Q. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत समान नागरिक संहिता के संवैधानिक आधार और व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित करने के लिए इसके महत्व पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • समान नागरिक संहिता के संवैधानिक आधार की व्याख्या कीजिए।
  • व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित करने में समान नागरिक संहिता के महत्त्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर

समान नागरिक संहिता (UCC) का विचार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 के अंतर्गत व्यक्तिगत मामलों में समानता और कानूनी एकरूपता की संवैधानिक दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है। राज्य के निर्देशक सिद्धांतों में निहित यह संहिता भारत के बहुलवादी समाज का सम्मान करते हुए विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करती है।

Also Read | IAS Final Result

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का संवैधानिक आधार

  • कानूनी एकरूपता के लिए निदेशक सिद्धांत: भारतीय संविधान का अनुच्छेद-44 राज्य को निर्देश देता है कि वह सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करे।
    • उदाहरण: यह प्रावधान संविधान के भाग IV में सम्मिलित है।
  • संविधान निर्माताओं की दृष्टि: संविधान सभा ने दीर्घकालिक विधिक एकीकरण के लिए समान नागरिक संहिता को आवश्यक माना।
    • उदाहरण: डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने क्रमिक कार्यान्वयन के साथ यूसीसी का समर्थन किया।
  • राज्य की विधायी जिम्मेदारी: एक निदेशक सिद्धांत होने के कारण, अनुच्छेद-44 विधायिका पर यह दायित्व डालता है कि वह समान नागरिक नियमों को सुनिश्चित करने हेतु कानून बनाए।
  • क्रमिक और व्यावहारिक कार्यान्वयन: डॉ. अंबेडकर ने सुझाव दिया था कि प्रारंभिक चरण में इस संहिता को स्वैच्छिक रखा जा सकता है, ताकि सामाजिक विरोध से बचा जा सके।
  • संवैधानिक लक्ष्य के लिए न्यायिक समर्थन: न्यायालयों ने बार-बार यूसीसी को भेदभावपूर्ण व्यक्तिगत कानूनों के समाधान के रूप में रेखांकित किया है।
    • उदाहरण: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में यूसीसी को उत्तराधिकार संबंधी कानूनों में समानता सुनिश्चित करने का एक प्रभावी उपाय बताया है।

व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित करने में यूसीसी का महत्त्व

  • लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना: समान कानून विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में भेदभावपूर्ण प्रथाओं को समाप्त कर सकते हैं।
    • उदाहरण: विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में असमान उत्तराधिकार अधिकारों को लेकर चिंताएँ।
  • संवैधानिक समानता को सुदृढ़ करना: यूसीसी व्यक्तिगत विधि प्रणालियों को संविधान में निहित समानता के सिद्धांतों के अनुरूप बनाता है।
  • विधिक विखंडन को कम करना: समान नागरिक नियमावली विधिक प्रणाली को सरल बना सकती है और विभिन्न व्यक्तिगत विधियों के बीच संघर्ष को कम कर सकती है।
  • राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना: एक समान नागरिक ढाँचा, धर्म से परे समान नागरिकता की अवधारणा को मजबूत कर सकता है।
  • समुदायों के भीतर व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करना: यूसीसी यह सुनिश्चित कर सकता है कि व्यक्तिगत विधियाँ व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें।

निष्कर्ष

अनुच्छेद-44 एक न्यायसंगत और समान नागरिक ढाँचे के लिए संवैधानिक आकांक्षा को प्रतिबिंबित करता है। समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए सावधानीपूर्वक रूप से निर्मित और क्रमिक दृष्टिकोण, समानता, सामाजिक समरसता तथा भारत की सांस्कृतिक तथा धार्मिक विविधता के सम्मान के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है।

To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.