Q. भारत में मौजूदा GST व्यवस्था को विपरीत शुल्क संरचना, अनुपालन भार और लगातार विवादों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस संदर्भ में, GST 2.0 इन चुनौतियों से कैसे पार पाने और भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत करने का प्रयास करता है? इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उद्योग की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

August 19, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • मौजूदा GST व्यवस्था के समक्ष आने वाली चुनौतियों का उल्लेख कीजिये।
  • GST 2.0 इन चुनौतियों पर कैसे काबू पाएगा?
  • GST 2.0 भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को कैसे सुदृढ़ करेगा।
  • GST 2.0 सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उद्योग की भूमिका का उल्लेख कीजिये।

उत्तर

1 जुलाई 2017 को शुरू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत कर दिया और अनेक करों को प्रतिस्थापित किया। राजस्व संग्रह और कर अनुपालन में वृद्धि के बावजूद, व्युतक्रमी शुल्क संरचना, अनुपालन भार और निरंतर विवाद जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर घोषित अगली पीढ़ी के GST 2.0 सुधारों का उद्देश्य इन बाधाओं को दूर करना और आत्मनिर्भर भारत की नींव को सुदृढ़ करना है।

मौजूदा GST व्यवस्था के समक्ष चुनौतियाँ

  • व्युतक्रम शुल्क संरचनाएँ: तैयार माल की तुलना में कच्चे माल पर अधिक कर के कारण अप्रयुक्त क्रेडिट, नकदी प्रवाह में कमी और मूल्य श्रृंखला में विकृति उत्पन्न होती है। 
    • उदाहरण: वस्त्र क्षेत्र में, कृत्रिम रेशे जैसे  पर 18% GST लगाया गया, जबकि तैयार वस्त्रों पर 5%, जिससे अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट उत्पन्न हुये।
  • वर्गीकरण पर बार-बार होने वाले विवाद: अस्पष्ट GST दरें व्यवसायों के लिए मुकदमेबाजी, अनुपालन भार और अनिश्चितता उत्पन्न करती हैं। 
    • उदाहरण: मालाबार पराठों पर 5% (ब्रेड) या 18% (तत्काल उपभोग हेतु खाद्य) कर लगाया जाए, इस बात से संबंधित विवाद अदालतों और अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (AARs) तक पहुँचे।
  • जटिल कर स्लैब: कई GST स्लैब (5%, 8%, 12%, 18%, 28%) के अस्तित्व से भ्रम, मुकदमेबाजी और मूल्य विकृतियां उत्पन्न होती हैं।
  • अनुपालन बोझ: लघु व्यवसायों को जटिल फाइलिंग और तकनीकी खामियों का सामना करना पड़ा। 
    • उदाहरण: लोकलसर्किल्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 20% व्यवसायों ने लॉग-इन समस्याओं और फाइलिंग संबंधी उलझनों के कारण GSTN पोर्टल का उपयोग करने में कठिनाई आने की सूचना दी।
  • क्षतिपूर्ति उपकर पर राजस्व निर्भरता: राज्य उपकर पर बहुत अधिक निर्भर थे, जिससे वित्तीय दबाव उत्पन्न हुआ और राजकोषीय संघवाद बाधित हुआ। 
    • उदाहरण: वित्त वर्ष 2024 में, राज्यों को GST क्षतिपूर्ति उपकर के रूप में ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक प्राप्त हुए, जो उपकर-आधारित राजस्व पर उनकी निर्भरता को दर्शाता है।

GST 2.0 इन चुनौतियों का समाधान कैसे करेगा 

  • व्युतक्रम शुल्क संरचना में सुधार: अप्रयुक्त क्रेडिट को कम करने के लिए दरों को युक्तिसंगत बनाया जायेगा। 
    • उदाहरण: वस्त्र एवं फुटवियर क्षेत्र में शुल्क संरचना में परिवर्तन पर GST परिषद विचार कर रही है ताकि विसंगतियों को कम किया जा सके।
  • सरलीकृत द्वि-दर संरचना: एक मानक दर और एक रियायती दर की दिशा में प्रगति। 
    • उदाहरण: 12% और 28% स्लैब को समाप्त करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
  • प्रौद्योगिकी आधारित अनुपालन: एकल मासिक रिटर्न, GSTN पोर्टल अपग्रेड और चालानों का स्वतः मिलान छोटे व्यवसायों के अनुपालन को आसान बनाएगा। 
    • उदाहरण: GST नेटवर्क ने करदाताओं को आपूर्तिकर्ताओं के साथ चालानों का मिलान करने में मदद करने के लिए चालान प्रबंधन प्रणाली (IMS) शुरू की है जिससे सटीक इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC)  क्लेम सुनिश्चित होते हैं।
  • क्षतिपूर्ति उपकर पर निर्भरता कम करना: व्यापक कर आधार और स्थिर संग्रह से राज्यों की उपकर पर राजकोषीय निर्भरता कम हो जाएगी।
  • स्पष्टता के माध्यम से मुकदमेबाजी में कमी: स्पष्ट नियम और विवाद समाधान ढाँचे, कानूनी विवादों को कम करने और लंबी मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करेंगे।

GST 2.0 भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को कैसे सुदृढ़ करता है

  • कम दरों से उपभोग में वृद्धि: आवश्यक वस्तुओं पर कर कम होने से नागरिकों की वहन और व्यय क्षमता बढ़ती है। 
    • उदाहरण: सुधारों के अंतर्गत, घी, मक्खन, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, फलों के रस और नारियल पानी जैसी वस्तुएँ 12% से घटकर 5% GST श्रेणी में आ सकती हैं, जिससे उपभोक्ता कीमतें कम होंगी।
  • आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: युक्तिसंगत दरें घरेलू विनिर्माण और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करती हैं, जिससे आत्मनिर्भरता को बल मिलता है। 
    • उदाहरण: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में शुल्क संशोधन स्मार्टफोन हेतु उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं में सहायता प्रदान करते हैं।
  • निवेशकों का विश्वास बढ़ता है: एक स्थिर और पूर्वानुमानित कर व्यवस्था घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करती है।
  • राजस्व वृद्धि: सरलीकृत स्लैब और अनुपालन तंत्र, कर आधार को विस्तृत करते हैं और संग्रह में वृद्धि करते हैं।
  • मुद्रास्फीति के दबाव में कमी: अप्रत्यक्ष कर कम होने से उत्पादन लागत कम होती है, जिससे उपभोक्ता कीमतें नियंत्रित रहती हैं।

GST 2.0 सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उद्योग की भूमिका

  • सरकार के साथ सक्रिय परामर्श: GST परिषद की समीक्षा प्रक्रिया में भागीदारी। 
    • उदाहरण: ASSOCHAM ने 2025 के बजट पूर्व परामर्श में क्षेत्र-विशिष्ट GST 2.0 सुझाव प्रस्तुत किए।
  • अनुपालन हेतु डिजिटल अंगीकरण: त्रुटि-रहित फाइलिंग के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाना। 
    • उदाहरण: Infosys ने अनुपालन भार को कम करने के लिए GST एनालिटिक्स टूल का उपयोग किया।
  • केस स्टडीज का प्रदर्शन: उद्योग का विश्वास बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना।
  • वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा देना: मध्यस्थता तंत्र के माध्यम से लंबे मुकदमेबाजी को कम करना।

निष्कर्ष

GST सुधारों का अगला चरण केवल कर पुनर्गठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक प्रयास है। लागत कम करके, अनुपालन को बढ़ावा देकर और उद्योग-सरकार सहयोग को सुदृढ़ करके, GST 2.0 एक प्रत्यास्थ, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा, तथा $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर देश को और निकट ले जाएगा।

The existing GST regime in India has faced challenges such as inverted duty structures, compliance burdens, and frequent disputes. In this context, how does GST 2.0 seek to overcome these challenges and strengthen the foundations of the Indian economy? Also, discuss the role of industry in ensuring its effective implementation. in hindi

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