Q. भारत में युवाओं की बढ़ती आत्महत्याओं के पीछे अंतर्निहित सामाजिक कारणों पर चर्चा कीजिए। एमिल दर्खाइम (Emile Durkheim) का सिद्धांत इस घटना की व्याख्या कैसे करता है? (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • युवाओं द्वारा आत्महत्याओं के सामाजिक कारणों का विश्लेषण कीजिए।
  • दुर्खीम के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।

उत्तर

भारत में बढ़ती युवा आत्महत्याएँ केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक संकट को दर्शाती हैं। संरचनात्मक असमानताएँ, प्रतिबंधात्मक सामाजिक मानदंड और अधूरी आकांक्षाएँ युवाओं पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न करती हैं, जिन्हें एमिल दुर्खीम के आत्महत्या संबंधी समाजशास्त्रीय सिद्धांत के माध्यम से बेहतर समझा जा सकता है।

युवा आत्महत्याओं के सामाजिक कारण

  • आकांक्षात्मक अंतर : युवाओं की आकांक्षाओं और सामाजिक सीमाओं के बीच असंगति हताशा उत्पन्न करती है।
    • उदाहरण: प्रतिस्पर्द्धी परीक्षाओं में असफलता के बाद आत्महत्या की घटनाएँ।
  • दमनकारी मानदंड: परिवार और समुदाय का दबाव व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करता है।
    • उदाहरण: जबरन विवाह के कारण आत्महत्या की घटनाएँ (राजस्थान)।
  • जातिगत भेदभाव: सामाजिक बहिष्कार और अपमान कमजोर वर्गों के युवाओं को प्रभावित करते हैं।
    • उदाहरण: उच्च शिक्षा संस्थानों में दलित छात्रों के बीच आत्महत्या के मामले।
  • लैंगिक बाधाएँ: पितृसत्तात्मक नियंत्रण युवा महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करता है।
    • उदाहरण: NCRB डेटा के अनुसार, महिला आत्महत्याओं का दो-तिहाई हिस्सा 25 वर्ष से कम का होता है।
  • सामाजिक-आर्थिक दबाव: गरीबी, बहिष्कार और अवसरों की कमी मानसिक तनाव को बढ़ाती है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, आत्महत्या युवाओं में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।

दुर्खीम की व्याख्या

  • सामाजिक एकीकरण: कमजोर या संघर्षपूर्ण सामाजिक संबंध आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं।
    • उदाहरण: विवाह संबंधी निर्णयों पर परिवार के विरोध के कारण युवाओं का अलगाव, जैसा कि राजस्थान की बहनों के मामले में देखा गया।
  • अराजक आत्महत्या: तीव्र सामाजिक परिवर्तन पारंपरिक मानदंडों को कमजोर कर देते हैं, जिससे अनिश्चितता उत्पन्न होती है।
  • भाग्यवादी आत्महत्या: अत्यधिक सामाजिक नियंत्रण व्यक्ति में निराशा की भावना पैदा करता है।
  • मानदंडात्मक संघर्ष: पुराने सामाजिक मानदंडों और नई आकांक्षाओं के बीच टकराव तनाव उत्पन्न करता है।
    • उदाहरण: बेहतर सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के बावजूद अधिक विकसित राज्यों में उच्च आत्महत्या दर।
  • संरचनात्मक कारण: आत्महत्या केवल मानसिक बीमारी का परिणाम नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिस्थितियों से उत्पन्न होती है।
    • उदाहरण: चीन में आत्महत्या दर में गिरावट का संबंध मुख्यतः सामाजिक-आर्थिक सुधारों से है, न कि केवल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से।

निष्कर्ष

भारत में युवा आत्महत्याएँ गहरे संरचनात्मक और सामाजिक विफलताओं को उजागर करती हैं। इन्हें दूर करने के लिए दमनकारी सामाजिक मानदंडों में परिवर्तन, अवसरों का विस्तार तथा सामाजिक एकीकरण को सुदृढ़ करना आवश्यक है। यह दृष्टिकोण दुर्खीम के इस विचार के अनुरूप है कि आत्महत्या केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिस्थितियों में निहित होती है।

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