प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत की रेलवे अवसंरचना के आधुनिकीकरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।
- मौजूदा सार्वजनिक रेलवे प्रणालियों के साथ निजी निवेश को एकीकृत करने में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।
- आगे की राह लिखिए।
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उत्तर
भारतीय रेलवे, दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जो सालाना 8 बिलियन से अधिक यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाता है, लेकिन वर्तमान समय में यह पुरानी अवसंरचना, क्षमता संबंधी बाधाओं और कम सेवा गुणवत्ता के मुद्दों का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय रेल योजना 2030 के तहत रेलवे आधुनिकीकरण के लिए ₹40 लाख करोड़ के निवेश लक्ष्य के साथ, प्रौद्योगिकी संचार, पूँजी जुटाने और दक्षता में सुधार के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी अति महत्त्वपूर्ण है।
भारत के रेलवे बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी की संभावना
- बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए पूँजी जुटाना: निजी क्षेत्र की भागीदारी स्टेशन पुनर्विकास, बुलेट ट्रेन और समर्पित माल कॉरिडोर में वित्तपोषण की कमी को पूरा कर सकती है।
- उदाहरण के लिए: PPP मॉडल के तहत, रानी कमलापति (हबीबगंज) और गांधीनगर कैपिटल जैसे स्टेशनों का निजी निवेश से आधुनिकीकरण किया गया।
- प्रौद्योगिकी संचार और नवाचार: निजी कंपनियाँ सिग्नलिंग, टिकटिंग, ऊर्जा दक्षता और परिसंपत्ति प्रबंधन से संबंधित वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को वर्तमान रेल प्रणाली में एकीकृत कर सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: सीमेंस (Siemens) और एल्सटॉम (Alstom) जैसी कंपनियाँ हाई-स्पीड ट्रेन प्रौद्योगिकी और स्मार्ट विद्युतीकरण के लिए भारतीय रेलवे के साथ साझेदारी कर रही हैं।
- यात्री सेवाओं और सुविधाओं में सुधार: निजी ऑपरेटर आधुनिक ट्रेनों, तेज सेवाओं, डिजिटल टिकटिंग और लग्जरी कोचों के जरिए बेहतर ग्राहक अनुभव प्रदान कर सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: निजी संचालित IRCTC तेजस एक्सप्रेस एयरलाइन जैसी सेवाएँ प्रदान करती है, जो यात्री सुविधा के लिए नए मानक स्थापित करती है।
- तीव्र क्रियान्वयन और परिचालन दक्षता: निजी क्षेत्र की भागीदारी से परियोजनाओं का निष्पादन तीव्र गति से होता है, निर्माण के आधुनिक तरीके अपनाए जाते हैं और प्रशासनिक देरी कम होती है।
- उदाहरण के लिए: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) जैसी परियोजनाओं में निजी ठेकेदारों और परामर्शदाताओं को शामिल करने के बाद तेजी देखी गई।
- नौकरियों और उद्यमशीलता के अवसरों का सृजन: विनिर्माण, रखरखाव, खानपान और स्टेशन प्रबंधन में सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के विस्तार से महत्त्वपूर्ण रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: अमृत भारत स्टेशन योजना (2023-24) के तहत स्टेशनों के पुनर्विकास से हजारों नौकरियों के सृजित होने की उम्मीद है।
- संधारणीयता और हरित अवसंरचना को बढ़ावा देना: निजी निवेश भारत के नेट जीरो 2070 लक्ष्य के अनुरूप हरित ऊर्जा, सौर रेलवे और संधारणीय निर्माण प्रथाओं में सहायता कर सकता है।
- उदाहरण के लिए: रीन्यू पॉवर जैसी निजी कंपनियों के साथ भारतीय रेलवे की साझेदारी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है।
मौजूदा सार्वजनिक रेलवे प्रणालियों के साथ निजी निवेश को एकीकृत करने में आने वाली चुनौतियाँ
- विनियामक अनिश्चितता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव: किराया विनियमन, लाभ-साझाकरण और विवाद समाधान पर अस्पष्टता, निजी क्षेत्र की सतत् रुचि को हतोत्साहित करती है।
- सामाजिक दायित्वों के साथ वाणिज्यिक हितों को संतुलित करना: निजी फर्म लाभदायक मार्गों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि भारतीय रेलवे को सामाजिक जनादेश के तहत घाटे में चल रही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की सेवाएँ भी चलानी पड़ती हैं।
- उदाहरण के लिए: क्रॉस-सब्सिडी मॉडल (जहाँ माल ढुलाई राजस्व सस्ते यात्री किराए को सब्सिडी देने में मदद करता है) निजी क्षेत्र के अर्थशास्त्र को जटिल बनाता है।
- अनुबंध अनुमोदन में देरी और प्रशासनिक बाधाएँ: टेंडरिंग, भूमि अधिग्रहण और परियोजना मंजूरी में प्रशासनिक देरी का सामना करना पड़ता है, जिससे निजी निवेश की व्यवहार्यता प्रभावित होती है।
- राजस्व साझाकरण और जोखिम आवंटन चुनौतियाँ: निजी कंपनियाँ पूर्वानुमानित रिटर्न चाहती हैं, लेकिन राजस्व मॉडल में अक्सर स्टेशनों पर रिटेल स्पेस जैसी सहायक गतिविधियों से होने वाली आय पर स्पष्टता का अभाव होता है।
- उदाहरण के लिए: स्टेशन पुनर्विकास के लिए नई सार्वजनिक निजी भागीदारी नीति 2023 के तहत, बोलीदाताओं ने जटिल जोखिम-साझाकरण संरचनाओं पर चिंता व्यक्त की।
- भाई-भतीजावाद का जोखिम और समान अवसर का अभाव: चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों के प्रति पक्षपात की चिंता पारदर्शिता को कमजोर कर सकती है और जनता के विश्वास को समाप्त कर सकती है।
निजी निवेश को एकीकृत करने में आने वाली चुनौतियों का समाधान
- एक मजबूत स्वतंत्र विनियामक प्राधिकरण का निर्माण: पारदर्शी किराया विनियमन, विवाद समाधान और सेवा गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करने के लिए रेल विकास प्राधिकरण (RDA) जैसी संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: सिंगापुर का भूमि परिवहन प्राधिकरण सार्वजनिक और निजी ऑपरेटरों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा सुनिश्चित करते हुए स्वतंत्र रूप से परिवहन नीतियों का प्रबंधन करता है।
- पारदर्शी और प्रतिस्पर्द्धी बोली प्रक्रिया सुनिश्चित करना: एकाधिकार और भाई-भतीजावाद को रोकने के लिए PPP परियोजना आवंटन हेतु स्पष्ट, पारदर्शी दिशा-निर्देश स्थापित करने चाहिए।
- भूमि अधिग्रहण और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना: प्रशासनिक देरी को
कम करने के लिए PPP रेलवे परियोजनाओं हेतु सिंगल-विंडो तंत्र के माध्यम से फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस स्थापित करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (DFCCIL) ने परियोजना को पूरा करने में तेजी लाने के लिए त्वरित भूमि अधिग्रहण सेल का उपयोग किया।
- अनुबंधों में स्पष्ट जोखिम साझाकरण रूपरेखाएँ: भूमि, यातायात गारंटी और परिचालन देनदारियों से संबंधित जोखिमों को निष्पक्ष रूप से वितरित करने के लिए मानकीकृत रियायत समझौते (राजमार्गों में HAM मॉडल की तरह) विकसित करने चाहिए।
- उदाहरण के लिए: वर्ष 2024-25 गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत, लॉजिस्टिक्स हब और निजी साइडिंग में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए संतुलित जोखिम खंड शामिल हैं।
- अनुकूलता के लिए मौजूदा बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण: निजी रोलिंग स्टॉक और प्रौद्योगिकियों को सहजता से समायोजित करने के लिए सिग्नलिंग, ट्रैक और स्टेशन के बुनियादी ढाँचे के उन्नयन में निवेश करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: भारतीय रेलवे सुरक्षित, आधुनिक निजी परिचालन को सक्षम करने के लिए प्रमुख मार्गों पर KAVACH स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को लागू कर रहा है।
- निगरानी और लोक शिकायत निवारण तंत्र: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, विशेष रूप से PPP संचालन के लिए रियलटाइम निगरानी डैशबोर्ड और शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।
- उदाहरण के लिए: रेल मदद पोर्टल (2024 में विस्तारित) जैसी पहल यात्रियों को सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की ट्रेनों के लिए सेवा संबंधी समस्याओं की सीधे रिपोर्ट करने की सुविधा प्रदान करती है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी भारतीय रेलवे को बदलने के लिए नहीं अपितु सहयोगात्मक आधुनिकीकरण करने के लिए आवश्यक है। विनियमन, श्रम प्रबंधन और परिचालन ढाँचे में उचित सुधारों के साथ, भारत अपने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण हेतु एक विश्व स्तरीय, कुशल और समावेशी रेलवे प्रणाली का निर्माण कर सकता है।