प्रश्न की मुख्य माँग
- GST 2.0 में प्रमुख संरचनात्मक सुधार प्रस्तुत किए गए।
- नया ढाँचा किस प्रकार दक्षता और उत्पादकता के साथ-साथ समानता और समावेशिता के दोहरे उद्देश्यों को संतुलित करता है।
- दोहरे उद्देश्यों में संतुलन स्थापित करने में नए ढाँचे की सीमाएँ।
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उत्तर
वर्ष 2017 में लागू की गई वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत स्वरूप प्रदान किया। हाल ही में किए गए GST 2.0 सुधारों में दो-दर संरचना की सरलता, आवश्यक वस्तुओं पर छूट, कर प्रणाली में मौजूद विकृतियों का सुधार तथा GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) का संचालन शामिल है। इन सभी सुधारों का सामूहिक उद्देश्य कराधान प्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और न्यायसंगत बनाना है, ताकि आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशन की भावना को भी सुदृढ़ किया जा सके।
GST 2.0 में प्रस्तुत किए गए प्रमुख संरचनात्मक सुधार
- दो-स्लेब सरलीकरण: GST 2.0 ने पहले की अनेक कर-स्तरों को हटाकर केवल दो मुख्य दरों को अपनाया है – 18% मानक दर और 5% रियायती दर, साथ ही कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40% की दंडात्मक दर (Demerit Rate) भी लगाई गई है।
- उदाहरण के लिए: साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और साइकिल जैसी वस्तुओं को 5% श्रेणी में लाया गया है। इससे अनुपालन का बोझ कम हुआ है और कर-प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप बनाया गया है।
- आवश्यक सेवाओं पर पूर्ण छूट: जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा तथा आवश्यक उपभोक्ता वस्तुएँ जैसे UHT दूध, पनीर और रोटी पर GST को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। इससे आमजन को प्रत्यक्ष राहत मिली है और सामाजिक न्याय को मजबूती मिली है।
- व्युतक्रमी शुल्क संरचना में सुधार: टेक्सटाइल, उर्वरक और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कर-विकृतियों को समाप्त किया गया है, जिससे मूल्य शृंखला की दक्षता बहाल हुई है।
- उदाहरण के लिए: मानव निर्मित रेशों पर GST घटाकर 5% कर दिया गया, जिससे वस्त्र और निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी।
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रोत्साहन: ट्रैक्टर, उर्वरक, हस्तशिल्प और चमड़े के उत्पादों पर GST की दरें घटाई गई हैं। इससे उत्पादन लागत में कमी आई है और लाखों श्रमिकों के रोजगार की सुरक्षा हुई है।
- उदाहरण के लिए: उर्वरक पर GST 18% से घटाकर 5% करने से खेती की लागत कम होती है और कृषि उत्पादकता बढ़ती है।
- संस्थागत सुधार – GSTAT का संचालन: वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की घोषणा शीघ्र विवाद समाधान सुनिश्चित करता है ।
समता, समावेशिता और दक्षता एवं उत्पादकता में संतुलन:
- आवश्यक वस्तुओं पर कम कर के माध्यम से समानता: GST 2.0 ने बुनियादी खाद्य वस्तुओं को कर-मुक्त किया और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर दरें कम कीं। इससे सभी आय वर्गों को सीधी राहत मिली है और कराधान प्रणाली अधिक न्यायसंगत बनी है।
- उदाहरण के लिए: रसोई से जुड़ी वस्तुएँ और साबुन जैसी आवश्यक चीजें 5% कर दर पर आने से घरेलू खर्च कम हुए, जिससे कर व्यवस्था में समानता की भावना मजबूत हुई।
- सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देकर समावेशिता: जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पर से GST हटाने से इन सेवाओं की पहुँच कमजोर और संवेदनशील वर्गों तक बढ़ गई है।
- उदाहरण के लिए: वरिष्ठ नागरिकों के लिए बीमा प्रीमियम सस्ता हुआ, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच आसान हुई और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिला।
- शुल्क सुधार के माध्यम से दक्षता: व्युतक्रमी कर संरचना को ठीक करने से प्रमुख उद्योगों में उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इससे मूल्य शृंखला में अनावश्यक बाधाएँ हटाकर दक्षता सुनिश्चित की गई है।
- बुनियादी ढाँचे के सहयोग से उत्पादकता: सीमेंट जैसे प्रमुख निर्माण-सामग्री पर GST घटाने से आवास और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र को गति मिली है। यह न केवल उद्योग जगत को सशक्त बनाता है, बल्कि पूरे अर्थतंत्र पर गुणक प्रभाव भी डालता है।
- उदाहरण के लिए: सीमेंट की दर 28% से घटाकर 18% करने से निर्माण लागत कम हो जाती है, जिससे उद्योग और नागरिकों दोनों को मदद मिलती है।
- किसानों और श्रमिकों के लिए समावेशिता: खेती से जुड़ी सामग्रियों और पारंपरिक उद्योगों पर कर दरें कम करने से ग्रामीण आजीविका को सुरक्षा मिली है और उत्पादन की दक्षता भी बढ़ी है।
- उदाहरण के लिए: ट्रैक्टर पर 5% कर दर छोटे किसानों के लिए राहत का कारण बनी, जिससे उत्पादकता और समानता के बीच संतुलन कायम हुआ।
दोहरे उद्देश्यों में संतुलन स्थापित करने में सीमाएँ:
- राजस्व स्थिरता की चिंताएँ: आवश्यक वस्तुओं पर कर दरें घटाने से सरकार की कर-संग्रहण क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे समग्र राजकोषीय स्वास्थ्य को चुनौती मिल सकती है।
- उदाहरण के लिए: नूडल्स और चॉकलेट जैसी खाद्य वस्तुओं पर कर दरों में कटौती से तात्कालिक कर-संग्रहण में कमी आ सकती है।
- अति-सरलीकरण का जोखिम: दो-दर संरचना लागू करने से कर प्रणाली भले ही सरल हो गई है, परंतु यह अर्थव्यवस्था की विविध वास्तविकताओं को पूरी तरह से नहीं दर्शा पाती। इससे कई क्षेत्रों में विसंगतियों और असमानताओं की गुंजाइश बनी रहती है।
- कुछ क्षेत्रों को लाभ से वंचित करना: कई सेवा-आधारित उद्योग और नए उभरते क्षेत्र अभी भी ऊँची कर दरों का सामना कर रहे हैं। इससे समावेशन की भावना सीमित हो जाती है और आर्थिक न्याय अधूरा रह जाता है।
- कार्यान्वयन और अनुपालन चुनौतियाँ: GSTAT जैसी नई संस्थागत व्यवस्थाओं और प्रोविजनल रिफंड जैसे सुधारों का सफल कार्यान्वयन मज़बूत संस्थागत क्षमता पर निर्भर करता है।
- उदाहरण के लिये: अतीत में GST पोर्टल के उन्नयन में हुई देरी ने दिखाया है कि क्रियान्वयन के स्तर पर जोखिम हमेशा बने रहते हैं।
- उपभोग बनाम निवेश का असंतुलन: GST 2.0 में राहत के उपाय मुख्यतः उपभोग को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित हैं, जबकि उच्च प्रौद्योगिकी या हरित ऊर्जा जैसे निवेश-उन्मुख क्षेत्रों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिला।
- उदाहरण के लिए: उपभोक्ता वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद सेमीकंडक्टर या विद्युत वाहन बैटरियों जैसे क्षेत्रों की अनदेखी एकतरफ़ा झुकाव को दर्शाती है।
निष्कर्ष
GST 2.0 कर सुधारों में एक साहसिक कदम साबित हुआ है, जिसने कर-दरों को सरल बनाया, संरचनात्मक विकृतियों को दूर किया और नागरिकों, किसानों व व्यापारियों पर बोझ को कम किया। यह समानता और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करता है, हालांकि राजस्व स्थिरता, कुछ क्षेत्रों की अनदेखी और संस्थागत क्षमता जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। निरंतर समीक्षा और मज़बूत क्रियान्वयन ही सुनिश्चित करेगा कि कर प्रणाली आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय – दोनों को आगे बढ़ा सके।