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Q. उत्तरी भारत में मानसून-पूर्व तूफानों की बढ़ती तीव्रता जलवायु परिवर्तनशीलता और आपदा तत्परता की बढ़ती चुनौती को दर्शाती है। ऐसी जानलेवा तूफानी घटनाओं के कारणों की जाँच कीजिए और ऐसी स्थानीयकृत चरम मौसमी घटनाओं के लिए भारत की संस्थागत तत्परता का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 18, 2026

GS Paper IIIDisaster Management

प्रश्न की मुख्य माँग

  • मानसून-पूर्व की जानलेवा तूफानी घटनाओं के कारण।
  • स्थानीय स्तर पर होने वाली अत्यधिक मौसमी घटनाओं के लिए भारत की संस्थागत तैयारी।
  • जलवायु-अनुकूल आपदा प्रबंधन ढाँचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता।

उत्तर

मानसून से पहले की आँधी-तूफान जैसी घटनाएँ कभी मौसमी आपदाएँ हुआ करती थीं, लेकिन जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के कारण ये लगातार जानलेवा आपदाओं में परिवर्तित हो रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में आए तूफान में 100 से अधिक लोगों की मौत ने बेहतर पूर्वानुमान और स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारियों की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया है।

मानसून-पूर्व जानलेवा तूफानी घटनाओं के कारण

  • अत्यधिक गर्मी: 45°C से अधिक के उच्च सतही तापमान ने तीव्र ऊर्ध्वगामी संवहन उत्पन्न किया, जिससे वातावरण अत्यधिक अस्थिर हो गया।
  • नमी का प्रवाह: तेज दक्षिण-पूर्वी पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आईं, जिससे तीव्र वर्षा, आकाशीय बिजली गिरने और धूल भरी आँधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण हुआ।
    • उदाहरण: तेज हवाओं के कारण नमी उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक भी पहुँच गई।
  • पश्चिमी विक्षोभ: पश्चिमी विक्षोभ से आने वाली ठंडी और शुष्क ऊपरी हवा गर्म नम सतही हवा से टकराई, जिससे गंभीर अस्थिरता उत्पन्न हुई।
  • तेज हवाओं की गति: 100-130 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं ने वृक्षों, दीवारों को गिरा दिया और खंभों को नुकसान पहुँचाया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ।
    • उदाहरण: कम-से-कम आठ जिलों में 100 किमी. प्रति घंटे से अधिक की हवा की गति दर्ज की गई।
  • जलवायु परिवर्तनशीलता: ऐसी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता बदलते मौसम पैटर्न और अनियमित मौसमी व्यवहार का संकेत देती है।

स्थानीयकृत चरम मौसमी घटनाओं के लिए भारत की संस्थागत तैयारी

  • प्रारंभिक पूर्वानुमान: तूफान से पूर्व IMD ने समय पर बुलेटिन और पूर्वानुमान जारी किए, जिससे प्रशासन को पहले से तैयारी करने में मदद मिली।
    • उदाहरण: पूर्वानुमानों में शुरू में गरज के साथ वर्षा और 60 किमी. प्रति घंटे तक की हवा की गति का अनुमान लगाया गया था, जिसे बाद में संशोधित करके 80-90 किमी. प्रति घंटे कर दिया गया।
  • सघन नेटवर्क: बेहतर निगरानी प्रणालियों से स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान और गंभीर मौसम स्थितियों की वास्तविक समय में निगरानी मजबूत होती है।
    • उदाहरण: उत्तर प्रदेश में लगभग 2,400 मौसम निगरानी केंद्र हैं।
  • पूर्वानुमान में कमियाँ: 100 किमी. प्रति घंटे से अधिक की अधिकतम हवा की गति का कम अनुमान लगाया गया, जिससे वास्तविक क्षति की तीव्रता के मुकाबले तैयारी कमजोर पड़ गई।
  • सीमित निकासी: चक्रवातों के विपरीत, गरज के साथ वर्षा छिटपुट और अचानक होती है, जिससे बड़े पैमाने पर निकासी मुश्किल और राहत कार्य अधिक जटिल हो जाते हैं।
  • स्थानीय प्रतिक्रिया: जिला प्रशासन और SDRF की प्रतिक्रिया असमान रही, खासकर गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बिजली की त्वरित बहाली में।

जलवायु-लचीले आपदा प्रबंधन ढाँचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता

  • बेहतर पूर्वानुमान: तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की सटीक चेतावनी के लिए अति-स्थानीय और अधिक सटीक अल्पकालिक पूर्वानुमान की आवश्यकता है।
  • अंतिम छोर तक चेतावनी: एसएमएस, सायरन और पंचायत नेटवर्क के माध्यम से किसानों, यात्रियों और ग्रामीणों तक चेतावनी शीघ्रता से पहुँचनी चाहिए।
  • मजबूत अवसंरचना: बिजली के खंभों, बिलबोर्डों और कमजोर आवास संरचनाओं को चरम मौसम के प्रति प्रतिरोधी बनाने के लिए उनका पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।
  • सामुदायिक जागरूकता: बिजली से सुरक्षा और तूफान आश्रय उपायों के बारे में जन जागरूकता से मृत्यु दर में काफी कमी आ सकती है।
    • उदाहरण: NDMA संवेदनशील जिलों के लिए नियमित रूप से बिजली और गरज के साथ तूफान से सुरक्षा संबंधी सलाह जारी करता है।
  • जलवायु योजना: स्थानीय चरम मौसम को जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं और शहरी नियोजन में एकीकृत किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: NDMA का हीट एक्शन प्लान और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गरज के साथ तूफान के जोखिम मानचित्रण को शामिल कर सकते हैं।

निष्कर्ष

आँधी-तूफान अब केवल छिटपुट मौसम संबंधी घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि जलवायु जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं। भारत को पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया से हटकर लचीलेपन आधारित शासन की ओर बढ़ना होगा, जहाँ सटीक चेतावनी, सुरक्षित बुनियादी ढाँचा और सामुदायिक तैयारी मिलकर जीवन और आजीविका की रक्षा करें।

The increasing intensity of pre-monsoon thunderstorms in northern India reflects the growing challenge of climate variability and disaster preparedness. Examine the causes of such deadly thunderstorm events and evaluate India’s institutional preparedness for such localized extreme weather events. in hindi

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