प्रश्न की मुख्य माँग
- उग्रवादियों के लिए स्थानीय सहायता को रोकने के उपाय।
- स्थानीय आबादी के बीच अनुकूल धारणा बनाने की रणनीतियाँ।
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उत्तर
सामाजिक-आर्थिक उपेक्षा, अलगाव की भावना और बार-बार होने वाली सुरक्षा अस्थिरता के कारण सीमावर्ती क्षेत्र अक्सर आतंकवादी गतिविधियों के प्रति सुभेद्य हो जाते हैं। द्वेषपूर्ण तत्त्वों का अस्तित्व अक्सर स्थानीय सहायता या उदासीनता पर निर्भर करता है, जिससे राज्य और उसके सीमावर्ती समुदायों के बीच विश्वास की कमी को दूर करने की तत्काल आवश्यकता उजागर होती है।
उग्रवादियों के लिए स्थानीय सहायता रोकने के उपाय
- जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी को सुदृढ़ करना: एक सुव्यवस्थित खुफिया नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों का पता लगाने और हमलों को अंजाम देने से पूर्व ही उन्हें विफल करने में सहायता करता है।
- उदाहरण: वर्ष 2023 में, समय पर मिली स्थानीय खुफिया जानकारी ने सेना को जम्मू-कश्मीर के माछिल सेक्टर में एक बड़े घुसपैठ प्रयास को विफल करने में मदद की।
- ऑनलाइन कट्टरपंथ पर अंकुश: उग्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी और उन्हें ब्लॉक करने से सुभेद्य युवाओं पर उनके वैचारिक प्रभाव को रोका जा सकता है।
- उदाहरण के लिए: श्रीनगर में साइबर पुलिस ने उग्रवादी प्रचार के लिए प्रयोग किए जाने वाले कई टेलीग्राम और फेसबुक पेज बैन कर दिए हैं।
- सामुदायिक सहभागिता और युवा पुनर्वास: शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों को शामिल करने से सुभेद्य युवाओं को पुनः एकीकृत करने और उग्रवादी भर्ती पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है। उदाहरण: जम्मू और कश्मीर में मिशन यूथ जोखिमग्रस्त युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप सहायता प्रदान करता है, जिससे आतंकवाद के प्रति उनकी भेद्यता कम हो जाती है।
- नार्को आतंकवादी नेटवर्क को तोड़ना: मादक पदार्थों की तस्करी न केवल उग्रवाद को वित्तपोषित करती है, बल्कि आतंकवादियों के लिए स्थानीय उग्रवाद समर्थन का एक चक्र भी बनाती है।
- ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) का निष्प्रभावीकरण: आतंकवादियों को रसद सहायता या आश्रय प्रदान करने में मदद करने वालों की पहचान करनी चाहिए और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह उग्रवादी अभियानों के आधार को बाधित करता है।
- उदाहरण के लिए: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा में उन ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया, जो आतंकवादियों को आवाजाही और रसद में मदद करते थे।
यद्यपि उग्रवादी नेटवर्क का दमन आवश्यक है, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए जनता का विश्वास जीतना अति आवश्यक है। स्थानीय समुदायों के साथ रचनात्मक जुड़ाव से लोगों का विश्वास उग्रवाद से हटकर लोकतांत्रिक शासन की ओर हो जाएगा।
स्थानीय आबादी के बीच सकारात्मक धारणा बनाने की रणनीतियाँ
- कल्याणकारी योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन: आवास, स्वास्थ्य और सब्सिडी योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य की उपस्थिति और उसके उद्देशों में विश्वास बढ़ाता है।
- उदाहरण: कुपवाड़ा ने वर्ष 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 4,700 से अधिक घर बनाए, जिससे उसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले का खिताब और ग्रामीण कल्याण को बढ़ावा मिला।
- जीवंत ग्राम विकास (VVP): दूरदराज के गाँवों में बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने से समावेशिता और राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण: अरुणाचल प्रदेश के किबिथु में अब VVP के तहत 4G इंटरनेट, सौर प्रकाश व्यवस्था और बेहतर सड़कें हैं।
- सुरक्षा बलों में भर्ती: सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों या पुलिस में कार्यरत स्थानीय युवाओं में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति स्वामित्व की भावना जागृत होती है।
- उदाहरण: राजौरी और पुँछ के आदिवासी युवाओं को भारतीय सेना की प्रादेशिक इकाइयों में भर्ती किया गया।
- कौशल विकास और आजीविका प्रशिक्षण: व्यावसायिक प्रशिक्षण युवा बेरोजगारी को कम करता है और उग्रवादियों द्वारा आयोजित भर्तियों पर अंकुश लगाता है।
- उदाहरण के लिए: बाड़मेर में BADP वित्तपोषित केंद्रों ने स्थानीय लोगों को सिलाई, सौर पैनल मरम्मत और कृषि-कौशल का प्रशिक्षण दिया।
- डिजिटल और आवासीय शिक्षा तक पहुँच: स्कूल और छात्रावास स्थापित करने से छात्रों को स्कूल में बने रहने और अलग-थलग पड़े इलाकों में शैक्षिक मानकों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- उदाहरण: कारगिल में एक बालिका छात्रावास ने सीमावर्ती इलाकों की छात्राओं की सुरक्षा और स्कूल में उनकी उपस्थिति में सुधार किया।
निष्कर्ष
सीमा सुरक्षा स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने से शुरू होती है, जो सुरक्षा बलों के लिए ‘अहम बिंदु’ की तरह कार्य करते हैं। विकास, गरिमा और संवाद पर आधारित एक सतत् रणनीति सुभेद्य क्षेत्रों को प्रत्यास्थ क्षेत्रों में बदल सकती है, जहाँ लोग राज्य संरक्षण के निष्क्रिय प्राप्तकर्ता बने रहने के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा में सक्रिय रूप से योगदान दे सकते हैं।