प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत के औषधि क्षेत्र में संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- आत्मनिर्भरता और नवाचार के उपाय सुझाइए।
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उत्तर
भारत जेनेरिक दवाओं का वैश्विक नेता है, जो विश्व का लगभग पाँचवाँ हिस्सा आपूर्ति करता है और अमेरिका की 40% माँग को पूरा करता है, फिर भी यह मजबूती सक्रिय औषधीय अवयवों और प्रमुख प्रारंभिक पदार्थों के आयात पर भारी निर्भरता पर आधारित है, जो एक गंभीर संरचनात्मक विरोधाभास को उजागर करती है।
मुख्य भाग
भारत के औषधि क्षेत्र में संरचनात्मक चुनौतियाँ
- आयात पर निर्भरता: भारतीय औषधि उद्योग, सक्रिय औषधीय अवयवों और प्रमुख प्रारंभिक पदार्थों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे बाहरी व्यवधानों और मूल्य झटकों का जोखिम बढ़ता है।
- उदाहरण: अधिकांश प्रमुख प्रारंभिक पदार्थ विदेशों (विशेषकर चीन) से प्राप्त होते हैं।
- कमजोर अनुसंधान एवं विकास आधार: यह क्षेत्र मुख्यतः जेनेरिक दवाओं के निर्माण पर आधारित है, जिसमें मौलिक अनुसंधान और नई दवाओं के विकास में निवेश सीमित है।
- उदाहरण: भारतीय कंपनियाँ नई दवा खोज की तुलना में रिवर्स इंजीनियरिंग पर अधिक ध्यान केंद्रित करती हैं।
- लागत आधारित जाल: प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ कम लागत उत्पादन पर आधारित है, जिससे उच्च लागत वाले नवाचार तंत्र की ओर संक्रमण बाधित होता है।
- आपूर्ति संबंधी संवेदनशीलता: वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक संकट स्थितियों में जोखिम उत्पन्न करती है।
- नियामकीय कमियाँ: खंडित नियामकीय ढाँचा और नीतिगत समर्थन की कमी नवाचार तथा घरेलू क्षमता निर्माण को धीमा करते हैं।
आत्मनिर्भरता और नवाचार के उपाय
- घरेलू निर्माण को सुदृढ़ करना: सक्रिय औषधीय अवयवों और प्रमुख प्रारंभिक पदार्थों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम की जाए।
- उदाहरण: ₹3,000 करोड़ की बल्क ड्रग पार्क योजना के तहत हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में मेगा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं।
- अनुसंधान एवं विकास में निवेश: औषधि अनुसंधान और नवाचार में सार्वजनिक तथा निजी निवेश बढ़ाया जाए।
- उदाहरण: वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई फार्मा मेडटेक अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन योजना, जो दवा खोज और नई प्रौद्योगिकियों को समर्थन देती है।
- नीतिगत समर्थन: घरेलू उत्पादन और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित प्रोत्साहन और नियामकीय सरलता प्रदान की जाए।
- उदाहरण: औषधि क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएँ।
- आपूर्ति का विविधीकरण: कुछ विशेष देशों पर निर्भरता कम करने हेतु आयात स्रोतों और साझेदारियों का विविधीकरण किया जाए।
- उदाहरण: आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत यूरोप, अमेरिका और आसियान देशों से रणनीतिक आपूर्ति।
- सतत् उत्पादन: दीर्घकालिक स्थिरता के लिए पर्यावरण अनुकूल निर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जाए।
- उदाहरण: बल्क ड्रग पार्कों में हरित रसायन मानकों और शून्य तरल अपशिष्ट मानदंडों को प्रोत्साहित करना।
निष्कर्ष
भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अग्रणी स्थिति और आयात पर निर्भरता के बीच के अंतर को पाटना अत्यंत आवश्यक है। नवाचार-आधारित, आत्मनिर्भर और टिकाऊ दवा प्रणालियों की ओर परिवर्तन ही भारत की भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को परिभाषित करेगा।