Q. विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 और मूल MGNREGA के बीच अंतरों को सूचीबद्ध कीजिए। माँग-आधारित ढाँचे को आपूर्ति-आधारित मॉडल से बदलने के संभावित निहितार्थ क्या हैं? (15 अंक, 250 शब्द)

December 25, 2025

GS Paper IIIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • मुख्य अंतर: विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन अधिनियम, 2025 बनाम MGNREGA (2005)
  • माँग-आधारित मॉडल को आपूर्ति-आधारित मॉडल से बदलने के निहितार्थ
  • सकारात्मक निहितार्थ
  • नकारात्मक निहितार्थ

उत्तर

विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025, भारत के ग्रामीण विकास परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है। वर्ष 2005 के MGNREGA को निरस्त करके, यह ‘राहत-केंद्रित’ सुरक्षा जाल से “संपत्ति-केंद्रित” मिशन की ओर अग्रसर है, जो ग्रामीण श्रम को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना संबंधी दृष्टिकोण के साथ एकीकृत करता है।

मुख्य अंतर: विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G), 2025 बनाम MGNREGA (वर्ष 2005) 

विशेषताएँ MGNREGA (वर्ष 2005) विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) (वर्ष 2025)
गारंटीशुदा कार्य प्रत्येक परिवार को 100 दिन का अकुशल शारीरिक श्रम। प्रत्येक परिवार को 125 दिन का वेतनभोगी रोजगार।
परिचालनात्मक प्रकृति माँग आधारित: माँग प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। आपूर्ति आधारित: कार्य केंद्रीय रूप से अनुमोदित “मानक आवंटन” पर निर्भर करता है।
फंडिंग पैटर्न अकुशल श्रमिकों की मजदूरी के लिए 100% केंद्रीय निधि; सामग्री के लिए 75:25 का अनुपात। केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का बँटवारा (पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों के लिए 90:10)।
कार्य उपलब्धता वर्ष भर, जब भी आवश्यकता हो, उपलब्ध। इसमें बुवाई/कटाई के चरम समय के दौरान 60 दिनों का “मौसमी विराम” शामिल है।
योजना रूपरेखा ग्राम पंचायतों के माध्यम से जमीनी स्तर की योजना बनाना। “विकसित ग्राम पंचायत योजनाएँ” और गति-शक्ति स्टैक के माध्यम से एकीकृत।

माँग-आधारित मॉडल को आपूर्ति-आधारित मॉडल से बदलने के निहितार्थ

सकारात्मक निहितार्थ

  • राजकोषीय पूर्वानुमानशीलता: बजट-सीमित आवंटन MGNREGA के तहत आम तौर पर होने वाली अनिश्चितकालीन राजकोषीय देनदारियों और मध्य-वर्ष के बजट अतिभार को रोकते हैं।
  • रणनीतिक परिसंपत्ति गुणवत्ता: पूर्व नियोजित परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने से ‘अनावश्यक खुदाई और भराई’ से बचा जा सकता है, जिससे सतत सामुदायिक बुनियादी ढाँचे का निर्माण सुनिश्चित होता है।
    • उदाहरण: पीएम गति-शक्ति के साथ कार्य को एकीकृत करने से ग्रामीण सड़कों जैसी परिसंपत्तियाँ राष्ट्रीय मानकों को पूरा करती हैं।
  • कृषि श्रम संतुलन: ‘मौसमी विराम’ फसल कटाई के दौरान ग्रामीण श्रम की कमी को रोकता है, जिससे कृषि उत्पादकता और मजदूरी स्थिर रहती है।

नकारात्मक निहितार्थ

  • अधिकारों का हनन: ‘कार्य करने के कानूनी अधिकार’ से ‘प्रशासनिक आवंटन’ की ओर बढ़ने से संकट के समय राज्य पर नागरिक का दावा कमजोर हो जाता है।
  • राज्यों पर वित्तीय दबाव: 60:40 का वित्त पोषण अनुपात वित्तीय अक्षमता के कारण गरीब राज्यों को रोजगार सीमित करने के लिए मजबूर कर सकता है।
  • स्थानीय स्वायत्तता का हनन: केंद्रीकृत मानक वित्तपोषण और पूर्व-अनुमोदित योजनाएँ अचानक उत्पन्न होने वाली अति-स्थानीय संकट की जरूरतों को नजरअंदाज कर सकती हैं।
    • उदाहरण: बजट-लिंकिंग एक सार्वभौमिक गारंटी को केंद्र द्वारा प्रबंधित “विवेकाधीन कल्याण योजना” में बदल सकती है।

निष्कर्ष

नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए, सरकार को “संकटकालीन उपाय” लागू करने होंगे, जो जलवायु या आर्थिक संकट के दौरान बजट में स्वतः वृद्धि की अनुमति दें। सफलता इस बात में निहित है कि कार्य के अधिकार को बनाए रखते हुए कार्य की गुणवत्ता में सुधार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि राजकोषीय अनुशासन ग्रामीण गरिमा तथा खाद्य सुरक्षा की कीमत पर न आए।

Enlist the differences between the Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act, 2025 and the original MGNREGA. What are the potential implications of replacing the demand-driven framework with a supply-driven model? in hindi

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