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Q. आपराधिक न्याय वितरण में होने वाली देरी के लिए उत्तरदायी संस्थागत चुनौतियों की जाँच कीजिए, और समय पर तथा प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने हेतु उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

May 13, 2026

GS Paper IIIndian Polity

प्रश्न की मुख्य माँग

  • आपराधिक न्याय वितरण में विलंब के पीछे संस्थागत चुनौतियाँ।
  • समयबद्ध एवं प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के उपाय।

उत्तर

समयबद्ध न्याय विधि के शासन का मूल आधार है, किंतु भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली दीर्घकालिक विलंब की समस्या से जूझ रही है। बढ़ते लंबित मामलों की स्थिति केवल न्यायालयों पर भार को नहीं, बल्कि पुलिसिंग, मानव संसाधन, फोरेंसिक व्यवस्था एवं प्रशासनिक तंत्र की संस्थागत विफलताओं को भी दर्शाती है।

आपराधिक न्याय वितरण में विलंब के पीछे संस्थागत चुनौतियाँ

  • कर्मचारियों की कमी: लिपिकों, आशुलिपिकारों एवं सहायक कर्मचारियों की गंभीर कमी के कारण न्यायालयों का दैनिक कार्य संचालन एवं मामलों का निपटारा धीमा हो जाता है।
    • उदाहरण: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि अनेक युवा न्यायिक अधिकारी, गंभीर स्टाफ की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
  • पुलिस का अपर्याप्त सहयोग: समन एवं वारंट के निष्पादन तथा आरोपियों को प्रस्तुत करने में देरी से मुकदमों की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी हो जाती है।
  • फोरेंसिक जाँच में विलंब: फोरेंसिक रिपोर्टों में देरी जाँच प्रक्रिया की गति को कमजोर करती है तथा आपराधिक मामलों में सुनवाई को लंबित करती है।
  • न्यायाधीशों के रिक्त पद: अधीनस्थ न्यायालयों एवं उच्च न्यायालयों में बड़ी संख्या में रिक्त पद लंबित मामलों को बढ़ाते हैं तथा सुनवाई की आवृत्ति को कम करते हैं।
    • उदाहरण: न्याय विभाग के अनुसार, अनेक उच्च न्यायालय अभी भी न्यायिक रिक्तियों की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं।
  • प्रक्रियात्मक जटिलता: बार-बार स्थगन, लंबी दस्तावेजी प्रक्रिया एवं पुरानी मैनुअल प्रणाली मामलों के निपटारे में अधिक समय लेती है।
    • उदाहरण: “तारीख पर तारीख” की जनधारणा बार-बार होने वाले स्थगनों एवं प्रक्रियात्मक विलंब को दर्शाती है।

समयबद्ध एवं प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के उपाय

  • रिक्त पदों की पूर्ति: मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए न्यायाधीशों, लोक अभियोजकों एवं न्यायालयी कर्मचारियों की समयबद्ध नियुक्ति आवश्यक है।
    • उदाहरण: अखिल भारतीय न्यायिक अवसंरचना सुधार योजना के अंतर्गत त्वरित भर्ती लंबित मामलों को कम करने में सहायक हो सकती है।
  • पुलिस सुधार: न्यायालय संबंधी प्रक्रियाओं के लिए समर्पित पुलिस इकाइयाँ तथा न्यायपालिका के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: समन निष्पादन हेतु पृथक प्रकोष्ठ स्थगनों को कम कर अनुपालन में सुधार ला सकते हैं।
  • फोरेंसिक क्षमता का विस्तार: जाँच प्रक्रिया को गति देने हेतु फोरेंसिक प्रयोगशालाओं का विस्तार एवं साक्ष्य प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।
    • उदाहरण: आपराधिक कानून सुधारों के अंतर्गत क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना रिपोर्टों में होने वाली देरी को कम कर सकती है।
  • डिजिटल न्यायालय: ई-कोर्ट, आभासी  सुनवाई एवं डिजिटल केस ट्रैकिंग व्यवस्था दक्षता बढ़ाती है तथा प्रशासनिक विलंब को कम करती है।
    • उदाहरण: ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना न्यायालयों में ऑनलाइन केस स्थिति एवं आभासी कार्यवाही को समर्थन प्रदान करती है।
  • मामला प्रबंधन: जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु स्थगन संबंधी कठोर नियम एवं समयबद्ध सुनवाई निगरानी प्रणाली लागू की जानी चाहिए।

निष्कर्ष

आपराधिक न्याय में होने वाला विलंब जनविश्वास एवं संवैधानिक शासन व्यवस्था को कमजोर करता है। प्रभावी सुधार के लिए न्यायालयों, पुलिस एवं फोरेंसिक संस्थानों को समन्वित रूप से सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि न्याय केवल प्रदान ही न किया जाए, बल्कि उचित समय के भीतर प्रदान किया जाए।

Examine the institutional challenges responsible for delays in criminal justice delivery, and suggest measures to ensure timely and effective justice. in hindi

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