Q. “परिसीमन का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका उपयोग राजनीतिक बदलाव के एक उपकरण के रूप में भी किया जा सकता है।” भारत में बढ़ते हुए परिसीमन संबंधी मुद्दों के संदर्भ में इस पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

March 4, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • राजनीतिक हेरफेर के एक उपकरण के रूप में परिसीमन 
  • भारत में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में हेरफेर (जेरीमैंडरिंग) की चिंताएँ 

उत्तर

भारत में परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को समय-समय पर पुनर्निर्धारित करके समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। हालाँकि, उभरती चिंताओं से पता चलता है कि राजनीतिक अभिनेताओं के पक्ष में हेरफेर किया जा रहा है, जिससे जेरीमैंडरिंग और चुनावी लोकतंत्र में निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता पर इसके संभावित प्रभावों के बारे में बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक हेरफेर के एक उपकरण के रूप में परिसीमन 

  • निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का रणनीतिक पुनर्निर्धारण: परिसीमन के दौरान मतदाता समूहों को इस प्रकार जोड़ा या विभाजित किया जा सकता है कि कुछ राजनीतिक हितों को लाभ मिले।
    • उदाहरण: वर्ष 2023 के असम परिसीमन अभ्यास में आलोचकों ने आरोप लगाया कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को इस प्रकार पुनर्गठित किया गया, जिससे विपक्ष के मजबूत क्षेत्रों को कमजोर किया गया।
  • विपक्षी वोट बैंक का विखंडन: निर्वाचन क्षेत्रों को इस तरह विभाजित किया जा सकता है कि विपक्षी समर्थक कई सीटों में बिखर जाएँ, जिससे उनका चुनावी प्रभाव कम हो जाए।
    • उदाहरण: असम में कुछ विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि परिसीमन के बाद अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्रों को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बाँट दिया गया।
  • राजनीतिक रूप से लाभकारी निर्वाचन क्षेत्रों का निर्माण: नए निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना इस प्रकार बनाई जा सकती है कि विशेष नेताओं या दलों की चुनावी संभावनाएँ मजबूत हों।
  • आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में परिवर्तन: निर्वाचन क्षेत्रों की आरक्षण स्थिति में परिवर्तन से कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
    • उदाहरण: असम परिसीमन में SC/ST आरक्षित सीटों की संख्या और वितरण में परिवर्तन किया गया।
  • परिसीमन से जुड़ी राजनीतिक विमर्श पर प्रभाव: यद्यपि परिसीमन एक स्वतंत्र निकाय द्वारा किया जाता है, फिर भी राजनीतिक दल सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं या प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

भारत में जेरिमैंडरिंग (Gerrymandering) से जुड़ी चिंताएँ

  • लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का विकृतिकरण: यदि निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में हेरफेर किया जाता है, तो चुनावी परिणाम मतदाताओं की वास्तविक इच्छा को सही रूप में प्रतिबिंबित नहीं कर पाते।
    • उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका में जेरिमैंडरिंग के मामले, जहाँ निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ सत्तारूढ़ दलों को लाभ पहुँचाने के लिए निर्धारित की जाती हैं।
  • चुनावी संस्थानों में सार्वजनिक विश्वास का कमजोर होना: हेरफेर की धारणा से निर्वाचन आयोग और परिसीमन आयोग जैसे निष्पक्ष संस्थानों पर जनता का भरोसा कम हो सकता है।
  • सत्तारूढ़ दलों के लाभ का स्थायीकरण: सीमाओं में हेरफेर से सत्तारूढ़ दल कई चुनावों तक अपनी राजनीतिक शक्ति को सुदृढ़ कर सकते हैं।
  • अल्पसंख्यक या क्षेत्रीय समुदायों का हाशियाकरण: निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से कुछ जातीय या अल्पसंख्यक समुदायों की चुनावी शक्ति कमजोर हो सकती है।
    • उदाहरण: असम में परिसीमन के बाद कुछ अल्पसंख्यक-बहुल जिलों के प्रतिनिधित्व के कमजोर होने को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गईं।
  • भविष्य के राष्ट्रीय परिसीमन से जुड़े जोखिम: आगामी राष्ट्रीय स्तर के परिसीमन अभ्यास में यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो इसी प्रकार के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

निष्कर्ष

चुनावी निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी, नियम-आधारित और पक्षपातपूर्ण प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। परिसीमन आयोग की स्वायत्तता को सुदृढ़ करना, जनपरामर्श सुनिश्चित करना, न्यायिक निगरानी स्थापित करना तथा डेटा-आधारित मानदंड अपनाना जेरिमैंडरिंग को रोकने और भारत के लोकतांत्रिक सिद्धांत—समान और वास्तविक प्रतिनिधित्व—को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

“Delimitation is meant to ensure fair representation, but it can also be used as a tool of political manipulation.” Discuss in the context of emerging concerns of gerrymandering in India. in hindi

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