Q. वर्तमान वैश्विक संदर्भ में भारत-रूस संबंधों के महत्व पर चर्चा कीजिए। हाल के घटनाक्रमों के आलोक में, विशेष रूप से भारत की एक्ट फार ईस्ट नीति के संबंध में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने की गुंजाइश पर प्रकाश डालिए। (15 अंक, 250 शब्द)

December 11, 2023

GS Paper II

 उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • प्रस्तावना: भारत-रूस संबंधों के ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित करते हुए, उनकी दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर देते हुए उत्तर की शुरुआत कीजिए।  
  • मुख्य विषयवस्तु:
    • वर्तमान वैश्विक संदर्भ में भारत-रूस संबंधों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
    • दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की गुंजाइश पर प्रकाश डालिए।
  • निष्कर्ष: वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य और उभरती विदेश नीति अनिवार्यताओं से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए, भारत-रूस संबंधों की निरंतर प्रासंगिकता को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए।

 

प्रस्तावना:

भारत-रूस संबंध दोनों देशों की विदेश नीतियों की आधारशिला रहे हैं। ऐतिहासिक संबंधों में गहराई से निहित यह द्विपक्षीय साझेदारी, रक्षा, अंतरिक्ष, बहुपक्षीय सहयोग और व्यापार को शामिल करते हुए एक बहुआयामी जुड़ाव में विकसित हुई है।

मुख्य विषयवस्तु:

आर्थिक एवं सामरिक सहयोग

  • वैश्विक परिवर्तनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाना:
    • वैश्विक बदलाव और यूक्रेन संकट के बावजूद, भारत-रूस संबंध स्थिर है। इस साझेदारी को दुनिया की सबसे स्थिर साझेदारी में से एक बताया गया है, जो दोनों देशों के लिए इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।
    • चीन पर रूस की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता ने भारत में चिंताएँ बढ़ा दी हैं, जिससे भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने के प्रयास तेज हो गए हैं।
  • ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग:
    • रूस के विशाल ऊर्जा भंडार भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस साझेदारी ने ऊर्जा क्षेत्र में कई संयुक्त उद्यमों को देखा है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध बढ़े हैं।
    • प्रमुख निवेशों में सखालिन-1 तेल क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी और रोसनेफ्ट की सहायक कंपनियों, वैंकोरनेफ्ट और तास-यूर्याख नेफ्टेगाज़ोडोबाइचा के साथ साझेदारी शामिल है।
    • यह सहयोग इन क्षेत्रों में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक क्षेत्रों में अवसरों की खोज तक फैला हुआ है।
  • यूक्रेन युद्ध का प्रभाव:
    • यूक्रेन संघर्ष ने द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को प्रभावित किया है, भारतीय निवेश को प्रतिबंधों और रुकी हुई रूसी ऊर्जा परियोजनाओं के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
    • हालाँकि, भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल का आयात करके इस स्थिति का फायदा उठाया है, गौरतलब है कि भारत ने रूस से अपने तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है और ऊर्जा आयात में अरबों की बचत की है।

भारत की एक्ट फार (सुदूर) ईस्टनीति और भविष्य में संभावनाएँ

  • भारत की एक्ट फार (सुदूर) ईस्टनीति: इस नीति का उद्देश्य रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बढ़ाना है। व्लादिवोस्तोक-चेन्नई समुद्री मार्ग जैसी पहल इस रणनीति का हिस्सा हैं, जो आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने और एक वैकल्पिक व्यापार से जुड़ा गलियारा प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
  • समुद्री सहयोग: उत्तरी समुद्री मार्ग और पूर्वी समुद्री गलियारे जैसे नए परिवहन गलियारों की खोज करना, दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और व्यापार को बढ़ाना इस नीति का एक प्रमुख पहलू है।

निष्कर्ष:

भारत-रूस संबंध, अपने साझा नीतिगत उद्देश्यों और रणनीतिक अनिवार्यताओं के साथ, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में, उनके द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला बना हुआ है। वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य और चीन के साथ उनके भिन्न संबंधों से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, आपसी साझेदारी विकसित हो रही है। इस ऐतिहासिक द्विपक्षीय साझेदारी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश अपनी विविध चुनौतियों और वैश्विक व्यवस्था में बदलती स्थितियों से कैसे निपटते हैं।

 

Discuss  the importance of India-Russia relationship in the current global context. In light of recent developments, highlight the scope for strengthening economic and strategic cooperation between the two countries especially with regards to India’s Act Far East policy. in hindi

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