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Q. भारत की न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों का परीक्षण कीजिए और न्यायिक देरी की समस्या को दूर करने के लिए व्यापक सुधारों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए कि ये सुधार भारत में व्यापार करने की सुगमता और जीवन की सुगमता में सुधार लाने में कैसे योगदान दे सकते हैं। (15 अंक, 250 शब्द)

August 6, 2024

GS Paper II
प्रश्न की मुख्य मांग

  • भारत की न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों का परीक्षण कीजिए।
  • न्यायिक विलंब की समस्या के समाधान के लिए व्यापक सुधार सुझाएँ।
  • चर्चा कीजिए कि ये सुधार भारत में व्यापार करने में सुगमता और जीवन को सुगम बनाने में कैसे योगदान दे सकते हैं।

 

उत्तर:

भारत की न्याय वितरण प्रणाली, लंबित मामलों की गंभीर समस्या से जूझ रही है , जो समय पर न्यायिक परिणाम सुनिश्चित करने के संबंध में आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है। वर्तमान में विभिन्न न्यायालयों में लगभग 50 लाख वाद लंबित हैं, जिनमें से 90% वाद जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में हैं । यह अड़चन न केवल कानूनी व्यवस्था पर दबाव डालती है, बल्कि देश के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को भी कमजोर करती है।

भारत की न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावित करने वाले मुद्दे:

  • लंबित वादों की उच्च संख्या: जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित वादों की विशाल संख्या, विलंबित न्याय की गहरी जड़ वाली समस्या को दर्शाती है। उदाहरण के लिए: कोविड-19 के दौरान भारत के सबसे बड़े न्यायालयों में से एक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित वादों की संख्या 1 मिलियन से अधिक हो गई थी ।
  • अकुशल न्यायिक नियुक्तियाँ: न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान में प्रयुक्त कॉलेजियम प्रणाली की, पारदर्शिता और समावेशिता की कमी के कारण आलोचना की जाती रही है । उदाहरण के लिए: आलोचकों का तर्क है कि यह प्रणाली न्यायिक विविधता को सीमित करती है , जैसा कि एक ही पृष्ठभूमि से बार-बार की जाने वाली नियुक्तियों में देखा जाता है।
  • प्रमुख वादी के रूप में सरकार: केन्द्र और राज्य दोनों सरकारें अक्सर मुकदमेबाजी में शामिल रहती हैं, जिससे न्यायिक तंत्र में काफी रुकावट आती है
  • अपर्याप्त बुनियादी ढांचा: कई अदालतें अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और स्टाफ की कमी की समस्या का सामना कर रही हैं  जो उनकी परिचालन दक्षता और अधिक वादों का निपटान करने की क्षमता को बाधित करती है।
    उदाहरण के लिए: भारत में ग्रामीण अदालतों में अक्सर बुनियादी डिजिटल संसाधनों और पर्याप्त स्टाफिंग की भी कमी होती है ।
  • पुरानी प्रथाएँ: औपनिवेशिक युग की प्रथाओं का जारी रहना , जैसे कि अदालतों में लंबी छुट्टियाँ , देरी को बढ़ाती हैं और केस की सुनवाई के लिए उपलब्ध कार्य दिवसों को कम करती हैं। उदाहरण के लिए: भारतीय अदालतें अभी भी लंबी गर्मी की छुट्टी मनाती हैं , जिससे कार्यवाही में कई हफ़्तों की देरी होती है।
  • तकनीकी एकीकरण का अभाव: कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ प्रगति के बावजूद, केस प्रबंधन और सुनवाई को सुव्यवस्थित करने में प्रौद्योगिकी की पूरी क्षमता का बड़े पैमाने पर दोहन नहीं किया गया है
    उदाहरण के लिए: भारतीय न्यायालयों के केवल कुछ हिस्से में ही पूरी तरह कार्यात्मक डिजिटल फाइलिंग सिस्टम है

न्यायिक विलंब की समस्या के समाधान के लिए किये जा सकने वाले सुधार:

  • न्यायिक नियुक्तियों में सुधार: पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ एनजेएसी को फिर से लागू करने से अधिक पारदर्शी और व्यापक आधार वाली न्यायिक नियुक्तियाँ सुनिश्चित हो सकती हैं।
    उदाहरण के लिए: नई प्रणाली की चयन प्रक्रिया में अधिक विविध हितधारकों को शामिल किया जा सकता है , जिससे वैधता और विविधता बढ़ सकती है
  • राष्ट्रीय मुकदमा नीति: अनावश्यक लंबित वादों की संख्या को कम करने के लिए एक मजबूत नीति का कार्यान्वयन । उदाहरण के लिए: ब्रिटेन का ‘लिटिगेशन गेटवे’ सरकारी विभागों द्वारा दायर किए गए आधारहीन दावों की जांच करता है।
  • उन्नत बुनियादी ढांचा: न्यायालय के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और कार्यबल में वृद्धि करने के लिए निवेश , जिसमें न्यायालयों में
    शिफ्ट सिस्टम की शुरूआत भी शामिल है , मामलों की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है । उदाहरण के लिए: जापान ,सामान्य मामलों के लिए रात्रि अदालती सत्र का उपयोग करता है , जिससे दिन के समय के मामलों का बोझ काफी कम हो जाता है।
  • वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR): न्यायालय प्रणाली के बाहर विवादों को निपटाने के लिए मध्यस्थता, पंचनिर्णय और लोक अदालतों जैसे तंत्रों को बढ़ावा देने से औपचारिक न्यायालयों पर भार कम हो सकता है।
    उदाहरण के लिए: इटली में अधिकांश दीवानी मामलों के लिए अनिवार्य मध्यस्थता कदम ने न्यायालय के बोझ को कम कर दिया है।
  • तकनीकी अंगीकरण: वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम के उपयोग का विस्तार न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक कुशल बना सकता है।
    उदाहरण के लिए: ब्राजील की वर्चुअल कोर्ट प्रणाली मामलों की दूरस्थ प्रक्रिया और समाधान की अनुमति देती है, जिससे दक्षता बढ़ती है।
  • न्यायिक समय प्रबंधन: छुट्टियों की अवधि कम करने और स्थगन एवं केस की समयसीमा के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू करने से देरी में काफी कमी आ सकती है।
    उदाहरण के लिए: सिंगापुर की सख्त अदालत प्रबंधन प्रथाओं ने अनावश्यक स्थगन को लगभग समाप्त कर दिया है, जिससे वहां मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया काफी तीव्र हो गई है।

भारत में व्यापार करने में सुगमता और जीवन की सुगमता लाने में इन सुधारों का योगदान:

  • वाणिज्यिक विवादों का तेज़ समाधान: इन विवादों से जुड़े समय और लागत को कम करके एक अधिक कुशल कानूनी माहौल बनाया जा सकता है। इससे निवेश और उद्यमशीलता गतिविधि को बढ़ावा मिलता है , क्योंकि व्यवसाय कानूनी प्रणाली में अधिक विश्वास के साथ काम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए: सिंगापुर में तीव्र विवाद समाधान ने विश्वसनीय कानूनी माहौल की तलाश करने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों को आकर्षित किया है
  • जनता के विश्वास में वृद्धि: समय पर न्याय मिलने से कानूनी व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ता है, जो सामाजिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक शासन को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है
    उदाहरण के लिए: डेनमार्क में , कुशल न्यायपालिका में उच्च विश्वास के परिणामस्वरूप , भ्रष्टाचार की घटना बहुत कम होती है
  • आर्थिक विकास: न्यायिक देरी को कम करने से विवादों का तेजी से समाधान हो सकता है , जो अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायी है क्योंकि इससे कानूनी अनिश्चिततायें कम हो जाती है
    उदाहरण के लिए: संयुक्त राज्य अमेरिका में त्वरित कानूनी समाधान के परिणामस्वरूप लंबे समय से चले आ रहे विवादों का आर्थिक बोझ कम होता है
  • जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि: त्वरित कानूनी समाधान का अर्थ है कि कानूनी लड़ाई में व्यक्तियों के समय और संसाधन की बचत, जो प्रत्यक्ष तौर पर जीवन की सुगमता को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए: जर्मनी में , पारिवारिक न्यायालयों में त्वरित प्रक्रियाओं ने परिवारों पर भावनात्मक और वित्तीय तनाव को कम कर दिया है ।
  • निष्पक्ष व्यवहार को बढ़ावा देना: बेहतर न्यायिक प्रक्रियाएं भ्रष्ट व्यवहार को रोक सकती हैं और निष्पक्ष व्यापार एवं शासन को बढ़ावा दे सकती हैं
    उदाहरण के लिए: यह सुनिश्चित करके कि न्यायिक प्रक्रियाएँ सभी के लिए सुलभ हों , फ़िनलैंड ने एक ऐसी प्रणाली बनाई है जहाँ जवाबदेही सर्वोपरि है। नतीजतन, कानूनी प्रणाली और सरकारी संस्थानों में जनता का विश्वास बढ़ा है
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: एक कुशल न्यायपालिका एक परिपक्व , कार्यात्मक लोकतंत्र की पहचान है , जो वैश्विक मंच पर भारत की छवि को मजबूत करता है।
    उदाहरण के लिए: न्यूजीलैंड की कुशल कानूनी प्रणाली निवेश के लिए एक स्थिर और आकर्षक देश के रूप में इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बढ़ाती है ।

भारत की न्याय वितरण प्रणाली में सुधार करना न केवल कानूनी आवश्यकता है अपितु सामाजिक-आर्थिक अनिवार्यता भी है। यदि प्रस्तावित सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे भारतीय न्यायपालिका के परिदृश्य को बदलने की क्षमता है, जिससे न्याय सुलभ और समय पर हो सकेगा। यह परिवर्तन न केवल भारत की वैश्विक  छवि को बेहतर बनाएगा, बल्कि जीवन की समग्र गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा , जिससे राष्ट्र अधिक न्यायपूर्ण और समतापूर्ण समाज की ओर अग्रसर होगा

 

Examine the critical issues plaguing India’s justice delivery system and suggest comprehensive reforms to address the problem of judicial delays. Discuss how these reforms can contribute to improving the ease of doing business and ease of living in India.  in hindi

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