Q. भारत में राजमार्गों को अब केवल परिवहन अवसंरचना के रूप में नहीं, बल्कि पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्यों के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रस्तावित राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 21, 2026

GS Paper IIIEnvironment & Ecology

प्रश्न की मुख्य माँग

  • राजमार्गों की पारिस्थितिकी और सामाजिक-आर्थिक क्षमताएँ।
  • राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल के लाभ।
  • राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियाँ। 

उत्तर

परिचय

भारत का निरंतर विस्तृत होता राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क, अब केवल सुगम परिवहन का माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी संतुलन, कृषि आजीविका, पर्यावरण प्रदूषण के नियंत्रण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया आकार देने का प्रमुख कारक बन चुका है। प्रस्तावित ‘राजमार्ग फार्म वानिकी’ (HFF) मॉडल अवसंरचनात्मक विकास को पर्यावरणीय संधारणीयता और सामाजिक-आर्थिक सुदृढ़ता के साथ समाहित करने के इसी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। 

राजमार्गों की पारिस्थितिकी और सामाजिक-आर्थिक क्षमताएँ

  • प्रदूषण क्षेत्र: राजमार्ग ऐसे प्रदूषण संचय क्षेत्रों (Pollution accumulation belts) का निर्माण करते हैं, जो निकटवर्ती कृषि भूमि और मानव बस्तियों को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
  • आर्थिक गलियारे: राजमार्ग लॉजिस्टिक्स (परिवहन व आपूर्ति), व्यापार, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी  को बढ़ावा देते हैं।

    • उदाहरण: भारतमाला परियोजना और ‘विजन 2047’ का उद्देश्य एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और आर्थिक विकास को गति देना है।
  • पारिस्थितिकी अंतर्संबंध: सड़क किनारे गलियारों के रूप में विकसित हरित पट्टियाँ (Green Belts) जैव विविधता संरक्षण हेतु ‘पारिस्थितिकी सेतु‘ के रूप में कार्य कर सकती हैं। 
    • उदाहरण: सड़क किनारे सुनियोजित वृक्षारोपण के माध्यम से परागणकों (Pollinators) व पक्षियों के लिए सुरक्षित पर्यावास (Habitat) सुनिश्चित करना तथा स्थानीय सूक्ष्म-जलवायु (Microclimate) का नियमन करना।
  • ग्रामीण आजीविका: राजमार्गों के निकटवर्ती भू-भाग, किसानों के लिए विविधीकृत आय सृजित कर सकते हैं।
    • उदाहरण: राजमार्गों के समीप कृषि-वानिकी  आधारित इमारती लकड़ी, बाजार-संबद्ध वृक्ष फसलों (ट्री क्रॉप्स) के माध्यम से कृषि आय में वृद्धि कर  सकती है।
  • कार्बन सिंक: राजमार्गों के समीपवर्ती हरित गलियारे’कार्बन सिंक’ के रूप में कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) को बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के शमन (Climate Mitigation) में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। 
    • उदाहरण: राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) के अंतर्गत सृजित जैवभार (Biomass) किसानों को उभरते हुए कार्बन क्रेडिट बाजार (Carbon Markets) से एकीकृत कर उनके लिए अतिरिक्त आय का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। 

राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल के लाभ 

  • इमारती लकड़ी की आपूर्ति : राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF), घरेलू इमारती लकड़ी की आपूर्ति को सुदृढ़ कर सकता है और इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम कर सकता है।
    • उदाहरण: भारत प्रतिवर्ष लगभग ₹70,000 करोड़ मूल्य की लकड़ी और लकड़ी के उत्पादों का आयात करता है।
  • कृषक आय: व्यावसायिक मूल्य वाले वृक्ष, किसानों को अधिक और स्थिर लाभ प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं।
    • उदाहरण: पोपलर (Poplar), सागौन  और मालाबार नीम जैसी वृक्ष प्रजातियों की काष्ठ-आधारित उद्योगों (Wood-based Industries) में पूर्व से ही व्यापक माँग बनी हुई है।
  • बाजार संबद्धता: यह मॉडल व्यावसायिक लाभप्रदता पर आधारित है, जिसे सुनिश्चित औद्योगिक माँग और पूर्व-निर्धारित क्रय प्रतिबद्धता (Buyback support)  के माध्यम से वित्तीय स्थिरता प्रदान की गई है। 
  • पारिस्थितिकी बफर: ट्री क्रॉप बफर जोन (Tree Crop Buffer Zones) राजमार्गों के समीप प्रदूषण के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
    • उदाहरण: राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल राजमार्गों के किनारे प्रदूषण के प्रति संवेदनशील खाद्य फसलों के स्थान पर एक सुरक्षात्मक बफर के रूप में ‘वृक्ष-आधारित प्रणालियों’ को प्रतिस्थापित करने की अनुशंसा करता है। 
  • नीतिगत समर्थन: हाल के सुधारों ने अंतर-राज्यीय इमारती लकड़ी के परिवहन और बाजार तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार किया है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय पारगमन पास प्रणाली (National Transit Pass System – NTPS) ने निर्बाध लकड़ी परिवहन के लिए “वन नेशन, वन पास (One Nation, One Pass) तंत्र की शुरुआत की है।

राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ 

  • एकल-कृषि (मोनोकल्चर) का जोखिम: बड़े पैमाने पर केवल एक ही प्रजाति का वृक्षारोपण करने से पारिस्थितिकी असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • प्रजातियों का चयन: अनुपयुक्त या आक्रामक (Invasive) विदेशी प्रजातियों का चयन भूजल स्तर और स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुँचा सकता है।
    • उदाहरण: इसके समाधान के रूप में, जल-भृतों (Aquifers) के अनुकूल, क्षेत्र-विशिष्ट तथा स्थानीय स्तर पर अनुकूलित ‘मिश्रित बहु-प्रजाति वानिकी प्रणालियों’ को अपनाना एक आदर्श विकल्प है। 
  • कृषकों की आशंकाएँ: सुनिश्चित लाभप्रदता के बिना किसान पारंपरिक फसलों से इस मॉडल की ओर स्थानांतरित होने में संकोच या विरोध कर सकते हैं।
  • संस्थागत अंतराल: इस मॉडल के सफल कार्यान्वयन के लिए वानिकी, राजमार्ग (NHAI) और कृषि विभागों/एजेंसियों के बीच कुशल समन्वय (Coordination) की आवश्यकता है।
  • खाद्य सुरक्षा: कृषि भूमि का व्यापक स्तर पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण (Commercial Forestry) में परिवर्तन, देश के समग्र खाद्य उत्पादन को संकुचित कर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है। 
    • उदाहरण: इसके समाधान के रूप में प्रस्तावित ‘स्तरीय क्षेत्र ढाँचा‘ (Tiered Zone Framework) खाद्य सुरक्षा और आजीविका के साथ पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन को संतुलित करता है।

निष्कर्ष

राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल अवसंरचना विकास के पारंपरिक दृष्टिकोण के स्थान पर, राजमार्गों को गतिशीलता, पारिस्थितिकी और ग्रामीण विकास के संगम के रूप में स्थापित करता है। निष्कर्षतः, यदि वैज्ञानिक नियोजन, सुनिश्चित विपणन अवसंरचना और सुदृढ़ पारिस्थितिकी सुरक्षा उपायों को एकीकृत किया जाए, तो राजमार्ग फार्म वानिकी (HFF) मॉडल भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों ‘हरित और समावेशी आर्थिक गलियारों’ के रूप में रूपांतरित करने का एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत करता है। 

Highways in India must no longer be viewed merely as transport infrastructure, but as ecological and socio-economic landscapes. Examine this statement in the context of the proposed Highway Farm Forestry (HFF) model. in hindi

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