Q. पुन: प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकी के उद्भव ने वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग को बदल दिया है, जिससे लागत कम हुई है और प्रक्षेपण आवृत्ति में वृद्धि हुई है। पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यानों के पीछे की तकनीकी नवाचारों, पारंपरिक व्यय योग्य रॉकेटों पर उनके लाभों और प्रतिस्पर्धी पुन: प्रयोज्य प्रणालियों के विकास में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
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