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Q. ग्रेट निकोबार में बड़े पैमाने पर विकास योजनाएँ विशाल वन क्षेत्रों और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों के लिए खतरा हैं। ऐसी परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय और पारिस्थितिक जोखिमों पर चर्चा कीजिए। यह मामला भारत में आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संघर्ष को कैसे दर्शाता है? (250 शब्द, 15 अंक)

October 13, 2025

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • ग्रेट निकोबार परियोजना के पर्यावरणीय और पारिस्थितिकी जोखिम के बारे में बताइए।
  • विकास-पर्यावरण संघर्ष के उदाहरण पर चर्चा कीजिए।

उत्तर

ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना का उद्देश्य एक ट्रांसशिपमेंट हब और सामरिक आधार स्थापित करना है, लेकिन यह भारत के सबसे जैव विविध और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक के लिए खतरा है। यह परियोजना भारत के तटीय और वन क्षेत्रों में आर्थिक विकास लक्ष्यों तथा पारिस्थितिकी स्थिरता के बीच बढ़ते तनाव का उदाहरण है।

ग्रेट निकोबार परियोजना के पर्यावरणीय और पारिस्थितिक जोखिम

  • प्राथमिक उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का विनाश: इस परियोजना के कारण भारत के बचे हुए उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में से एक, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र में लगभग 8.5 लाख पेड़ों को काट दिया जाएगा।
    • उदाहरण: इस क्षति से निकोबार मेगापाॅड, निकोबार मकाॅक और लेदरबैक टर्टल के घोंसले जैसी स्थानिक प्रजातियों के महत्त्वपूर्ण आवास खतरा में आ जाएँगे।
  • समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए खतरा: ड्रेजिंग और बंदरगाह निर्माण से प्रवाल भित्तियाँ, मैंग्रोव और समुद्री घास के मैदान खतरे की ओर बढ़ रहे हैं, जो समुद्री जैव विविधता और कार्बन अवशोषण के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
    • उदाहरण: ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा, कैंपबेल बे क्षेत्र, यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट है।
  • देशज जनजातीय आवासों का विघटन: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के रूप में वर्गीकृत शोंपेन और निकोबारी जनजातियाँ सांस्कृतिक और आजीविका विस्थापन का सामना कर रही हैं।
    • उदाहरण: भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (2022) ने चेतावनी दी है कि बाहरी हस्तक्षेप उनके पृथक पारिस्थितिकी तंत्र संतुलन को नष्ट कर सकता है।
  • भूकंपीय और जलवायु भेद्यता: भूकंपीय क्षेत्र V में स्थित, यह द्वीप भूकंप और सुनामी के प्रति संवेदनशील है, जैसा कि वर्ष 2004 में देखा गया था। बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा आपदा जोखिमों को बढ़ा सकता है और प्राकृतिक पुनर्प्राप्ति प्रक्रियाओं को बाधित कर सकता है।
  • कार्बन सिंक और पारिस्थितिकी सेवाओं का नुकसान: वनों की कटाई पेरिस समझौते के तहत कार्बन पृथक्करण और जैव विविधता संरक्षण के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को कमजोर करती है।
  • शिथिल पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया: कथित तौर पर ‘रणनीतिक महत्त्व’ खंड के तहत मंजूरी को वैज्ञानिक जाँच को दरकिनार करते हुए तेज़ी से आगे बढ़ाया गया।

विकास-पर्यावरण संघर्ष का उदाहरण इस मामले से मिलता है

  • आर्थिक विकास बनाम पारिस्थितिकी स्थिरता: इस परियोजना का उद्देश्य एक वैश्विक शिपिंग और लॉजिस्टिक्स केंद्र बनाना है, लेकिन यह प्राकृतिक पूँजी को खतरे में डालता है, जो दीर्घकालिक पारिस्थितिकी लागत पर अल्पकालिक आर्थिक लाभ का एक उदाहरण है।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों पर रणनीतिक प्राथमिकताएँ: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएँ अक्सर संरक्षण संबंधी अनिवार्यताओं पर भारी पड़ती हैं।
    • उदाहरण: सरकार त्वरित विकास के औचित्य के रूप में हिंद महासागर में चीन की उपस्थिति का हवाला देती है।
  • पर्यावरणीय न्याय का अपर्याप्त कार्यान्वयन: आदिवासी समुदायों से स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC) का अभाव, वन अधिकार अधिनियम (2006) के तहत पर्यावरणीय न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
  • नियामकीय कमजोर: फास्ट-ट्रैक मंजूरी पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) मानदंडों में उपस्थित कमियों को दर्शाती है, जो अन्य पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसी तरह के रुझान को दर्शाती है।
    • उदाहरण: एटालिन जलविद्युत परियोजना (अरुणाचल प्रदेश) और दिबांग घाटी में प्रदान की गई मंजूरी में भी इसी तरह का कमजोर प्रक्रिया प्रदर्शित हुईं।
  • भारत की सतत् विकास प्रतिबद्धताओं के साथ विसंगति: GNI जैसी परियोजनाएँ, COP-28 में भारत द्वारा वर्ष 2070 तक ‘हरित विकास’ और नेट-जीरो उत्सर्जन को आगे बढ़ाने के संकल्पों के विपरीत हैं।
    • GNI परियोजना, ईज आफ डूइंग बिजनेस और ईज आफ ब्रीदिंग के बीच भारत के व्यापक संघर्ष का प्रतीक है।

निष्कर्ष

ग्रेट निकोबार मामला रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को पर्यावरणीय संरक्षण के साथ संतुलित करने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। सतत् विकास वैज्ञानिक मूल्यांकन, जनजातीय भागीदारी और पारिस्थितिकी सुरक्षा उपायों पर आधारित होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय प्रगति अपूरणीय प्राकृतिक विरासत की कीमत पर न हो।

Large-scale development plans in Great Nicobar threaten extensive forest areas and fragile ecosystems. Discuss the significant environmental and ecological risks posed by such projects. How does this case illustrate the conflict between economic development and environmental sustainability in India? in hindi

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