प्रश्न की मुख्य माँग
- प्रभावी व्यापक-आर्थिक नियोजन सुनिश्चित करने में महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
- मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण में महत्त्व को भी रेखांकित कीजिए।
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उत्तर
मुद्रास्फीति न केवल घरेलू कल्याण को प्रभावित करती है, बल्कि व्यापक आर्थिक स्थिरता की आधारशिला भी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) भारत में मुद्रास्फीति का प्रमुख मापक है, जो मौद्रिक नीति और कल्याणकारी समायोजनों का आधार बनता है। अतः इसके आधार वर्ष का संशोधन केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक सुधार है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मुद्रास्फीति का मापन बदलते उपभोग पैटर्न और नीतिगत आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
प्रभावी व्यापक-आर्थिक नियोजन सुनिश्चित करने में महत्त्व
- वर्तमान उपभोग प्रवृत्तियों का परिलक्षित होना: भारों को अद्यतन करने से सेवाओं, डिजिटल व्यय और शहरी जीवनशैली की बढ़ती हिस्सेदारी प्रतिबिंबित होती है।
- उदाहरण: CPI 2024 में 2023–24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आधार पर दूरसंचार एवं सेवाओं को अधिक भार दिया गया है।
- नीतिगत लक्ष्यीकरण में सुधार: सटीक मुद्रास्फीति आँकड़े यथार्थवादी बजट निर्माण एवं कल्याणकारी योजनाओं के अनुक्रमण (Indexation) में सहायक होते हैं।
- उदा: सरकारी कर्मचारियों के लिए सीपीआई-आधारित महँगाई भत्ता (DA) संशोधन अद्यतन मूल्य वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करते हैं।
- राजकोषीय नियोजन को सुदृढ़ करना: विश्वसनीय मुद्रास्फीति प्रवृत्तियाँ व्यय अनुमान और सब्सिडी संरचना को यथार्थ बनाती हैं।
- उदाहरण: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खाद्य सब्सिडी का आवंटन तब अधिक यथार्थवादी हो जाता है, जब खाद्य भार वर्तमान व्यय हिस्सेदारी को दर्शाता है।
- आँकड़ों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता में सुधार: डिजिटल मूल्य संग्रह का एकीकरण मैन्युअल त्रुटियों और विलंब को कम करता है।
- उदाहरण: कंप्यूटर-सहायता प्राप्त मूल्य संग्रह बाजार मूल्यों के वास्तविक समय सत्यापन में सुधार करता है।
- अंतरराष्ट्रीय तुलनीयता: वैश्विक सांख्यिकीय मानकों के साथ संरेखण विभिन्न देशों के बीच व्यापक तुलना में सहायक होता है।
मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण में महत्त्व
- मौद्रिक नीति की सटीकता: सटीक सीपीआई ब्याज दरों के बेहतर समायोजन को सुनिश्चित करता है, क्योंकि आरबीआई रेपो दर समायोजन का निर्णय लेने के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति पर निर्भर करता है।
- संरचनात्मक आर्थिक परिवर्तनों का समावेश: भार पुनर्निर्धारण से सेवा क्षेत्र की बढ़ती प्रधानता परिलक्षित होती है।
उदा: सेवाओं को अधिक भार मिलने से कोर मुद्रास्फीति का आकलन अधिक यथार्थ होता है।
- मापन पूर्वाग्रह में कमी: प्रशासनिक आँकड़ों के एकीकरण से सर्वेक्षण-आधारित विकृतियाँ कम होती हैं।
- उदाहरण: रेल किराया एवं ईंधन मूल्यों का प्रत्यक्ष समावेश नमूना त्रुटियों को कम करता है।
- मुद्रास्फीति अपेक्षाओं का प्रबंधन: विश्वसनीय आँकड़े जनता एवं बाजार की अपेक्षाओं को स्थिर रखते हैं।
- उदाहरण: पारदर्शी आधार संशोधन मूल्य अस्थिरता के समय मुद्रास्फीति के आँकड़ों में विश्वास उत्पन्न करता है।
- वास्तविक ब्याज दर का सटीक आकलन: सटीक मुद्रास्फीति वास्तविक प्रतिफल की सही गणना सुनिश्चित करती है।
- उदाहरण: जब मुद्रास्फीति वर्तमान उपभोग वास्तविकताओं को दर्शाती है, तो बैंक जमा और उधार दरों को अधिक प्रभावी ढंग से समायोजित करते हैं।
निष्कर्ष
CPI के आधार वर्ष का नियमित एवं पारदर्शी संशोधन संस्थागत प्रक्रिया का अंग होना चाहिए, जिसे डिजिटल मूल्य प्रणाली एवं आवधिक उपभोग सर्वेक्षणों का समर्थन प्राप्त हो। सांख्यिकीय क्षमता सुदृढ़ करने और हितधारक परामर्श बढ़ाने से मुद्रास्फीति मापन की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी, जिससे तीव्र परिवर्तनशील भारतीय अर्थव्यवस्था में उत्तरदायी राजकोषीय रणनीति और सटीक मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण संभव हो सकेगा।
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