Q. लोकतंत्र केवल मतदान करने के बारे में नहीं है, बल्कि सरकार के चुनाव में भाग लेने के हकदार व्यक्तियों की पहचान करने के बारे में भी है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' तथा चुनावी पारदर्शिता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन के संदर्भ में इस कथन पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 29, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • निर्वाचन पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • निर्वाचन अखंडता एवं सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन की विवेचना करना।

उत्तर

परिचय

लोकतंत्र केवल समय-समय पर होने वाले मतदान पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि विश्वसनीय निर्वाचक नामावलियों के माध्यम से पात्र मतदाताओं की सटीक पहचान पर भी आधारित होता है। इसी संदर्भ में, निर्वाचन आयोग (ECI) की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया निर्वाचन पारदर्शिता तथा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार एवं संवैधानिक समावेशिता के बीच संतुलन से संबंधित महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाती है।

निर्वाचन शुद्धता सुनिश्चित करने में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की भूमिका

  • निर्वाचक नामावली की शुद्धता: SIR का उद्देश्य निर्वाचक नामावलियों से दोहरावयुक्त (Duplicate), मृत एवं अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित करना है।
    • उदाहरण: निर्वाचन आयोग (ECI) संविधान के अनुच्छेद-324 एवं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत समय-समय पर निर्वाचक नामावली का पुनरीक्षण करता है।
  • धोखाधड़ी की रोकथाम: अद्यतन मतदाता सूची प्रतिरूपण, फर्जी मतदान एवं चुनावी हेर-फेर की संभावनाओं को कम करती है।
    • उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय ने इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) जैसे मामलों में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को लोकतंत्र की आधारशिला माना है।
  • लोकतांत्रिक वैधता: मतदाताओं की सटीक पहचान चुनाव परिणामों एवं प्रतिनिधिक लोकतंत्र के प्रति जनविश्वास को सुदृढ़ करती है।
  • प्रशासनिक दायित्व: संविधान निर्वाचन आयोग को व्यवस्थित सत्यापन प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनावी अखंडता बनाए रखने का अधिकार प्रदान करता है।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-324 निर्वाचन आयोग को निर्वाचक नामावलियों की तैयारी एवं पुनरीक्षण से संबंधित व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है।
  • नागरिकता का सत्यापन: SIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल संवैधानिक रूप से पात्र नागरिक ही चुनावों में भाग लें।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-326 मतदान का अधिकार केवल उन वयस्क भारतीय नागरिकों को प्रदान करता है, जो विधिक शर्तों को पूरा करते हैं।

निर्वाचन अखंडता एवं सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: चुनावी सुधारों से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संवैधानिक वादे को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: अनुच्छेद-326 जाति, धर्म, लिंग अथवा आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मतदान का अधिकार सुनिश्चित करता है।
  • बहिष्करण का जोखिम: अत्यधिक दस्तावेजीकरण या त्रुटिपूर्ण सत्यापन प्रक्रियाएँ वास्तविक मतदाताओं को गलत रूप से मताधिकार से वंचित कर सकती हैं।
  • हाशिए पर स्थित समूहों पर प्रभाव: प्रवासी, गरीब नागरिक, महिलाएँ, वृद्धजन एवं बेघर व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है।
  • विधिसम्मत प्रक्रिया: निर्वाचक नामावली की शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए तथा उसमें अपील एवं निष्पक्ष सुनवाई की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।
    • उदाहरण: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 नाम हटाने से पूर्व दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया प्रदान करता है।
  • लोकतांत्रिक संतुलन: संवैधानिक लोकतंत्र की आवश्यकता है कि चुनावी अखंडता के साथ-साथ समावेशिता एवं समान राजनीतिक भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।
  • उदाहरण: पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सहभागी लोकतंत्र एवं सूचित चुनावी अधिकारों के महत्त्व पर बल दिया था।

निष्कर्ष

निर्वाचन शुद्धता (Electoral Purity) एवं सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार परस्पर पूरक संवैधानिक लक्ष्य हैं, न कि परस्पर विरोधी सिद्धांत। किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वैधता तभी सुनिश्चित होती है, जब निर्वाचक नामावलियाँ एक साथ सटीक एवं समावेशी हों, जिससे कोई भी वास्तविक नागरिक राजनीतिक भागीदारी एवं प्रतिनिधित्व के अधिकार से वंचित न रहे।

Democracy is not only about voting, but also about identifying the persons entitled to participate in the choice of government. Discuss this statement in the context of the ECI’s Special Intensive Revision of electoral rolls and the constitutional balance between electoral purity and Universal Adult Suffrage. in hindi

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