प्रश्न की मुख्य माँग
- आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAS) को हटाने की सीमाओँ की चर्चा कीजिए।
- अन्य योगदानकारी कारकों का उल्लेख कीजिए।
- समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन दृष्टिकोण का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
लैंटाना कैमारा (Lantana camara) जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ उन पारिस्थितिकी तंत्रों में तीव्र गति से फैलती हैं, जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई तथा अस्थिर मानवीय गतिविधियों के कारण कमजोर हो चुके हैं। अतः केवल इनके उन्मूलन से पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इन गहन पारिस्थितिकी कारकों का समाधान न किया जाए।
आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAS) को हटाने की सीमाएँ
- लक्षणों पर केंद्रित दृष्टिकोण: आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ प्रायः पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते तनाव का संकेत होती हैं, न कि क्षरण का एकमात्र कारण।
- उदाहरण: आक्रामक प्रजातियाँ उन क्षेत्रों में अधिक फैलती हैं, जहाँ नमी और मृदा रसायन पहले से परिवर्तित हो चुके होते हैं।
- अस्थायी राहत: आवासीय परिस्थितियों में सुधार किए बिना आक्रामक विदेशी प्रजातियों को हटाने से वही प्रजातियाँ पुनः तीव्रता से फैलने लगती हैं।
- उदाहरण: वनों में लैंटाना की बार-बार सफाई के बावजूद, मृदा व्यवधान यथावत रहने के कारण इसका पुनः प्रसार हो जाता है।
- मूल कारणों की उपेक्षा: उन्मूलन अभियान भूमि उपयोग परिवर्तन, प्रदूषण तथा पोषक तत्त्वों के असंतुलन जैसे कारकों की अनदेखी करते हैं, जो आक्रमण को बढ़ावा देते हैं।
- उदाहरण: सेनना स्पेक्टाबिलिस जैसी काष्ठीय नाइट्रोजन-स्थिरीकरण प्रजातियाँ नाइट्रोजन-समृद्ध परिवर्तित परिस्थितियों में तेजी से पनपती हैं।
- स्थानीय जैव विविधता को हानि: व्यापक स्तर पर आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ हटाने से स्थानीय रूप से अनुकूलित जैव विविधता तथा विकसित पारिस्थितिकी संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
- उदाहरण: आक्रामक वनस्पतियों को अचानक हटाने से उस पर निर्भर कीटों, पक्षियों अथवा कमजोर मृदा स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अन्य योगदानकारी कारक
- जलवायु संबंधी दबाव: बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्रों को कमजोर करते हैं तथा आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को बढ़ावा देते हैं।
- उदाहरण: IPCC की रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण एशिया में बढ़ती गर्मी और वर्षा की अनिश्चितता वनों की सहनशीलता को प्रभावित कर रही है।
- उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग: नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मृदा पोषक तत्त्वों के संतुलन को बदल देता है, जिससे तीव्र गति से बढ़ने वाली आक्रामक प्रजातियों को लाभ मिलता है।
- उदाहरण: भारत में प्रतिवर्ष लगभग 35–40 मिलियन टन यूरिया का उपयोग किया जाता है।
- वनों की कटाई का प्रभाव: वनों का विखंडन ऐसे बाधित आवास निर्मित करता है, जहाँ आक्रामक प्रजातियाँ स्थानीय पौधों की तुलना में अधिक तेजी से स्थापित हो जाती हैं।
- उदाहरण: पश्चिमी घाटों में खुले वन-किनारे प्रायः लैंटाना और सेनना के आक्रमण के प्रमुख केंद्र बन जाते हैं।
- जल तंत्र में परिवर्तन: बाँधों, जल निकासी तथा आर्द्रभूमियों के विनाश से जल विज्ञान में परिवर्तन होता है, जो आक्रामक प्रजातियों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करता है।
- उदाहरण: सूखती आर्द्रभूमियों में प्रायः जलकुंभी जैसी आक्रामक जलीय खरपतवारों का प्रसार देखा जाता है।
समग्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन दृष्टिकोण
- आवासीय पुनर्प्राप्ति: पुनर्स्थापन प्रयासों का उद्देश्य केवल आक्रामक प्रजातियों को हटाना नहीं, बल्कि मृदा, जल तथा स्थानीय वनस्पति का पुनर्निर्माण होना चाहिए।
- उदाहरण: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत आर्द्रभूमियों का पुनर्जीवन पारिस्थितिकी तंत्र की सहनशीलता को सुदृढ़ करता है।
- स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन: क्षेत्र-विशिष्ट स्थानीय प्रजातियों का पुन:रोपण पारिस्थितिकी संतुलन को पुनर्स्थापित करने तथा पुनः आक्रमण को रोकने में सहायक होता है।
- उदाहरण: नीलगिरी के शोला घासभूमि पुनर्स्थापन कार्यक्रमों में एकल प्रजातीय वृक्षारोपण के स्थान पर स्थानीय पर्वतीय प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
- पोषक तत्त्व संतुलन: सतत् उर्वरक उपयोग के माध्यम से कृत्रिम पोषक तत्त्वों की अत्यधिक मात्रा को कम किया जाना चाहिए, जो आक्रामक प्रजातियों की वृद्धि को बढ़ावा देती है।
- उदाहरण: पीएम-प्रणाम (PM-PRANAM) योजना संतुलित उर्वरक उपयोग तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग में कमी को प्रोत्साहित करती है।
- समुदाय की भूमिका: दीर्घकालिक पारिस्थितिकी सफलता हेतु स्थानीय समुदायों को निगरानी एवं पुनर्स्थापन प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: संयुक्त वन प्रबंधन समितियाँ अनेक वन प्रभागों में पुनर्स्थापित परिदृश्यों के संरक्षण में योगदान दे रही हैं।
- परिदृश्य आधारित नियोजन: संरक्षण प्रयासों में वन, आर्द्रभूमि, कृषि क्षेत्र तथा शहरी क्षेत्रों को एक समग्र परिदृश्य स्तर पर एकीकृत किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: कैंपा (CAMPA) समर्थित पुनर्स्थापन परियोजनाएँ अब जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने पर बल दे रही हैं।
निष्कर्ष
सतत् पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के लिए केवल आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAS) को हटाने से आगे बढ़कर जलवायु सहनशीलता, स्थानीय आवासों के पुनर्जीवन तथा उत्तरदायी भूमि उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। यह समग्र दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों, विशेषकर सतत् विकास लक्ष्य- 13 (जलवायु कार्रवाई) और सतत् विकास लक्ष्य- 15 (स्थलीय जीवन) की प्राप्ति को भी सुदृढ़ करता है।