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प्रश्न की मुख्य माँग
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भारत के संविधान ने विभाजनकालीन असुरक्षाओं के संदर्भ में एक केंद्र-उन्मुख अर्द्ध-संघीय व्यवस्था स्थापित की। यद्यपि इस संरचना ने राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित की, परंतु वर्तमान राजनीतिक परिपक्वता, आर्थिक जटिलता तथा क्षेत्रीय विविधता के परिप्रेक्ष्य में पुनर्संतुलन की आवश्यकता स्पष्ट है। एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ में संघवाद को संविधान की मूल संरचना का अंग स्वीकार किया गया है, जो संतुलन की पुनर्स्थापना की माँग करता है।
पुनर्मूल्यांकन के लिए ‘प्रतिस्पर्धी’ के बजाय ‘सहकारी’ संघवाद की आवश्यकता है। अंतर-राज्य परिषद को पुनर्जीवित करना, उपकरों (cesses) को तर्कसंगत बनाना, राजकोषीय लचीलापन प्रदान करना, विधायी क्षेत्रों का सम्मान करना और समवर्ती विषयों में परामर्श को संस्थागत बनाना ही संघ को सही आकार दे सकता है। एक मजबूत भारत का आधार स्वायत्त और जवाबदेह राज्य होने चाहिए, जो ‘संरक्षण’ से नहीं बल्कि ‘विश्वास’ से बंधे हों।
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