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Q. विस्थापित आदिवासी आबादी के अधिकारों के विशेष संदर्भ में, मणिपुर जैसे संघर्ष क्षेत्रों में मतदाता सूची संशोधनों के निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

July 10, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण की पृष्ठभूमि एवं महत्त्व 
  • विस्थापित जनजातीय आबादी तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर इसके प्रभाव 
  • आगे की राह।

उत्तर

परिचय

मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, किंतु संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में इसके क्रियान्वयन के लिए विशेष संवेदनशीलता अपेक्षित होती है। मणिपुर में वर्ष 2023 से निरंतर हो रही जातीय हिंसा के कारण लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। ऐसे परिप्रेक्ष्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने विशेषकर कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदाय सहित विस्थापित जनजातीय आबादी के राजनीतिक बहिष्करण को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।

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मतदाता सूची पुनरीक्षण का महत्त्व एवं चुनौतियाँ

  • निर्वाचन की शुद्धता सुनिश्चित करना एवं अनियमितताओं की रोकथाम: नियमित पुनरीक्षण से मतदाता सूची से डुप्लीकेट, मृत अथवा अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने में सहायता मिलती है। निर्वाचन आयोग प्रमुख चुनावों से पूर्व मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराता है।
  • संघर्ष-जनित विस्थापन से सत्यापन में कठिनाई: नागरिकों के घर, दस्तावेज और स्थायी पते खो जाने की स्थिति में पारंपरिक सत्यापन प्रक्रिया प्रभावी नहीं रह जाती है।
    • उदाहरण: लगभग 50,000 कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदाय के लोग अब भी विस्थापित हैं, जिससे भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों का सत्यापन कठिन हो गया है।
  • मतदाता सत्यापन के राजनीतीकरण का जोखिम: संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया नृजातीय विमर्श और पहचान-आधारित राजनीति से प्रभावित हो सकती है।
    • उदाहरण: मणिपुर में कुछ समुदायों को “अवैध प्रवासी” बताकर लगाए गए आरोपों ने प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न की हैं।

विस्थापित जनजातीय आबादी पर प्रभाव

  • दस्तावेजों की हानि एवं बहिष्करण का जोखिम: विस्थापित समुदायों को पहचान संबंधी दस्तावेजों के नष्ट होने या खो जाने के कारण नागरिकता सिद्ध करने में कठिनाई हो सकती है।
    • उदाहरण: वर्ष 2023 की हिंसा के दौरान कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों ने आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र तथा ड्राइविंग लाइसेंस के नष्ट होने की सूचना दी।
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए खतरा: मतदाता सूची से बहिष्करण, विस्थापित समुदायों की शासन प्रक्रिया में भागीदारी तथा नीतिगत-निर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता को कम करता है।
  • सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक बाधाएँ: जनजातीय नामकरण परंपराएँ तथा दस्तावेजों में असंगतियाँ सत्यापन प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।
    • उदाहरण: कुकी-जो समुदाय के नामों में पारंपरिक नामकरण पद्धति तथा अंग्रेजी लिप्यंतरण (English Transliteration) के कारण होने वाले अंतर, आधिकारिक अभिलेखों में असंगति उत्पन्न कर सकते हैं।
  • सामाजिक अलगाव की भावना का गहरा होना: मतदाता सूची से बहिष्करण पहले से ही संवेदनशील समुदायों में हाशियाकरण की भावना को और मजबूत कर सकता है।
    • उदाहरण: मणिपुर हिंसा के लिए जवाबदेही का अभाव पहले ही राज्य संस्थाओं के प्रति विश्वास को कमजोर कर चुका है।
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से संघर्ष: अनुच्छेद-326 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव की गारंटी देता है; इसलिए किसी भी बहिष्करण का औचित्य अत्यंत सीमित एवं स्पष्ट होना चाहिए।
  • समानता एवं भेदभाव-रहित प्रक्रिया की आवश्यकता: निर्वाचन प्रक्रिया अनुच्छेद-14 में निहित समान संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

आगे की राह

  • विस्थापित व्यक्तियों के लिए विशेष मतदाता पंजीकरण व्यवस्था: मोबाइल पंजीकरण दल तथा राहत शिविर-आधारित मतदाता सत्यापन प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।
    • उदाहरण: आंतरिक रूप से विस्थापित मतदाताओं के लिए अस्थायी मतदान व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा सकता है।
  • लचीले दस्तावेजीकरण मानक: आधिकारिक दस्तावेजों के अभाव में सामुदायिक प्रमाणन एवं वैकल्पिक साक्ष्यों को मान्यता दी जाए। 
    • उदाहरण: जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम प्राधिकरण एवं स्थानीय निकाय पहचान सत्यापन में सहयोग कर सकते हैं।
  • संवेदनशील पुनरीक्षण प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी: संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में पर्यवेक्षकों तथा नागरिक समाज की भागीदारी के माध्यम से निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • संस्थागत विश्वास की पुनर्स्थापना: निर्वाचन प्रक्रिया से पूर्व हिंसा की निष्पक्ष जाँच पूरी कर तथा विस्थापित समुदायों में विश्वास बहाल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए।

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निष्कर्ष

मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है, किंतु मणिपुर जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में केवल दस्तावेज़-आधारित कठोर व्यवस्था से विस्थापित नागरिक मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। इसलिए इसका उद्देश्य सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करने के साथ-साथ समान नागरिकता, प्रतिनिधित्व एवं गरिमा के संवैधानिक वादे की भी रक्षा करना होना चाहिए।

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Critically examine the implications of electoral roll revisions in conflict zones like Manipur, with special reference to the rights of displaced tribal populations. in hindi

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