Q. भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक बाधाओं पर चर्चा कीजिए। नवगठित COSOP 2026-2033 ढाँचा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ मिलकर, विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्प्रेरक का कार्य कैसे कर सकता है? (15 अंक, 250 शब्द)

May 14, 2026

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक बाधाओं का उल्लेख कीजिए।
  • विकसित भारत@2047 की प्राप्ति में COSOP 2026–2033 तथा AI जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका की चर्चा कीजिए।
  • आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

भारत के विकास की रीढ़ होने के बावजूद, ग्रामीण अर्थव्यवस्था आय, बाजार, संस्थागत ढाँचे और लचीलापन जैसे क्षेत्रों में लगातार बनी रहने वाली संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। COSOP 2026–2033 समावेशी तथा प्रौद्योगिकी-आधारित ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है।

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बाधाएँ

  • कम आय: छोटे भूमि जोतों तथा मौसमी कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण ग्रामीण परिवारों की आय अस्थिर और अपर्याप्त बनी रहती है।
    • उदाहरण: कृषि भारत के लगभग आधे कार्यबल को रोजगार प्रदान करती है, किंतु जीडीपी में इसका योगदान केवल लगभग 15–16% है, जो छिपी हुई बेरोजगारी को दर्शाता है।
  • कमजोर बाजार व्यवस्था: किसानों के पास प्रायः भंडारण सुविधाओं और प्रत्यक्ष बाजार पहुँच का अभाव होता है, जिससे उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ती है तथा उचित मूल्य प्राप्त नहीं हो पाता है।
    • उदाहरण: महाराष्ट्र के प्याज किसान खराब भंडारण व्यवस्था और कमजोर मंडी संपर्क के कारण अक्सर संकटपूर्ण बिक्री करने को विवश होते हैं।
  • ऋण संबंधी अंतराल: औपचारिक वित्तीय सेवाओं की सीमित उपलब्धता ग्रामीण परिवारों को अनौपचारिक उधारी की ओर धकेलती है, जिससे उद्यम विकास और आजीविका विविधीकरण प्रभावित होता है।
  • जलवायु संबंधी जोखिम: बाढ़, सूखा और अनिश्चित वर्षा कृषि को अत्यधिक संवेदनशील बनाते हैं, विशेषकर गरीब तथा वर्षा-आधारित क्षेत्रों में।
    • उदाहरण: असम में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ फसलों और ग्रामीण आजीविका को बार-बार नुकसान पहुँचाती है।
  • संस्थागत कमजोरी: जमीनी स्तर की संस्थाओं की कमजोरी सामूहिक सौदेबाजी, प्रौद्योगिकी अपनाने और सरकारी योजनाओं तक पहुँच को सीमित करती है।
    • उदाहरण: अनेक किसान उत्पादक संगठन (FPOs) निष्क्रिय या आर्थिक रूप से कमजोर बने हुए हैं, जिससे किसानों की सौदेबाजी क्षमता और बाजार पहुँच प्रभावित होती है। 

COSOP 2026–2033 और उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका

  • स्वयं सहायता समूह सुदृढ़ीकरण: COSOP स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) तथा सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाकर वित्तीय पहुँच, महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देता है।
    • उदाहरण: IFAD समर्थित परियोजनाओं ने विभिन्न राज्यों में SHGs के माध्यम से महिलाओं के व्यापक वित्तीय समावेशन को प्रदर्शित किया है।
  • बाजार संपर्क: यह ढाँचा बेहतर आय सृजन और ग्रामीण उद्यमों के विकास हेतु मूल्य संवर्द्धन, अवसंरचना तथा ई-कॉमर्स एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
  • AI आधारित कृषि: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) फसल परामर्श, कीट पहचान, सिंचाई योजना तथा मौसम पूर्वानुमान में सुधार कर उत्पादकता बढ़ाने एवं हानि कम करने में सहायक हो सकती है।
    • उदाहरण: एग्रीस्टैक (AgriStack) के अंतर्गत सरकार समर्थित डिजिटल कृषि सेवाओं का उद्देश्य सटीक कृषि और किसानों की निर्णय-क्षमता को बेहतर बनाना है।
  • ज्ञान प्रणाली: COSOP भारत तथा ग्लोबल साउथ में सफल विकास मॉडलों के ज्ञान-साझाकरण और पुनरावृत्ति को बढ़ावा देता है।
  • ग्रामीण लचीलापन: वित्त, संस्थानों और प्रौद्योगिकी का एकीकृत उपयोग आजीविका को आर्थिक एवं जलवायु संबंधी झटकों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ सतत् विकास को भी समर्थन प्रदान करता है।
    • उदाहरण: COSOP केवल गरीबी उन्मूलन तक सीमित न रहकर “ऐसी बाजारोन्मुख ग्रामीण आजीविकाओं” पर बल देता है, जो जलवायु और आर्थिक झटकों के प्रति लचीली हों।

आगे की राह

  • तीव्र कार्यान्वयन: ग्रामीण परिवर्तन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन तथा नौकरशाही विलंब में कमी अत्यंत आवश्यक है।
  • डिजिटल समावेशन: सस्ती इंटरनेट सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और ग्रामीण तकनीकी पहुँच का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि AI के लाभ छोटे किसानों और महिलाओं तक पहुँच सकें।
    • उदाहरण: भारतनेट का विस्तार गाँवों में डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रामीण सेवा वितरण को सुदृढ़ कर रहा है।
  • स्थानीय कौशल विकास: कृषि-प्रसंस्करण, ग्रामीण उद्यमों और डिजिटल सेवाओं में कौशल विकास छिपी हुई बेरोजगारी तथा पलायन के दबाव को कम कर सकता है।
  • जलवायु नियोजन: जिला-स्तरीय जलवायु अनुकूलन योजनाओं को कृषि, सिंचाई और आजीविका विविधीकरण रणनीतियों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) तथा जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम जलवायु-लचीली कृषि को समर्थन प्रदान करते हैं।
  • डेटा शासन: AI-आधारित कृषि में डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता और छोटे किसानों तथा कमजोर वर्गों के लिए समान पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
    • उदाहरण: कृषि क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उत्तरदायी क्रियान्वयन समावेशी लाभ सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

विकसित भारत@2047 की प्राप्ति के लिए केवल शहरी विकास नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि भी अनिवार्य है। COSOP की संस्थागत सुदृढ़ता को AI-आधारित नवाचारों के साथ जोड़कर भारत अपने गाँवों को लचीलापन, उत्पादकता और समावेशी राष्ट्रीय विकास के सशक्त केंद्रों में परिवर्तित कर सकता है।

Discuss the structural constraints plaguing India’s rural economy. How can the newly launched COSOP 2026-2033 framework, along with emerging technologies like AI, act as a catalyst in achieving the vision of Viksit Bharat@2047? in hindi

Explore UPSC Foundation Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.