Q. "सतत विमानन ईंधन (SAF) विमानन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के एक प्रमुख समाधान के रूप में उभरा है।" इस विकास को ध्यान में रखते हुए, विमानन उत्सर्जन को कम करने में SAF की क्षमता का परीक्षण कीजिए। इसके बड़े पैमाने पर अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और CORSIA तथा ReFuelEU जैसी वैश्विक पहलों के अनुरूप भारत के लिए आगे की राह सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)

July 11, 2025

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • विमानन उत्सर्जन को कम करने में SAF की क्षमता का परीक्षण कीजिए।
  • इसके बड़े पैमाने पर अपनाने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
  • CORSIA और ReFuelEU जैसी वैश्विक पहलों के साथ भारत के लिए आगे की राह लिखिए।

उत्तर

विमानन क्षेत्र वैश्विक वार्षिक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 2.5% और कुल मानवजनित वैश्विक तापमान वृद्धि का लगभग 4% योगदान देता है। जैसे-जैसे अन्य क्षेत्र हरित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, सतत् विमानन ईंधन (SAF) एक प्रमुख डीकार्बोनाइजेशन उपकरण के रूप में उभरा है, जिसमें विमानन-संबंधी उत्सर्जन को 80% तक कम करने की क्षमता है।

विमानन उत्सर्जन को कम करने में SAF की क्षमता

  • उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी: SAF पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में आवधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है। 
    • उदाहरण: SAF एक ड्रॉप-इन ईंधन है, जो मौजूदा विमान इंजनों और बुनियादी ढाँचे के साथ संगत है, जिससे विमान में कोई नया बदलाव किए बिना तत्काल उत्सर्जन लाभ मिलता है।
  • CO₂ के अलावा अन्य ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कमी: SAF कम NOₓ, कालिख और एरोसोल उत्सर्जित करता है, जिससे कॉन्ट्रेल निर्माण और अन्य तापन प्रभाव कम होते हैं। 
    • उदाहरण: कॉन्ट्रेल विमानन के तापन प्रभाव में लगभग 60% योगदान करते हैं, जिसे SAF काफी सीमा तक कम कर सकता है।
  • फीडस्टॉक विविधता और स्थायित्व: UCO, MSW, शैवाल और कृषि अपशिष्ट से SAF का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बढ़ावा मिलता है। 
    • उदाहरण के लिए: भारत में गन्ने की खोई और चावल की भूसी जैसे फीडस्टॉक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे घरेलू स्रोतों से उत्पादन के लाभ मिलते हैं।
  • ऊर्जा सुरक्षा और आयात विविधीकरण: SAF अस्थिर कच्चे तेल बाजारों पर विमानन की निर्भरता को कम करता है।
  • रोजगार सृजन और ग्रामीण आय सहायता: SAF उत्पादन हरित रोजगार सृजित करता है और कृषि अपशिष्ट का मूल्यवर्द्धन करता है। 
    • उदाहरण के लिए, SAF विनिर्माण संयंत्र रोजगार सृजन कर सकते हैं और फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से ग्रामीण आय में सुधार कर सकते हैं।
  • वैश्विक बाजार अवसर: भारत वर्ष 2050 तक संभावित रूप से 40 मिलियन टन SAF का उत्पादन कर सकता है, जिससे वह एक प्रमुख निर्यातक बन जाएगा। 
    • उदाहरण: प्रचुर मात्रा में बायोमास के साथ, भारत ReFuelEU सम्मिश्रण अधिदेशों के तहत, EU जैसे बाजारों में SAF की माँग का लाभ उठा सकता है।

बड़े पैमाने पर SAF को अपनाने में प्रमुख चुनौतियाँ

  • उच्च उत्पादन लागत: SAF की लागत पारंपरिक जेट ईंधन से 2-3 गुना ज्यादा होती है, जिससे एयरलाइनों के लिए इसे अपनाना महंगा हो जाता है। 
    • उदाहरण: सब्सिडी या नीतिगत समर्थन के बिना, एयरलाइनें आर्थिक बोझ यात्रियों पर डाल सकती हैं, जिससे वहनीयता कम हो सकती है।
  • अविकसित बुनियादी ढाँचा: भारत में SAF उत्पादन, भंडारण, सम्मिश्रण और परिवहन प्रणालियाँ अभी भी प्रारंभिक अवस्था में हैं। 
    • उदाहरण के लिए: SAF को ATF से अलग नई आपूर्ति शृंखलाओं की आवश्यकता है, विशेषकर ग्रामीण बायोमास प्रसंस्करण के लिए।
  • फीडस्टॉक की उपलब्धता और स्थिरता: मौसमी उपलब्धता और अति-दोहन के पर्यावरणीय जोखिम SAF की व्यवहार्यता के लिए खतरा हैं। 
    • उदाहरण: खाद्य आधारित फीडस्टॉक्स पर अत्यधिक निर्भरता खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता को प्रभावित कर सकती है।
  • एकसमान नीतिगत समर्थन का अभाव: भारत की SAF नीति विकसित हो रही है, लेकिन इसमें EU जैसे मजबूत जनादेश का अभाव है। 
    • उदाहरण के लिए: ReFuelEU के वर्ष 2050 तक 70% SAF जनादेश के विपरीत, भारत वर्तमान में वर्ष 2030 तक केवल 5% का लक्ष्य रखता है।
  • उद्योग जगत में जागरूकता और निवेश की कमी: एयरलाइंस और तेल कंपनियाँ SAF अनुसंधान और सम्मिश्रण अवसंरचना में निवेश करने में रूचि नहीं ले रही हैं। 
    • उदाहरण के लिए: गारंटीकृत बाजार माँग या वित्तीय प्रोत्साहनों के अभाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित बनी हुई है।
  • जीवनचक्र पर्यावरणीय चिंताएँ: असंतुलित फीडस्टॉक या अनुचित प्रसंस्करण SAF के पर्यावरणीय लाभों को कम कर सकते हैं।
    • उदाहरण: फीडस्टॉक के लिए वनों की कटाई या एकल-फसल वाली कृषि उत्सर्जन बचत को कम कर सकती है।

वैश्विक पहलों के साथ भारत के लिए आगे की राह

  • प्रगतिशील सम्मिश्रण अधिदेश निर्धारित करना: राष्ट्रीय परिस्थितियों का सम्मान करते हुए CORSIA और ReFuelEU के अनुरूप स्पष्ट सम्मिश्रण लक्ष्यों को लागू करना चाहिए।
    • उदाहरण: भारत का वर्ष 2030 तक 5% SAF सम्मिश्रण का लक्ष्य, घरेलू बायोमास का उपयोग करके वर्ष 2040 तक 15% तक बढ़ाया जा सकता है।
  • निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना: SAF अपनाने वाले उत्पादकों और एयरलाइनों को कर में छूट, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और कम ब्याज दर वाले ऋण प्रदान करने चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: विश्व आर्थिक मंच के “क्लीन स्काइज फॉर टुमॉरो” वित्तपोषण ढाँचे जैसे मॉडलों का उपयोग करना चाहिए।
  • फीडस्टॉक स्थिरता मानकों को अपनाना: सुनिश्चित करना चाहिए कि फीडस्टॉक की आपूर्ति से खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता या जल उपयोग पर कोई प्रभाव न पड़े। 
    • उदाहरण के लिए: ICAO के स्थिरता मानदंडों के अनुरूप राष्ट्रीय SAF प्रमाणन स्थापित करना चाहिए।
  • अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को बढ़ावा देना: PtL ईंधन, RFNBO और अपशिष्ट-से-SAF विधियों के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना चाहिए‌।
    • उदाहरण के लिए: SAF नवाचार प्रयोगशालाएँ और सार्वजनिक-निजी अनुसंधान एवं विकास प्लेटफॉर्म लागत में कमी और दक्षता में तेजी ला सकते हैं।
  • वैश्विक जैव ईंधन गठबंधनों का लाभ उठाना: अंतरराष्ट्रीय सहयोग के समन्वय के लिए G-20 भारत 2023 में शुरू किए गए वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) का उपयोग करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: GBA भारत के SAF रोडमैप को यूरोप और उत्तरी अमेरिका की सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने में मदद कर सकता है।
  • जन जागरूकता और एयरलाइन की तैयारी बढ़ाना: SAF के लाभों को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अभियान आयोजित करने चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: एयरलाइंस SAF के उपयोग के साथ “ग्रीन फ्लाइट्स” को बढ़ावा दे सकती हैं व कार्बन-न्यूट्रल यात्रा विकल्प प्रदान कर सकती हैं।

निष्कर्ष

SAF विमानन को कार्बन-मुक्त करने के लिए एक निकट-अवधि, मापनीय समाधान प्रदान करता है। भारत के लिए, यह न केवल एक पर्यावरणीय अनिवार्यता प्रस्तुत करता है, बल्कि स्थायी विमानन में वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरने का एक आर्थिक अवसर भी प्रस्तुत करता है—बशर्ते देश एक समावेशी नीति अपनाए, बुनियादी ढाँचे को मजबूत करे, और अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को CORSIA तथा ReFuelEU जैसे वैश्विक ढाँचों के साथ संरेखित करने का प्रयत्न करे

“Sustainable Aviation Fuel (SAF) has emerged as a key solution for decarbonising the aviation sector”. Considering this development, examine the potential of SAF in reducing aviation emissions, Discuss the key challenges in its large-scale adoption, and suggest a way forward for India in alignment with global initiatives such as CORSIA and ReFuelEU. in hindi

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