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Q. "पारिस्थितिकी एक स्थायी अर्थव्यवस्था है।" इस कथन के आलोक में, पारंपरिक आर्थिक विकास मॉडल का मूल्यांकन कीजिए जो पारिस्थितिक स्थिरता की उपेक्षा करते हैं। भारत आर्थिक आकांक्षाओं को पारिस्थितिक अनिवार्यताओं के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित कर सकता है? (15 अंक, 250 शब्द)

May 14, 2025

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • व्याख्या कीजिए कि पारिस्थितिकी को स्थायी अर्थव्यवस्था क्यों माना जाता है। 
  • पारंपरिक आर्थिक विकास मॉडलों का मूल्यांकन कीजिए जो पारिस्थितिक स्थिरता की उपेक्षा करते हैं। 
  • भारत आर्थिक आकांक्षाओं को पारिस्थितिक अनिवार्यताओं के साथ कैसे समेट सकता है।  

उत्तर

यह सिद्धांत कि “पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है” पर्यावरणीय स्थिरता एवं दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि के बीच अंतर्निहित संबंध को रेखांकित करता है। भारतीय संदर्भ में, यह दर्शन आर्थिक नियोजन में पारिस्थितिक विचारों को एकीकृत करने की वकालत करता है, यह सुनिश्चित करता है कि विकास समावेशी तथा सतत दोनों हो।

पारिस्थितिकी को स्थायी अर्थव्यवस्था क्यों माना जाता है

  • संसाधनों का सतत प्रबंधन: पारिस्थितिकी संतुलन प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जो आर्थिक गतिविधियों के लिए आधारभूत हैं।
  • जलवायु लचीलापन: स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु संबंधी आपदाओं के विरुद्ध बफर के रूप में कार्य करते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान कम होता है।
    • उदाहरण: सुंदरबन में मैंग्रोव वन चक्रवातों के प्रभाव को कम करते हैं, समुदायों एवं बुनियादी ढांचे की रक्षा करते हैं।
  • कृषि उत्पादकता: पारिस्थितिकी प्रथाएँ मिट्टी की उर्वरता एवं जल संरक्षण को बढ़ाती हैं, जिससे कृषि उपज में वृद्धि होती है।
    • उदाहरण: सिक्किम में जैविक खेती को अपनाने से उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
  • स्वास्थ्य एवं कल्याण: स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य सेवा लागत को कम करता है एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे आर्थिक दक्षता में योगदान मिलता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी व्यय कम होते हैं।
  • पर्यटन एवं मनोरंजन: संरक्षित प्राकृतिक परिदृश्य पर्यटन को आकर्षित करते हैं, जिससे राजस्व एवं रोजगार उत्पन्न होता है।
    • उदाहरण: केरल के पश्चिमी घाट में पारिस्थितिकी पर्यटन संरक्षण को बढ़ावा देते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करता है।

पारम्परिक आर्थिक विकास मॉडल पारिस्थितिकी स्थिरता की अनदेखी करते हैं

  • संसाधनों का ह्रास: पारम्परिक मॉडल अल्पकालिक लाभ को प्राथमिकता देते हैं, जिससे संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है।
    • उदाहरण: पंजाब में अत्यधिक भूजल निष्कर्षण के परिणामस्वरूप जल स्तर में गिरावट आई है, जिससे कृषि को खतरा है।
  • प्रदूषण एवं उत्सर्जन: औद्योगिक विकास अक्सर प्रदूषण को बढ़ाता है, जिससे स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं।
    • उदाहरण: गंगा नदी औद्योगिक उत्सर्जन के कारण गंभीर प्रदूषण का सामना करती है, जिससे जैव विविधता एवं मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
  • जैव विविधता का नुकसान: पारम्परिक मॉडल के तहत शहरीकरण एवं वनों की कटाई से आवास विनाश होता है।
    • उदाहरण: जैव विविधता हॉटस्पॉट पश्चिमी घाट को बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं से खतरा है।
  • असमान विकास: आर्थिक मॉडल अक्सर हाशिए पर पड़े समुदायों की उपेक्षा करते हैं, जिससे असमानताएँ बढ़ती हैं।
    • उदाहरण: झारखंड में आदिवासी आबादी खनन गतिविधियों के कारण विस्थापन का सामना करती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की उपेक्षा: जीवाश्म ईंधन पर पारम्परिक निर्भरता अक्षय ऊर्जा स्रोतों की क्षमता की अनदेखी करती है।

भारत में पारिस्थितिकी अनिवार्यताओं के साथ आर्थिक आकांक्षाओं का सामंजस्य स्थापित करना

  • हरित ऊर्जा संक्रमण: नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है एवं उत्सर्जन पर अंकुश लगता है।
    • उदाहरण: भारत के राष्ट्रीय सौर मिशन का लक्ष्य 100 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
  • संधारणीय कृषि: जैविक एवं पुनर्योजी खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है तथा रासायनिक उपयोग में कमी आती है।
    • उदाहरण: परम्परागत कृषि विकास योजना पूरे भारत में जैविक खेती के तरीकों का समर्थन करती है।
  • वनीकरण एवं संरक्षण: वनीकरण के प्रयास पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करते हैं एवं कार्बन को अलग करते हैं।
    • उदाहरण: ग्रीन इंडिया मिशन वन क्षेत्र एवं जैव विविधता को बढ़ाने पर केंद्रित है।
  • पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढाँचा: हरित भवन संहिता को लागू करने से ऊर्जा दक्षता एवं पर्यावरण अनुपालन सुनिश्चित होता है।
    • उदाहरण: ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC) ऊर्जा कुशल भवनों के लिए मानक निर्धारित करती है।
  • सामुदायिक जुड़ाव: संरक्षण में स्थानीय समुदायों को शामिल करने से प्रबंधन एवं संधारणीय आजीविका को बढ़ावा मिलता है।
    • उदाहरण: संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) कार्यक्रम वन संरक्षण में समुदायों को सशक्त बनाता है।

पारिस्थितिकी ही स्थायी अर्थव्यवस्था है, इस सिद्धांत को अपनाना भारत के सतत विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है। आर्थिक नियोजन में पारिस्थितिकी संबंधी विचारों को एकीकृत करके भारत समावेशी विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं दीर्घकालिक समृद्धि प्राप्त कर सकता है। यह समग्र दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि आर्थिक आकांक्षाएँ पारिस्थितिकी अनिवार्यताओं के साथ संरेखित हों, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक लचीला भविष्य सुनिश्चित हो।

“Ecology is the permanent economy.” In light of this statement, Evaluate the conventional economic growth models that disregard ecological sustainability. How can India reconcile economic aspirations with ecological imperatives? in hindi

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