प्रश्न की मुख्य माँग
- बताइए कि क्यों बाहरी शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक कमजोरियाँ पैदा करती है।
- इन रणनीतिक कमजोरियों को कम करने के उपाय सुझाइए।
|
उत्तर
आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकीय क्षमता, डिजिटल प्रणालियाँ और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएँ भी शामिल हैं। ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल से जुड़े हालिया संघर्ष यह महत्त्वपूर्ण सबक देता है कि बाहरी सुरक्षा गारंटी या प्रौद्योगिकी प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता देशों के लिए गंभीर रणनीतिक संवेदनशीलता उत्पन्न कर सकती है, विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए।
क्यों बाहरी शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक कमजोरियाँ उत्पन्न करती है
- अविश्वसनीय बाहरी सुरक्षा गारंटी: सुरक्षा गठबंधन या बाहरी सुरक्षा आश्वासन संकट की स्थिति में विफल हो सकते हैं, जिससे देश रणनीतिक रूप से असुरक्षित हो सकते हैं।
- उदाहरण: क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर खाड़ी देशों ने स्वयं को असुरक्षित महसूस किया।
- महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता संघर्ष या भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सैन्य तैयारी को प्रभावित कर सकती है।
- उदाहरण: SIPRI की रिपोर्टों के अनुसार, भारत ऐतिहासिक रूप से रक्षा आयात के लिए विदेशी देशों पर अत्यधिक निर्भर रहा है।
- रणनीतिक दबाव और भू-राजनीतिक प्रभाव: महत्त्वपूर्ण तकनीकों को नियंत्रित करने वाले देश निर्यात नियंत्रण या प्रतिबंधों का उपयोग भू-राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में कर सकते हैं।
- उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी पर लगाए गए प्रतिबंध।
- साइबर सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना जोखिम: विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म और अवसंरचना पर निर्भरता से साइबर कमजोरियाँ, डेटा में हेर-फेर या निगरानी के जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
- ऊर्जा और रणनीतिक अवसंरचना की संवेदनशीलता: ऊर्जा मार्गों जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता संघर्ष के समय आर्थिक और सुरक्षा स्थिरता को खतरे में डाल सकती है।
- उदाहरण: ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका।
रणनीतिक कमजोरियों को कम करने के उपाय
- घरेलू रक्षा निर्माण को सुदृढ़ करना: स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने से विदेशी हथियार आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है और रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
- उदाहरण: DRDO की पहलें तथा “रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत” नीति।
- महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमताओं का विकास तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करता है।
- उदाहरण: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता विकसित करना है।
- डिजिटल और डेटा अवसंरचना की सुरक्षा: स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म और मजबूत साइबर क्षमताओं का विकास राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता की रक्षा करता है।
- उदाहरण: UPI जैसे सुरक्षित डिजिचल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार।
- रणनीतिक साझेदारियों का विविधीकरण: एक ही देश या समूह पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए बहु-आयामी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ विकसित करना आवश्यक है।
- रणनीतिक आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना: महत्त्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के लिए लचीली और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित करना संकट के समय निरंतरता सुनिश्चित करता है।
- उदाहरण: चतुर्भुजीय सुरक्षा संवाद (QUAD) के आपूर्ति शृंखला सहयोग प्रयासों जैसी पहलों में भारत की भागीदारी।
निष्कर्ष
वर्तमान बदलते सुरक्षा परिदृश्य से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को बाहरी शक्तियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। भारत के लिए रणनीतिक निर्भरता को कम करने हेतु स्वदेशी प्रौद्योगिकी, रक्षा उत्पादन, सुरक्षित डिजिटल प्रणालियों तथा मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं में निरंतर निवेश आवश्यक है। ऐसे प्रयास रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करेंगे और दीर्घकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिरता एवं लचीलापन सुनिश्चित करेंगे।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Latest Comments