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Q. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के बीच रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने में भारत के समक्ष आने वाली रणनीतिक चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता का दावा करते हुए इस संवेदनशील संतुलन को कैसे बनाए रख सकता है? (15 अंक, 250 शब्द)

December 8, 2025

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वर्तमान में रूस के साथ भारत के समक्ष रणनीतिक चुनौतियाँ
  • भारत रणनीतिक स्वायत्तता का दावा करते हुए संतुलन कैसे बनाए रख सकता है?

उत्तर

भारत और रूस के मध्य संबंध लंबे समय से रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक निकटता पर आधारित रहा है लेकिन रूस–यूक्रेन संघर्ष के बाद, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध और बदलते वैश्विक समीकरण भारत के सामने जटिल चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं, जैसे-इस साझेदारी की स्थिरता पर खतरा और भारत की सामरिक स्वायत्तता का परीक्षण।

रूस के संदर्भ में भारत के समक्ष  सामरिक चुनौतियाँ

  • रक्षा आपूर्ति में अनिश्चितता: भारत के कई हथियार और उनके स्पेयर पार्ट्स रूस से आयात किए जाते हैं; रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण  उत्पादन में अवरोध उत्पन्न होता है  जिससे आपूर्ति प्रभावित होती  है।
    • उदाहरण: रूस के युद्धकालीन दबाव के कारण हवाई रक्षा प्रणालियों जैसी रूसी मूल की प्रणालियों की आपूर्ति  में देरी देखी गई।
  • वाणिज्यिक असंतुलन और वित्तीय जोखिम: द्विपक्षीय व्यापार में असमानता है, जहाँ भारत निर्यात की तुलना में आयात (तेल, गैस, रक्षा) कहीं अधिक करता है, जिससे रुपया में भुगतान अधिशेष हो जाता है और रुपया-रूबल निपटान जटिल हो जाता है।
    • उदाहरण: वित्त वर्ष 2024-25 में, रूस से भारत का आयात, निर्यात से 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया।
  • प्रतिबंध और द्वितीयक दबाव: रूस के साथ भारत के लगातार जुड़ाव के कारण पश्चिमी शक्तियाँ भारतीय कंपनियों पर व्यापार/वित्तीय दबाव या द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाती  हैं।
    • उदाहरण: रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का समर्थन न करने से भारत को पश्चिमी देशों में सार्वजनिक आलोचना और कूटनीतिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।
  • भू-राजनीतिक तनाव: रूस की चीन के साथ बढ़ती निकटता भारत की चीन सीमा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जटिल बनाती है।
    • उदाहरण: रूस-चीन सैन्य सहयोग और वर्ष 2022 के बाद ‘नो लिमिट्स’ वाली साझेदारी भारतीय सामरिक क्षेत्र के लिए चिंताएँ उत्पन्न कर रही है।
  • प्रतिष्ठा और वैश्विक स्थिति: यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस के साथ गहरे संबंध बनाए रखने से भारत को पश्चिमी साझेदारों से अलगाव का खतरा और वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव कमजोर होने का जोखिम है।
  • अत्यधिक निर्भरता का जोखिम: रूस पर ऊर्जा और रक्षा में निर्भरता भारत को वैश्विक आर्थिक संकटों (आर्थिक प्रतिबंध, आपूर्ति बाधाएँ, मूल्य अस्थिरता) के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • विविधीकरण में बाधाएँ: प्रतिबंध और सीमित वित्तीय व्यवस्थाएँ भारत के रूस के साथ व्यापार, निवेश और उच्च-तकनीकी सहयोग को विस्तारित करने में कठिनाइयाँ उत्पन्न करती हैं।
    • उदाहरण: अनुपालन और परिवर्तनीयता संबंधी मुद्दों के कारण भारतीय कंपनियाँ और बैंक रुपया-रूबल लेनदेन के प्रति सतर्क बने हुए हैं।

भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए संतुलन कैसे बना सकता है

  • व्यापार को विविध बनाना: व्यापार असंतुलन को कम करने और पारस्परिक आर्थिक साझेदारी के निर्माण हेतु फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, आईटी और विनिर्माण में रूस को निर्यात का विस्तार करना।
  • संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना: आयात-निर्भरता से आगे बढ़ते हुए सह-विकास तथा रूसी सहयोग के माध्यम से ‘मेक इन इंडिया’ आधारित रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे आपूर्ति-संबंधी कमजोरियाँ कम हों।
  • रुपये–रूबल तंत्र को मजबूत करना: व्यापार और भुगतान व्यवस्थाओं को स्थिर रखने हेतु पश्चिमी प्रतिबंधों से अप्रभावित, विश्वसनीय रुपया–रूबल निपटान तंत्रों का संस्थानीकरण आवश्यक है।
  • बहुध्रुवीय कूटनीति बनाए रखना: स्वायत्तता की रक्षा के लिए रूस के साथ संबंध बनाए रखना और क्वाड तथा बहुपक्षीय संगठनों जैसे फ्रेमवर्क के माध्यम से पश्चिमी सहयोगियों से संवाद जारी रखना।
  • आपूर्ति शृंखला की मजबूती बढ़ाना: विभिन्न देशों में रक्षा खरीद में विविधता लाना, घरेलू अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना तथा किसी एकबाह्य साझेदार पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना।
  • पारदर्शी संचार: भारत का दृष्टिकोण रूस और पश्चिमी सहयोगियों के प्रति स्पष्ट रखना एवं संघर्ष में तटस्थ लेकिन शांति और स्वतंत्र इच्छा के लिए समर्पित रहना है।
  • गैर-रक्षा सहयोग का लाभ उठाना: भारत-रूस संबंधों को पारंपरिक रक्षा एवं ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़ाते हुए असैन्य-परमाणु, ऊर्जा विविधीकरण, संपर्क अवसंरचना तथा जन आधारित संबंधों के आयामों में अधिक रणनीतिक गहराई प्रदान करना आवश्यक है।

निष्कर्ष

रूस के साथ भारत के संबंध, विशेष रूप से रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में, उसकी रणनीतिक संरचना का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं। फिर भी, बदलती भू-राजनीति और प्रतिबंधों के कारण पुनर्संतुलन की आवश्यकता है। व्यापार में विविधता लाकर, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर, वित्तीय तंत्र को मजबूत करके और वैश्विक जुड़ाव को बनाए रखकर, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता या वैश्विक प्रतिष्ठा से समझौता किए बिना रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रख सकता है।

Discuss the strategic challenges India faces in maintaining its relationship with Russia amidst Western sanctions and the geopolitical tensions surrounding the Ukraine war. How can India navigate this delicate balance while asserting its strategic autonomy? in hindi

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