प्रश्न की मुख्य माँग
- परीक्षण कीजिए कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान लहर अतीत की तकनीकी उथल-पुथल से किस प्रकार मौलिक रूप से भिन्न है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डालिए।
- वर्तमान AI युग में भारत में रोजगार और कार्यबल अनुकूलनशीलता की सुरक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर चर्चा कीजिए।
- आगे की राह लिखिये।
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उत्तर
स्टीम इंजन से लेकर डिजिटल कंप्यूटर तक, प्रौद्योगिकीय क्रांतियों ने निरंतर श्रम संरचनाओं को बाधित किया है। हालाँकि, वर्तमान में चल रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लहर, न केवल मैनुअल कार्यों बल्कि संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को पुनः परिभाषित करते हुए। पहले के उपकरणों के विपरीत, AI सिस्टम अभूतपूर्व चुनौतियों और अवसरों को प्रस्तुत करते हुए सीखते और अनुकूलित होते हैं। भारत में इसके तीव्र एकीकरण से कार्यबल क्षमताओं की रक्षा और विकास के लिए तत्काल नीति नवाचार की आवश्यकता है।
AI की वर्तमान लहर मौलिक रूप से कैसे भिन्न है
- स्वचालन से परे संज्ञानात्मक विस्थापन: AI न केवल शारीरिक श्रम को बल्कि निर्णयन और रचनात्मकता को भी स्वचालित करता है, जिससे व्हाइट कॉलर नौकरियों में बाधा उत्पन्न होती है।
- उदाहरण के लिए: ChatGPT जैसे उपकरण कंटेंट राइटिंग की जगह ले रहे हैं, जबकि AI लीगल असिस्टेंट लीगल टेक स्टार्टअप में पैरालीगल कार्यभार को कम करते हैं।
- न्यूनतम मानवीय इनपुट के साथ स्व-शिक्षण प्रणालियाँ: पिछली मशीनों के विपरीत, AI निरंतर डेटा लर्निंग करता है और बिना ह्यूमन कोडिंग के अपने कार्यों को बढ़ाता है।
- उदाहरण के लिए: Google के DeepMind AI ने 4 घंटे में खुद को शतरंज सिखाया और ग्रैंडमास्टर्स को हराया, जो पहले के प्रोग्राम किए गए शतरंज इंजनों के विपरीत था।
- अभूतपूर्व गति से बहु-क्षेत्रीय प्रवेश: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक साथ कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वित्त और विनिर्माण क्षेत्रों में समाकलित हो रही है।
- उदाहरण के लिए: तेलंगाना में eSagu जैसे स्मार्टफोन-आधारित ऐप्स के माध्यम से AI का उपयोग कीट पहचान के लिए किया जाता है।
- जॉब प्रोफाइल में परिवर्तन, न कि केवल विस्थापन: AI नौकरियों में बदलाव लाता है न कि केवल उन्हें प्रतिस्थापित करता है, बल्कि प्रॉम्प्ट इंजीनियर, AI एथिसिस्ट और डेटा क्यूरेटर जैसी नई भूमिकाओं का भी निर्माण करता है।
- उदाहरण के लिए: कई सारी रिपोर्ट् भारत के IT क्षेत्र में हाइब्रिड AI-मानव भूमिकाओं में वृद्धि का सुझाव देती हैं, विशेषकर मध्यम आकार की फर्मों में।
- डिजिटल डिवाइड में वृद्धि: औद्योगिक युग के विपरीत, AI डेटा, कौशल और बुनियादी ढाँचे में पहुँच अंतराल के कारण असमानता को बढ़ाता है।
- उदाहरण के लिए: हालाँकि अगस्त 2024 तक, 95.15% गाँवों में इंटरनेट की पहुँच है, लेकिन डिजिटल साक्षरता ग्रामीण श्रमिकों की AI-संचालित उपकरणों के साथ जुड़ने या कौशल बढ़ाने की क्षमता को सीमित करने में बहुत पीछे है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान चुनौतियाँ
- नियमित क्षेत्रों में नौकरी का ध्रुवीकरण और नुकसान: AI मध्यम स्तर की नियमित नौकरियों को खतरे में डालता है, जिससे उच्च और निम्न-कुशल कार्यों में नौकरी का ध्रुवीकरण बढ़ता है लेकिन मध्यम वर्ग खोखला हो जाता है।
- उदाहरण के लिए: भारत में BPOs में ग्राहक सेवा अधिकारियों की जगह AI चैटबॉट्स ने लेनी शुरू कर दी है जिससे हजारों नौकरियाँ प्रभावित हो रही हैं।
- AI सिस्टम में नैतिकता और पूर्वाग्रह संबंधी चिंताएँ: AI मॉडल प्रशिक्षण डेटा में मौजूद
सामाजिक पूर्वाग्रहों को दर्शा सकते हैं, जिससे पक्षपातपूर्ण निर्णय हो सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई हैं जिसमें AI सिस्टम को पूर्वाग्रह करते हुए पाया गया है।
- कौशल बेमेल और कम डिजिटल साक्षरता: भारत के बड़े कार्यबल में AI-प्रासंगिक कौशल का अभाव है, विशेषकर ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों में।
- उदाहरण के लिए: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लगभग 80% कार्यबल में डिजिटल दक्षताओं और विपणन योग्य कौशल का अभाव है।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा जोखिम: AI को बड़ी मात्रा में डेटा इनपुट की आवश्यकता होती है, जिससे निगरानी और डेटा के दुरुपयोग की चिंता बढ़ जाती है।
- उदाहरण के लिए: डिजीयात्रा के तहत भारतीय हवाई अड्डों पर इस्तेमाल किए जाने वाली फैसियल रिकॉग्निशन प्रणालियों में डेटा गोपनीयता को लेकर चिंताएँ जताई गई है।
- तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी में विनियामक अंतराल: नीतियाँ, AI के तीव्र विकास से मेल खाने में संघर्ष करती हैं, जिससे शासन निर्वात (Governance Vaccum) की स्थिति उत्पन्न होती है।
- उदाहरण के लिए: भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में AI-आधारित निर्णय लेने वाले उपकरणों के लिए विशिष्ट प्रावधानों का अभाव है।
रोजगार और अनुकूलनशीलता की सुरक्षा के लिए नीतिगत प्रतिक्रियाएँ
- AI-केंद्रित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम: ITI और ग्रामीण कौशल मिशन के माध्यम से AI, डेटा और क्लाउड में कौशल विकास भारत के कार्यबल को तैयार कर सकता है।
- उदाहरण के लिए: स्किल इंडिया और फ्यूचरस्किल्स प्राइम (NASSCOM द्वारा) जैसे कार्यक्रमों में AI उपकरण, कोडिंग और साइबर सुरक्षा में श्रमिकों को प्रशिक्षित किया जाता है।
- AI प्रौद्योगिकी को अपनाने में MSME के लिए सहायता: MSME के लिए सब्सिडी वाले AI उपकरण, उत्पादकता और रोजगार सृजन के बीच संतुलन बना सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: चैंपियंस पोर्टल, MSMEs को श्रमिकों को विस्थापित किए बिना सरकार द्वारा वित्तपोषित AI समाधानों तक पहुँचने में मदद करता है।
- रीस्किलिंग के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी: उद्योग-अकादमिक सहयोग, प्रासंगिक पाठ्यक्रम और उद्योग-संरेखित स्किल सेट प्रदान करने में सहायता करता है।
- उदाहरण के लिए: TCS का इग्नाइट प्रोग्राम केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी में AI कौशल में स्नातकों को प्रशिक्षित करता है।
- क्षेत्र-विशिष्ट AI रोडमैप: कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अनुकूलित AI योजनाएं, सेवा वितरण को बढ़ाते हुए नौकरियों को संरक्षित करती हैं।
- उदाहरण के लिए: कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (MoAFW) किसान ई-मित्र चैटबॉट, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली आदि जैसी पहलों के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की सहायता करने के लिए AI का उपयोग कर रहा है।
- विस्थापित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा: संक्रमण के दौरान सार्वभौमिक कौशल बीमा या बेरोजगारी सहायता एक सुरक्षा जाल का कार्य कर सकती है।
आगे की राह
- उत्तरदाई AI फ्रेमवर्क विकसित करना: पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए नैतिक उपयोग संबंधी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए AI एकीकरण को नियंत्रित करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: नीति आयोग का “रिस्पांसिबल AI फॉर ऑल“, सार्वजनिक AI प्रणालियों में मानवीय निगरानी की सिफारिश करता है।
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश: किफायती ब्रॉडबैंड और टेक उपकरणों का विस्तार ग्रामीण-शहरी AI विभाजन को कम कर सकता है।
- उदाहरण के लिए: भारतनेट योजना का लक्ष्य ग्रामीण टेक समावेशन के लिए 250,000 पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा प्रदान करना है।
- AI उपकरणों का स्थानीयकरण: पहुँच में सुधार के लिए स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय संदर्भों में AI विकसित करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: भाषिनी (डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग), व्यापक डिजिटल समावेशन के लिए बहुभाषी AI अनुप्रयोगों को बढ़ावा देता है।
- सतत पाठ्यक्रम नवाचार: टेक–रेडीनेस और उत्तरदाई उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्कूल से विश्वविद्यालय तक AI और नैतिकता को शामिल करना चाहिए।
- उदाहरण के लिए: NEP 2020 K-12 शिक्षा में कोडिंग, AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को प्रोत्साहित करता है।
- लेबर-AI समन्वय प्रकोष्ठ: स्थानीय श्रम परिवेश प्रणालियों पर AI के प्रभाव की निगरानी और प्रबंधन के लिए जिला-स्तरीय निकायों की स्थापना करनी चाहिए।
AI की परिवर्तनकारी क्षमता को समावेशी और नैतिक रणनीतियों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। पूर्व के व्यवधानों के विपरीत, यह संज्ञानात्मक श्रम और नैतिक ढाँचों को चुनौती देता है। भारत को नवाचार को संरक्षण के साथ मिलाते हुए शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और उत्तरदायी नीति के माध्यम से अपने कार्यबल को सुसज्जित करना चाहिए ताकि एक प्रत्यास्थ और भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था को आकार दिया जा सके।