प्रश्न की मुख्य माँग
- प्रवेश परीक्षाओं के अंकों की योग्यता (मेरिट) के स्थायी संकेतक के रूप में सीमाएँ।
- प्रारंभिक प्रवेश-स्तरीय मापदंडों को हटाने की सामाजिक समानता को बढ़ावा देने में भूमिका।
- विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण एवं समग्र विकास पर प्रभाव।
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उत्तर
परिचय
JEE एवं GATE जैसी प्रवेश परीक्षाएँ प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के चयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, किंतु इनके अंक किसी विद्यार्थी की योग्यता का संपूर्ण मापदंड न होकर केवल एक समय-विशिष्ट मूल्यांकन का प्रतिनिधित्व करते हैं। सभी आईआईटीज (IITs) की प्लेसमेंट समिति द्वारा हाल ही में प्लेसमेंट रिज्यूमे से JEE रैंक, GATE स्कोर तथा परसेंटाइल संबंधी विवरण हटाने का निर्णय इस बात को दर्शाता है कि अब विद्यार्थियों का मूल्यांकन प्रवेश के समय प्राप्त उपलब्धियों के बजाय उनकी वर्तमान क्षमताओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
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योग्यता के स्थायी मापदंड के रूप में प्रवेश-स्तरीय मानकों की सीमाएँ
- समग्र क्षमता के बजाय एक समय-विशिष्ट मूल्यांकन: प्रवेश परीक्षा के अंक केवल एक परीक्षा दिवस के प्रदर्शन को मापते हैं, न कि दीर्घकालिक अधिगम, रचनात्मकता अथवा व्यावसायिक कौशलों को। किसी विद्यार्थी की JEE रैंक उसके चार वर्षों के इंजीनियरिंग अध्ययन के दौरान विकसित अनुसंधान परियोजनाओं, इंटर्नशिप, कोडिंग कौशल अथवा टीमवर्क को प्रतिबिंबित नहीं कर सकती है।
- विद्यार्थियों के विकास की पहचान को सीमित करना: उच्च शिक्षा विद्यार्थियों को अनुभव, सहपाठी अधिगम तथा व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से स्वयं को विकसित करने का अवसर प्रदान करती है।
- योग्यता की संकीर्ण परिभाषा का निर्माण: रैंक पर अत्यधिक बल देने से योग्यता को समस्या-समाधान क्षमता एवं नवाचार के स्थान पर केवल परीक्षा प्रदर्शन तक सीमित कर दिया जाता है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 परीक्षा परिणामों से परे आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता तथा समग्र विकास पर बल देती है।
प्रवेश-स्तरीय पहचान को हटाकर सामाजिक समानता को बढ़ावा देना
- अप्रत्यक्ष सामाजिक एवं प्रवेश-आधारित पक्षपात में कमी: प्रवेश रैंक अप्रत्यक्ष रूप से प्रवेश श्रेणी अथवा सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का संकेत दे सकती है, जिससे नियोक्ताओं (Recruiters) की धारणा प्रभावित हो सकती है। विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रारंभिक एवं अंतिम रैंक की तुलना करके किसी विद्यार्थी के प्रवेश के आधार के संबंध में अनुमान लगाया जा सकता है।
- विविध पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करना: ग्रामीण क्षेत्रों, क्षेत्रीय भाषा पृष्ठभूमि तथा वंचित समुदायों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों के वातावरण में स्वयं को अनुकूलित करने के लिए प्रायः समय की आवश्यकता होती है।
- उदाहरण: रैंक-आधारित चयन मापदंड को हटाने से ऐसे विद्यार्थियों का मूल्यांकन उनकी परियोजनाओं, कौशलों तथा साक्षात्कार के आधार पर किया जा सकता है।
- प्रवेश के विशेषाधिकार से प्राप्त योग्यता की ओर ध्यान केंद्रित करना: भर्ती प्रक्रिया में प्रवेश के समय की परिस्थितियों के बजाय वर्तमान में अर्जित क्षमता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को सुदृढ़ करना
- रैंक-आधारित पहचान के दबाव को कम करना: प्रवेश परीक्षा के अंकों को स्थायी पहचान के रूप में मानने से विद्यार्थियों में तुलना, चिंता तथा मनोवैज्ञानिक तनाव उत्पन्न होता है।
- निरंतर अधिगम को प्रोत्साहित करना: विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन के दौरान निरंतर कौशल विकास के लिए प्रेरणा मिलती है, जिससे उनकी पहचान केवल पूर्व प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहती है।
- स्वस्थ शैक्षणिक संस्कृति को बढ़ावा देना: रैंक-आधारित पदानुक्रम से दूर जाने पर अत्यधिक प्रतिस्पर्द्धा के स्थान पर सहयोगात्मक वातावरण को प्रोत्साहन मिलता है।
- उदाहरण: परियोजनाओं, इंटर्नशिप, कोडिंग मूल्यांकन तथा व्यवाहारिक कौशलों के आधार पर मूल्यांकन करने से विद्यार्थियों की क्षमता को अधिक व्यापक रूप से मान्यता मिलती है।
आगे की राह
- क्षमता-आधारित भर्ती प्रणाली अपनाना: विद्यार्थियों का मूल्यांकन कौशलों, परियोजनाओं, इंटर्नशिप तथा समस्या-समाधान क्षमता के आधार पर किया जाए।
- उदाहरण: तकनीकी साक्षात्कार एवं परियोजना पोर्टफोलियो कार्यस्थल के लिए उनकी तत्परता का बेहतर आकलन कर सकते हैं।
- समग्र संस्थागत मूल्यांकन ढाँचा विकसित करना: शैक्षणिक प्रदर्शन, अनुसंधान, नवाचार तथा व्यावहारिक अनुभव को सम्मिलित करते हुए मूल्यांकन किया जाए।
- उदाहरण: CPI/CGPA, अनुसंधान प्रकाशन तथा प्रोटोटाइप विकास प्रासंगिक मूल्यांकन संकेतक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- समावेशी कॅरियर सहायता प्रणाली का विस्तार करना: वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को मेंटरशिप एवं प्लेसमेंट सहायता प्रदान की जाए। उद्योग-मार्गदर्शन कार्यक्रम प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों को कौशल संबंधी अंतराल को कम करने में सहायता कर सकते हैं।
- परिणाम-आधारित रोजगार रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना: असाधारण वेतन पैकेजों के बजाय यथार्थवादी रोजगार संकेतकों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- उदाहरण: केवल सर्वोच्च वेतन पैकेज को प्रदर्शित करने के बजाय माध्यिका वेतन की रिपोर्टिंग रोजगार की अधिक यथार्थपरक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
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निष्कर्ष
प्रवेश परीक्षाएँ शैक्षणिक चयन के लिए महत्त्वपूर्ण बनी रहेंगी, किंतु उन्हें योग्यता का स्थायी मापदंड नहीं बनाया जाना चाहिए। एक निष्पक्ष भर्ती प्रणाली को विद्यार्थियों के विकास, क्षमता तथा संभावनाओं को मान्यता देनी चाहिए, जिससे वे अपनी प्रारंभिक सीमाओं को पार कर सकें तथा उच्च शिक्षा उत्कृष्टता एवं सामाजिक गतिशीलता, दोनों के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य कर सके।