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Q. भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की परिकल्पना महाद्वीपों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने हेतु एक परिवर्तनकारी संपर्क पहल के रूप में की गई थी। इस संदर्भ में, भारत के लिए IMEC के सामरिक और आर्थिक महत्त्व पर चर्चा कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता इसके कार्यान्वयन के लिए किस प्रकार चुनौतियाँ उत्पन्न करती है। (15 अंक, 250 शब्द)

August 11, 2025

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के लिए IMEC के रणनीतिक महत्त्व पर चर्चा कीजिए।
  • भारत के लिए IMEC के आर्थिक महत्त्व पर चर्चा कीजिए।
  • विश्लेषण कीजिए कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता किस प्रकार इसके कार्यान्वयन के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न करती है।

उत्तर

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC), जिसकी संकल्पना भारत की G20 अध्यक्षता (वर्ष 2023) के दौरान की गई थी, का उद्देश्य भारत और यूरोप को मध्य पूर्व के माध्यम से बहु-माध्यम परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल संपर्कों से जोड़ना था। प्रमुख साझेदारों के सहयोग से, इसका उद्देश्य ऐसे समय में रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना और व्यापारिक अवरोधों को कम करना था विशेषकर तब जब यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था (वित्त वर्ष 2023-24 में 137 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक)।

भारत के लिए सामरिक महत्त्व 

  • भू-राजनीतिक स्थिति: एक अंतरमहाद्वीपीय कॉरिडोर भारत को पश्चिमी, खाड़ी और क्षेत्रीय राज्यों के बीच एक संपर्क साझेदार और राजनयिक संयोजक के रूप में उभारता है।
  • भारत-खाड़ी रणनीतिक संबंधों में मजबूती: बुनियादी ढाँचा सहयोग, दीर्घकालिक साझेदारी और द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को सुदृढ़ करता है। 
    • उदाहरण: वर्ष 2010 से भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी और भारत-UAE के मजबूत संबंध इस कॉरिडोर के पूर्वी हिस्से की नींव रखते हैं।
  • ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन कूटनीति: IMEC ने ऊर्जा सहयोग और डीकार्बोनाइजेशन पद्धतियों को सुरक्षित करने के लिए सीमा पार पाइपलाइनों और हाइड्रोजन लिंक की परिकल्पना की।
  • डिजिटल और वित्तीय एकीकरण: अंतर-महाद्वीपीय केबल और भुगतान अंतर-संचालन सुरक्षित डेटा प्रवाह और प्रेषण को बढ़ावा देते हैं। 
    • उदाहरण: संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ UPI अंतर-संचालन पहले से ही डिजिटल संपर्क को बेहतर बना रहा है।
  • समुद्री और आपूर्ति-श्रृंखला प्रत्यास्थता: वैकल्पिक भूमि/समुद्री मार्ग चोकप्वाइंट और समुद्री असुरक्षा की संभावना को कम करते हैं। 
    • उदाहरण: लाल सागर के जहाजों पर हौदी हमलों ने सुरक्षित विकल्पों की आवश्यकता को उजागर किया।

भारत के लिए आर्थिक महत्व

  • व्यापार सुविधा और लागत-समय लाभ: छोटे, बहु-परिवहन मार्गों से लाजिस्टिक लागत कम होने और यूरोप को निर्यात में तेजी आने की संभावना थी।
  • बुनियादी ढाँचा प्रोत्साहन और रोजगार: कॉरिडोर परियोजनाएँ बंदरगाह, रेल और लाजिस्टिक निवेश व स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा देंगी। 
    • उदाहरण: प्रस्तावित क्रॉस-सऊदी/UAE रेलवे का उद्देश्य समुद्री मार्गों को जोड़ना और केंद्र विकसित करना है।
  • ऊर्जा संक्रमण बाजार तक पहुँच: हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के निर्यात मार्ग यूरोपीय बाजार खोल सकते हैं।
  • डिजिटल सेवाएँ और फिनटेक विकास: सीमा पार भुगतान और डिजिटल बुनियादी ढाँचा भारत की सेवाओं के दायरे का विस्तार कर रहा है। 
    • उदाहरण: UPI का क्षेत्रीय रूप से अपनाया जाना, कॉरिडोर की फिनटेक संभावना को आधार देता है।
  • दक्षता और उत्सर्जन लाभ: एकीकृत मार्गों को लाजिस्टिक दक्षता बढ़ाने और प्रति इकाई व्यापार में ग्रीनहाउस गैसों की तीव्रता कम करने के लिए डिजाइन किया गया था। 
    • उदाहरण के लिए: IMEC का स्पष्ट उद्देश्य “दक्षता बढ़ाना, लागत कम करना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना” था।
  • वित्तीय एकीकरण और कॉरिडोर वित्त: एक समेकित दृष्टिकोण से बड़ी परियोजनाओं के लिए बीमा, टैरिफ सामंजस्य और वित्तपोषण संबंधी अंतराल को दूर किया जा सकता है।

पश्चिम एशिया की अस्थिरता कैसे IMEC की अपेक्षाओं को कमजोर करती है

  • इज़राइल-क्षेत्रीय मेल-मिलाप का क्षरण: गाजा युद्ध ने जॉर्डन-इज़राइल और व्यापक सामान्यीकरण संबंधों के राजनीतिक आधार को तहस-नहस कर दिया। 
    • उदाहरण: गाजा युद्ध ने जॉर्डन–इजराइल और व्यापक सामान्यीकरण संबंधों के राजनीतिक आधार को तोड़ दिया।
  • मानवीय लागत और राजनीतिक प्रतिक्रिया: लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष क्षेत्रीय जनता और सरकारों के बीच ध्रुवीकरण उत्पन्न करता है, जिससे एकीकरण की इच्छा कम होती है। 
    • उदाहरण: गाजा युद्ध ने जॉर्डन–इज़राइल और व्यापक सामान्यीकरण संबंधों के राजनीतिक आधार को तोड़ दिया।
  • अधिक पारगमन जोखिम और बीमा लागत: सक्रिय संघर्ष और हूती हमले प्रीमियम बढ़ाते हैं और पारंपरिक मार्गों से नौवहन को रोकते हैं। 
    • उदाहरण के लिए: लाल सागर पर हमलों ने कॉरिडोर के औचित्य को प्रमाणित किया, लेकिन साथ ही समुद्री बीमा और जोखिम को भी बढ़ा दिया।
  • खाड़ी देशों के बीच आर्थिक प्रतिद्वंद्विता: टैरिफ और मुक्त-क्षेत्रों पर खाड़ी देशों के बीच प्रतिस्पर्धा कॉरिडोर के सामंजस्य को जटिल बनाती है। 
    • उदाहरण: GCC मुक्त-क्षेत्र व्यापार पर रियाद द्वारा वर्ष 2021 में लगाए गए टैरिफ ने वाणिज्यिक तनाव का संकेत दिया।
  • राजनीतिक समाधान के बिना संरचनात्मक कमज़ोरी: जब तक प्रमुख मुद्दों (जैसे, फ़िलिस्तीनी समस्या) का समाधान नहीं किया जाता, तब तक कॉरिडोर का बुनियादी ढाँचा पुनः संकट के प्रति संवेदनशील रहेगा।
    • उदाहरण: पश्चिमी देशों के बदलते रुख और जर्मनी द्वारा कुछ हथियारों की आपूर्ति में कटौती जैसे कदम बदलते हुए आकलन को दर्शाते हैं।

निष्कर्ष

IMEC भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप तक पहुँचने का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार प्रदान करता है, जिससे व्यापार दक्षता, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक पहुँच बढ़ती है। सरकार ने इस दृष्टिकोण के अनुरूप प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान और सागरमाला के तहत बंदरगाह आधुनिकीकरण जैसी संबंधित पहलों को आगे बढ़ाया है। हालाँकि, निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयास इसकी पूरी क्षमता को साकार करने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारत भविष्य के वैश्विक व्यापार नेटवर्क में एक केंद्रीय नोड बना रहे।

The India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC) was envisaged as a transformative connectivity initiative to boost trade between continents. In this context, discuss the strategic and economic significance of the IMEC for India and analyse how the ongoing instability in West Asia poses challenges to its realisation. in hindi

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