प्रश्न की मुख्य माँग
- समावेशी नेतृत्व वाले परिवर्तन के लिए सामाजिक-आर्थिक ढाँचा का उल्लेख कीजिए।
- वैधता के लिए प्रशासनिक और शासन सुधार का वर्णन कीजिए।
- संघर्षोत्तर संक्रमण दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
वामपंथी उग्रवाद के पतन के साथ, राज्य की चुनौती क्षेत्रीय नियंत्रण से हटकर जनता का विश्वास अर्जित करने की ओर स्थानांतरित हो गई है। ‘रेड कॉरिडोर‘ में स्थायी शांति अब दमनकारी सुरक्षा उपायों के बजाय वैधता, समावेश और उत्तरदायी शासन पर निर्भर करती है।
समावेशन-आधारित परिवर्तन हेतु सामाजिक-आर्थिक ढाँचा
- भूमि अधिकार: ऐतिहासिक वंचना और आजीविका असुरक्षा को दूर करने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए।
- उदाहरण: वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में सामुदायिक वन अधिकार पट्टों का वितरण।
- आजीविका समर्थन: आर्थिक असुरक्षा को कम करने हेतु स्थायी स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जाए।
- उदाहरण: वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा का विस्तार, जिससे मजदूरी रोजगार और संपत्ति निर्माण सुनिश्चित होता है।
- मानव विकास: शिक्षा और स्वास्थ्य में अंतर को कम कर जीवन स्तर और राज्य की विश्वसनीयता को बढ़ाया जाए।
- उदाहरण: आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत दंतेवाड़ा जैसे जिलों में स्वास्थ्य और शिक्षा संकेतकों में सुधार।
- अवसंरचना पहुँच: दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने के लिए संपर्क और मूलभूत सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए।
- उदाहरण: वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क आवश्यकता योजना के तहत सड़क नेटवर्क का विस्तार।
- वित्तीय समावेशन: बैंकिंग सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच सुनिश्चित कर शोषण और बहिष्करण को कम किया जाए।
- उदाहरण: प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)।
वैधता के लिए प्रशासनिक एवं शासन सुधार
- विकेंद्रीकरण को बढ़ावा: शासन को सहभागी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए स्थानीय संस्थाओं को सशक्त किया जाए।
- उदाहरण: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार अधिनियम, 1996 (PESA) के तहत ग्राम सभाओं को स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण दिया गया है।
- सेवा वितरण में पारदर्शिता: भ्रष्टाचार-मुक्त और जवाबदेह सेवा प्रदायगी सुनिश्चित की जाए।
- उदाहरण: लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से पारदर्शी निधि प्रवाह।
- अंतिम छोर तक पहुँच: दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशासनिक उपस्थिति को मजबूत कर सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- उदाहरण: जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना।
- पुलिस सुधार: पुलिसिंग को दमनात्मक से समुदाय-उन्मुख बनाकर विश्वास निर्माण किया जाए।
- उदाहरण: झारखंड में ‘मैत्री’ शिविर जैसे सामुदायिक पुलिसिंग प्रयास।
- शिकायत निवारण: नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु सुलभ मंच विकसित किए जाएँ।
- उदाहरण: CPGRAMS के माध्यम से नागरिक डिजिटल रूप से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
संघर्षोत्तर संक्रमण दृष्टिकोण
- शासन ढाँचा: संघर्षोत्तर परिवर्तन के लिए संरचित, समावेशी और उत्तरदायी शासन प्रणाली अपनाई जाए।
- उदाहरण: AIEEEE मॉडल– जवाबदेही, नवाचार, साक्ष्य-आधारित नीति, समानता, सहानुभूति और दक्षता पर आधारित शासन।
- कैडर पुनर्वास: पूर्व उग्रवादियों को कौशल विकास और आजीविका समर्थन के माध्यम से मुख्यधारा में पुनः शामिल किया जाए।
- उदाहरण: समर्पण-सह-पुनर्वास नीति (2018) के तहत वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण।
- विश्वास निर्माण: संवाद और कल्याणकारी पहुँच के माध्यम से जनता का विश्वास बढ़ाया जाए।
- सांस्कृतिक संवेदनशीलता: विकास योजनाओं में जनजातीय पहचान और परंपराओं का सम्मान किया जाए।
- उदाहरण: वन अधिकार अधिनियम के तहत लघु वनोपज अधिकारों की मान्यता, जो जनजातीय स्वायत्तता को सुनिश्चित करती है।
- सतत् विकास: विकास को पर्यावरणीय और सामाजिक स्थिरता के साथ संतुलित किया जाए, ताकि नए असंतोष उत्पन्न न हों।
- उदाहरण: जनजातीय क्षेत्रों में पर्यावरण-संवेदनशील विकास, जो नीति आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।
निष्कर्ष
समावेशी सामाजिक-आर्थिक नीतियाँ, जवाबदेह शासन और संवेदनशील संघर्षोत्तर रणनीतियाँ मिलकर ‘रेड कॉरिडोर’ को विश्वास और अवसर के क्षेत्र में परिवर्तित कर सकती हैं। इससे स्थायी शांति सुनिश्चित होगी तथा वंचना, अस्थिरता तथा उग्रवाद की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।
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