रूप से सुरक्षित करने की क्षमता को दर्शाता है।
  • प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: घरेलू विनिर्माण यह सुनिश्चित करता है कि महत्त्वपूर्ण “ब्लैक बॉक्स” प्रौद्योगिकियाँ और स्रोत कोड राष्ट्रीय नियंत्रण में रहें, जिससे अंतर्निहित मैलवेयर या दूरस्थ निष्क्रियता तंत्र जैसे जोखिम कम होते हैं।
    • उदाहरण: तेजस हल्का लड़ाकू विमान कार्यक्रम भारत को स्वदेशी चौथी पीढ़ी की लड़ाकू प्रौद्योगिकी प्रदान करता है।
  • आपूर्ति शृंखला लचीलापन: स्थानीय उत्पादन दीर्घकालिक उच्च-तीव्रता वाले संघर्षों के दौरान स्पेयर पार्ट्स और गोला-बारूद की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की “पार्टस कूटनीति” से बचाता है।
  • निरोधक क्षमता: उन्नत हथियार प्रणालियों के त्वरित प्रोटोटाइप और समावेशन से तकनीकी अंतर कम होते हैं तथा विरोधियों के विरुद्ध विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है।

आर्थिक वृद्धि के लिए महत्त्व

  • रोजगार सृजन: रक्षा क्षेत्र रोजगार सृजन के लिए गुणक के रूप में कार्य करता है, जिसमें कुशल अभियंताओं, तकनीशियनों और स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का व्यापक पारितंत्र शामिल होता है।
    • उदाहरण: रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब निजी उद्योग और स्टार्ट-अप्स के लिए निर्धारित है, जिससे एक नया उद्यमी वर्ग विकसित हो रहा है।
  • अंतर्वर्ती निवेश: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 जैसी नीतियाँ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करती हैं, जिससे पूँजी और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ देश में आती हैं।
  • औद्योगिक प्रसार प्रभाव: रक्षा क्षेत्र में होने वाले नवाचार प्रायः “द्वि-उपयोगी” प्रौद्योगिकियों को जन्म देते हैं, जो दूरसंचार, विमानन और धातुकर्म जैसे नागरिक क्षेत्रों में क्रांति लाते हैं।
  • विदेशी मुद्रा बहिर्गमन में कमी: महँगे आयातों के स्थान पर स्वदेशी प्लेटफॉर्म अपनाने से अरबों की विदेशी मुद्रा की बचत होती है, जिसे सामाजिक अवसंरचना में पुनर्निवेश किया जा सकता है।
    • उदाहरण: वित्तीय वर्ष 2024–25 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ दर्ज किया, जबकि 2014–15 से स्वदेशी रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रक्षा निर्यात बढ़ाने के उपाय

  • प्रमाणन सरलीकरण: ‘अनापत्ति प्रमाण-पत्र’ प्रक्रिया और अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाणन की स्वीकृतियों को सरल बनाकर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की गति बढ़ाई जा सकती है।
    • उदाहरण: मित्र देशों को निर्दिष्ट वस्तुओं के निर्यात को सरल बनाने हेतु खुला सामान्य निर्यात लाइसेंस व्यवस्था शुरू की गई है।
  • ऋण सुविधा: अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के विकासशील देशों को रियायती वित्तीय पैकेज प्रदान करने से उन्हें भारतीय रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
    • उदाहरण: भारत ने रक्षा परिसंपत्तियों की खरीद के लिए मॉरीशस को 100 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान की।
  • ब्रांड संवर्धन: विदेशों में भारतीय मिशनों और अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों के माध्यम से स्वदेशी प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता और लागत-प्रभावशीलता को प्रदर्शित करना।
    • उदाहरण: फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा भारतीय रक्षा निर्यात की एक प्रमुख सफलता है।
  • अनुसंधान एवं विकास सहयोग: वैश्विक साझेदारों के साथ संयुक्त विकास परियोजनाओं में सहभागिता से भारत को बौद्धिक संपदा का सह-स्वामित्व प्राप्त होता है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रवेश मिलता है।
    • उदाहरण: भारत–अमेरिका पहल का उद्देश्य जेट इंजनों और स्टर्लिंग इंजनों का सह-उत्पादन करना है, जिससे वैश्विक बाजार खुलते हैं।

निष्कर्ष

भारत के वैश्विक शक्ति के रूप में उभरने हेतु आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र एक अनिवार्य ‘शक्ति-गुणक’ है। नीतिगत प्रोत्साहनों को निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ प्रभावी रूप से समन्वित कर भारत अपनी सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को आर्थिक अवसरों में रूपांतरित कर सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वर्ष 2047 की ओर भारत की प्रगति स्वदेशी ‘लौह एवं बौद्धिक क्षमता’ द्वारा सुदृढ़ रूप से समर्थित हो।

India’s aspiration to emerge as a developed nation by 2047 is closely linked to the strength of its defence industrial base.”Discuss the importance of a strong defence industrial base for India’s national security and economic growth, and suggest measures to enhance defence exports. in hindi

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