Q. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में तेजी से हो रहे विकास आधुनिक युद्ध और रक्षा क्षमताओं को तेजी से आकार दे रहे हैं। रक्षा तैयारियों को बदलने में उन्नत प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर चर्चा कीजिए और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

March 7, 2026

GS Paper IIIScience & Tech

प्रश्न की मुख्य माँग

  • रक्षा तैयारी को रूपांतरित करने में उन्नत प्रौद्योगिकियों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
  • रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।

उत्तर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित प्रणालियाँ, साइबर क्षमताएँ और सटीक हथियार जैसी प्रौद्योगिकियों में तीव्र प्रगति आधुनिक युद्ध की प्रकृति को पुनर्परिभाषित कर रही है। जो देश इन प्रौद्योगिकियों का प्रभावी रूप से एकीकरण करते हैं, वे निगरानी, निर्णय-निर्माण और युद्ध क्षमता में रणनीतिक बढ़त प्राप्त करते हैं। भारत के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के माध्यम से रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के माध्यम से प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को भी आगे बढ़ाना अत्यावश्यक है। 

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रक्षा तैयारी को रूपांतरित करने में उन्नत प्रौद्योगिकियों की भूमिका

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणाली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता निर्णय-निर्माण, खतरे की पहचान और स्वायत्त युद्ध क्षमताओं को सुदृढ़ बनाती है।
    • उदाहरण: यूक्रेन संघर्ष में आधुनिक ड्रोन युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और लक्ष्य निर्धारण प्रणालियों का उपयोग।
  • मानव रहित युद्ध प्रणालियाँ: ड्रोन और स्वायत्त वाहनों के उपयोग से मानव जोखिम कम होता है और सटीक हमले संभव होते हैं।
    • उदाहरण: भारत द्वारा सशस्त्र ड्रोन जैसे MQ-9बी प्रीडेटर ड्रोन की खरीद और विकास।
  • नेटवर्क-केंद्रित संचालन: उन्नत डिजिटल नेटवर्क खुफिया, निगरानी और संचार प्रणालियों को एकीकृत कर वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
    • उदाहरण: भारतीय सशस्त्र बलों की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली।
  • सटीक निर्देशित हथियार: उन्नत मिसाइल प्रणालियाँ हमले की सटीकता और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं।
    • उदाहरण: भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
  • साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: आधुनिक संघर्षों में साइबर अभियानों के माध्यम से महत्त्वपूर्ण अवसंरचना और सैन्य नेटवर्क को लक्ष्य बनाया जाता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2019 में भारत द्वारा स्थापित रक्षा साइबर एजेंसी पर बढ़ता ध्यान।

रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की चुनौतियाँ

  • आयात पर निर्भरता: महत्त्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए भारत अब भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर काफी निर्भर है।
    • उदाहरण: वायु क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए फ्राँस से राफेल लड़ाकू विमान की खरीद।
  • घरेलू अनुसंधान एवं विकास क्षमता की सीमाएँ: रक्षा अनुसंधान तंत्र को वित्तीय और संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
    • उदाहरण: तेजस हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम जैसी परियोजनाओं में लंबी विकास अवधि।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सीमाएँ: विदेशी रक्षा साझेदारियों में प्रायः मूल प्रौद्योगिकियों का सीमित हस्तांतरण होता है।
    • उदाहरण: लड़ाकू विमान इंजन सहयोग परियोजनाओं में उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुँच पर प्रतिबंध।
  • विखंडित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और निजी उद्योग के बीच समन्वय की चुनौतियाँ नवाचार को धीमा करती हैं।
    • उदाहरण: स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के उत्पादन और एकीकरण में देरी।
  • कौशल और अवसंरचना की कमी: उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिए विशेष मानव संसाधन और विनिर्माण क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
    • उदाहरण: रक्षा प्रणालियों के लिए उच्च स्तरीय अर्द्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षमता की आवश्यकता। 

निष्कर्ष

उभरती प्रौद्योगिकियाँ सटीकता, गति और खुफिया-आधारित संचालन को बढ़ाकर युद्ध की प्रकृति को परिवर्तित कर रही हैं। भारत के लिए रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने हेतु घरेलू नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर निवेश, मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा गहन प्रौद्योगिकीय क्षमताओं का विकास आवश्यक है, ताकि रक्षा उत्पादन में वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त की जा सके।

Rapid advancements in emerging technologies such as AI and unmanned systems are increasingly shaping modern warfare and defence capabilities. Discuss the role of advanced technologies in transforming defence preparedness and examine the challenges India faces in achieving technological self-reliance in the defence sector. in hindi

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