UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. चीन के हालिया रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष को "विनिर्माण क्षमता" के साथ-साथ "संरचनात्मक असंतुलन" का संकेत भी बताया जा रहा है। बदलते वैश्विक व्यापार क्रम और "चीन शॉक 2.0" (China Shock 2.0) की अवधारणा के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। इसका ग्लोबल साऊथ पर क्या प्रभाव पड़ता है? (15 अंक, 250 शब्द)

December 16, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • चीन का व्यापार अधिशेष और परिवर्तित वैश्विक व्यापार व्यवस्था
  • चीन शॉक 2.0 की अवधारणा
  • वैश्विक दक्षिण पर सकारात्मक प्रभाव
  • वैश्विक दक्षिण पर नकारात्मक प्रभाव

उत्तर

चीन का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष, जो वर्ष 2024 में 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया न केवल उसकी विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है, बल्कि कमजोर घरेलू माँग और निर्यात पर निर्भरता जैसे गहरे संरचनात्मक असंतुलन को भी उजागर करता है। बदलते वैश्विक व्यापार क्रम में, यह गतिशीलता “चीन शॉक 2.0” की चिंताओं को बढ़ावा देती है।

चीन का व्यापार अधिशेष और विकसित होती वैश्विक व्यापार व्यवस्था

  • निर्यात-प्रेरित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता: चीन का अधिशेष घरेलू खपत में मंदी के बीच अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता से उत्पन्न होता है।
    • उदाहरण: चीन में कमजोर घरेलू माँग कंपनियों को वैश्विक स्तर पर निर्यात करने के लिए मजबूर कर रही है।
  • विखंडित वैश्वीकरण: भू-राजनीतिक तनावों ने व्यापार को बहुपक्षवाद से मित्र देशों के साथ संबंधों और क्षेत्रीय गुटों की ओर मोड़ दिया है।
    • उदाहरण: चीन के निर्यात में वृद्धि के जवाब में अमेरिका-यूरोपीय संघ की औद्योगिक नीतियाँ।
  • सब्सिडी-प्रेरित प्रतिस्पर्द्धा: राज्य की सब्सिडी कीमतों को विकृत करती है, जिससे स्वच्छ प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धियों को नुकसान होता है।
  • व्यापार सुरक्षा पुनरुद्धार: देश तेजी से चीनी आयात के विरुद्ध एंटी-डंपिंग शुल्क और सुरक्षा उपाय लागू कर रहे हैं।
    • उदाहरण: भारत द्वारा चीनी वस्तुओं पर व्यापार-उपचार उपायों का बार-बार उपयोग करना।

चीन शॉक 2.0 की अवधारणा

  • उन्नत विनिर्माण पर केंद्रित: पहले के निम्न-स्तरीय निर्यातों के विपरीत, चीन अब इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरियाँ और सौर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों में प्रभुत्व स्थापित कर चुका है।
    • उदाहरण: ‘चीन शॉक 2.0’ श्रम-प्रधान नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी-प्रधान है।
  • वैश्विक मूल्य दवाब: अतिरिक्त आपूर्ति के कारण वैश्विक विनिर्माण बाजारों में अपस्फीतिक दबाव उत्पन्न होते हैं।
    • उदाहरण: इस्पात और सौर पैनलों के वैश्विक मूल्यों में गिरावट।
  • रोजगार विस्थापन का जोखिम: विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार हानि केवल पश्चिमी देशों तक सीमित न रहकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं तक विस्तार कर रही है।
  • नीतिगत प्रतिक्रिया: औद्योगिक देश कार्बन कर, शुल्क और स्थानीय सामग्री नियमों के माध्यम से प्रत्युत्तर दे रहे हैं।
    • उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका का मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम, जो चीन की आपूर्ति शृंखलाओं को लक्षित करता है।

‘ग्लोबल साउथ’ पर सकारात्मक प्रभाव

  • किफायती आयात: सस्ते चीनी उत्पाद अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए लागत कम करते हैं।
    • उदाहरण: अफ्रीका और दक्षिण एशिया में सौर ऊर्जा संयंत्रों को स्थापित करने की लागत कम है।
  • प्रौद्योगिकी प्रसार: इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरियाँ और दूरसंचार उपकरणों तक पहुँच औद्योगिक उन्नयन में सहायक है।
    • उदाहरण: चीनी आपूर्ति के माध्यम से ‘ग्लोबल साउथ’ में इलेक्ट्रिक व्हीकलों को तीव्रता से अपनाना।
  • दक्षिण–दक्षिण व्यापार का विस्तार: चीन का अधिशेष विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार को सुदृढ़ करता है।
    • उदाहरण: दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को चीनी निर्यात में वृद्धि।
  • अवसंरचना वित्तपोषण: निर्यात शक्ति चीन-समर्थित अवसंरचना परियोजनाओं को सहारा देती है।
    • उदाहरण: अधिशेष-प्रेरित पूँजी का ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल में निवेश।

‘ग्लोबल साउथ’ पर नकारात्मक प्रभाव

  • विऔद्योगिकीकरण का दबाव: स्थानीय उद्योगों को कम कीमत पर चीन से आयातित वस्तुओं से प्रतिस्पर्द्धा करने में कठिनाई हो रही है।
    • उदाहरण: वस्त्र और हल्के विनिर्माण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर जोखिम।
  • व्यापार घाटा: आयात पर आधारित व्यापार चालू खाते पर दबाव बढ़ाता है।
    • उदाहरण: भारत और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार घाटे में वृद्धि।
  • सीमित रोजगार सृजन: पूंजी-प्रधान चीनी आयात से स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र में कम रोजगार सृजित होते हैं।
  • नीतिगत स्वतंत्रता का क्षरण: निर्भरता औद्योगिक और व्यापारिक नीति निर्माण में स्वायत्तता को कम करती है।

निष्कर्ष

चीन का व्यापार अधिशेष शक्ति-प्रेरित असंतुलन का एक विरोधाभास प्रस्तुत करता है, जो ‘चीन शॉक 2.0’ के माध्यम से वैश्विक व्यापार को पुनर्गठित कर रहा है। ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए यह किफायत और प्रौद्योगिकी तक पहुँच के अवसर देता है, परंतु औद्योगिक क्षरण का जोखिम भी बढ़ाता है। इस जोखिम को सतत् विकास में बदलने के लिए रणनीतिक औद्योगिक नीति, विविधीकरण और संतुलित संरक्षण अनिवार्य हैं।

China’s recent record trade surplus is being described as much a sign of “structural imbalance” as it is of “manufacturing strength.” Analyze this statement in the context of the evolving global trade order and the concept of “China Shock 2.0.” How does this impact the Global South?  in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.