प्रश्न की मुख्य माँग
- बताइए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- समावेशी और जिम्मेदार एआई शासन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का वर्णन कीजिए।
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उत्तर
उत्तर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रति भारत का बढ़ता उत्साह आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवा और शासन में परिवर्तनकारी क्षमता का संकेत देता है। हालाँकि, यह डेटा पर निर्भरता, तकनीकी अंतराल और नैतिक जोखिमों सहित संरचनात्मक कमजोरियों को भी उजागर करता है, जिसके लिए तकनीकी संप्रभुता और जिम्मेदार एआई अपनाने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
एआई में तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने में चुनौतियाँ
- डेटा निर्भरता: भारत विदेशी एआई प्लेटफॉर्म और डेटासेट पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे स्वदेशी एआई नवाचार सीमित होता है।
- उदाहरण: भारतीय एआई स्टार्ट-अप अक्सर गूगल या माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सेवाओं का उपयोग करते हैं।
- कौशल की कमी: पर्याप्त एआई-प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा नवाचार को सीमित करती है।
- उदाहरण: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वर्ष 2027 तक 2.3 लाख एआई विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी।
- अवसंरचना की कमी: उच्च-प्रदर्शन संगणना और अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित पहुँच एआई विकास में बाधा उत्पन्न करती है।
- उदाहरण: केवल कुछ IITs और IISc में ही एआई अनुसंधान के लिए सुपरकंप्यूटिंग सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
- वित्तपोषण संबंधी बाधाएँ: स्टार्ट-अप और अनुसंधान संस्थान पर्याप्त सार्वजनिक और निजी निवेश के अभाव का सामना करते हैं।
- उदाहरण: वर्ष 2023 में भारतीय एआई स्टार्ट-अप्स को केवल 1.2 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ।
- विनियामक अनिश्चितता: स्पष्ट एआई नीतियों का अभाव जोखिम बढ़ाता है और अपनाने की प्रक्रिया को धीमा करता है।
- उदाहरण: व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक में देरी भारतीय डेटा के साथ एआई मॉडल प्रशिक्षण को प्रभावित करती है।
- साइबर सुरक्षा खतरे: एआई प्रणालियाँ हमलों के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे तकनीकी संप्रभुता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।
- उदाहरण: सरकारी संचार प्रणालियों पर एआई-आधारित डीपफेक हमलों की रिपोर्टें।
- वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: अमेरिका, चीन और यूरोप की एआई तकनीकों पर निर्भरता भारत की सामरिक स्वायत्तता को कम करती है।
- उदाहरण: चीन एआई पेटेंट और वैश्विक एआई पेटेंट अधिग्रहण में अग्रणी है।
समावेशी एवं उत्तरदायी एआई शासन के लिए उपाय
- राष्ट्रीय एआई रणनीति: विभिन्न क्षेत्रों में उत्तरदायी एवं नैतिक एआई उपयोग पर बल देने वाले ढाँचों को लागू किया जाए।
- उदाहरण: नीति आयोग की “सभी के लिए एआई” नीति स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा पर केंद्रित है।
- कौशल विकास: छात्रों, पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए एआई शिक्षा एवं प्रशिक्षण का विस्तार किया जाए।
- उदाहरण: PMGDISHA के अंतर्गत 120 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों में एआई पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया।
- डेटा संप्रभुता: एआई मॉडल प्रशिक्षण के लिए भारतीय डेटा भंडारण और स्थानीय डेटासेट को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय समर्थित “राष्ट्रीय एआई पोर्टल” भारतीय ओपन डेटासेट को बढ़ावा देता है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी: सरकार, स्टार्ट-अप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
- उदाहरण: टाटा और IIT दिल्ली के बीच एआई-आधारित स्वास्थ्य समाधान पर साझेदारी।
- नैतिक दिशा-निर्देश: एआई प्रणालियों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और गोपनीयता सुनिश्चित करने हेतु रूपरेखाएँ विकसित की जाएँ।
- उदाहरण: नीति आयोग द्वारा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के अनुरूप एआई नैतिक दिशा-निर्देश अपनाए गए।
- अवसंरचना निवेश: देशभर में एआई उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) और सुपरकंप्यूटिंग प्रयोगशालाएँ स्थापित की जाएँ।
- उदाहरण: सरकारी वित्तपोषण से IIT खड़गपुर में एआई शोध केंद्र (CAIR) की स्थापना।
- समावेशी पहुँच: सुनिश्चित किया जाए कि एआई समाधान ग्रामीण, वंचित और सेवा-विहीन समुदायों तक पहुँचे।
- उदाहरण: महाराष्ट्र के छोटे किसानों के लिए एआई-आधारित फसल रोग पहचान ऐप।
निष्कर्ष
यद्यपि एआई भारत को आर्थिक विकास और सुशासन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, तथापि तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने के लिए कौशल अंतराल, डेटा निर्भरता, अवसंरचनात्मक सीमाएँ तथा नैतिक चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। रणनीतिक निवेश, विनियामक स्पष्टता, सार्वजनिक-निजी समन्वय तथा समावेशी शासन यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं कि एआई भारत की विकास यात्रा में उत्तरदायी एवं न्यायसंगत योगदान दे सके।
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