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Q. कारक-संचालित (Factor-driven) से ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन में "नवाचार की संस्कृति" के महत्त्व पर चर्चा कीजिए। भारत में ऐसी संस्कृति के निर्माण के उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

October 18, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • नवाचार की संस्कृति ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाती है।
  • सुझावात्मक उपाय।

उत्तर

वर्ष 2025 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि आधुनिक आर्थिक विकास का मूल आधार ज्ञान और नवाचार है, न कि केवल संसाधन। भारत के लिए, एक सशक्त नवाचार-संस्कृति को बढ़ावा देना एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आवश्यक कदम है।

ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में “नवाचार-संस्कृति” का महत्त्व

  • खोज और अनुप्रयोग के बीच सेतु: नवाचार वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ता है, जिससे सतत् तकनीकी प्रगति संभव होती है।
    • उदाहरण: औद्योगिक क्रांति ने नए ज्ञान को प्रत्यक्ष उत्पादन प्रक्रियाओं से जोड़कर दीर्घकालिक आर्थिक विकास को संभव बनाया।
  • उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि को प्रेरित करना: नवाचार अर्थव्यवस्था को श्रम या संसाधन-आधारित संरचना से तकनीकी और उत्पादकता-आधारित संरचना में परिवर्तित करता है।
  • ज्ञान के लिए संस्थागत पारिस्थितिकी का निर्माण: नवाचार वहाँ विकसित होता है जहाँ विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और उद्योग आपसी सहयोग और समर्थनकारी संस्थागत ढाँचे के तहत मिलकर कार्य करते हैं।
  • विज्ञान के प्रति सांस्कृतिक समर्थन को प्रोत्साहित करना: जब समाज ज्ञान, अनुसंधान और प्रतिभा का सम्मान करता है, तब नवाचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थायी रूप से फलता-फूलता है।
  • सामाजिक मूल्यों का रूपांतरण:  नवाचार ज्ञान को एक जीवंत सामाजिक शक्ति बना देता है, जिससे शिक्षा, शासन और अर्थव्यवस्था में परिवर्तन होता है।
    • उदाहरण: जब किसी समाज में ज्ञान को सांस्कृतिक मूल्य के रूप में समाहित किया जाता है, तब वह अधिक अनुकूलनशील और प्रगतिशील बन जाता है।

भारत में नवाचार-संस्कृति के निर्माण हेतु उपाय

  • विज्ञान और उद्योग का एकीकरण: प्रयोगशालाओं, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच साझेदारी को सुदृढ़ करना ताकि खोज और अनुप्रयोग के बीच के अंतराल को पाटा जा सके।
  • संस्थागत ढाँचे और प्रोत्साहन प्रणाली में सुधार: अंतरविषयी विश्वविद्यालयों, अनुसंधान समूहों और योग्यता-आधारित वित्त पोषण तंत्र का विकास कर रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
  • क्षेत्रीय नवाचार केंद्रों का निर्माण: शहरों और क्षेत्रों को स्थानीय नवाचार नेटवर्क तथा विचार-साझाकरण पारिस्थितिकी विकसित करने के लिए प्रेरित करना।
    • उदाहरण: विकेंद्रीकृत ज्ञान नेटवर्क प्राचीन शिक्षा केंद्रों की सफलता को आधुनिक संदर्भ में दोहरा सकते हैं।
  • सार्वजनिक–निजी सहयोग को बढ़ावा देना: राज्य-नियंत्रित प्रणाली से हटकर साझेदारी आधारित मॉडल अपनाएँ जो लचीलापन और प्रतिस्पर्द्धा दोनों को बढ़ावा देना।
    • उदाहरण: सहयोगात्मक नवाचार पारिस्थितिकी प्रयोग और उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है।
  • शिक्षा और विचार प्रसार में निवेश: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल अवसंरचना और कुशल पेशेवरों की गतिशीलता सुनिश्चित करना ताकि विचार और तकनीक समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँच सकें।
    • उदाहरण: खुला ज्ञान-प्रवाह विचारों और तकनीकों को समाज के प्रत्येक हिस्से तक पहुँचाने में मदद करता है।

निष्कर्ष

भारत का ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन तभी संभव है जब वह ऐसी नवाचार-संस्कृति विकसित करे जो खोज, सहयोग और रचनात्मक जोखिम लेने को प्रोत्साहित करे। नवाचार को केवल नीतिगत प्रोत्साहनों तक सीमित न रखकर शिक्षा, शासन और उद्यम के मूल में समाहित करना होगा। यही दृष्टिकोण समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की प्रगति का आधार बनेगा।

Discuss the significance of a “culture of innovation” in the transition from a factor-driven to a knowledge-driven economy. Suggest measures to build such a culture in India. in hindi

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