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Q. स्पष्ट कीजिए कि कैसे बलात श्रम (forced labour) और आधुनिक काल की गुलामी से असमानता में बढ़ोतरी होने के साथ, सामाजिक न्याय अस्थिर हो सकता है एवं लोकतंत्र को खतरा उत्पन्न हो सकता है। (150 शब्द, 10 अंक)

September 28, 2023

GS Paper IIndian SocietySocial Justice

 उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • परिचय: बलात श्रम या जबरन श्रम और आधुनिक काल की गुलामी को परिभाषित कीजिए। संक्षेप में उनकी व्यापकता और उनके द्वारा पीड़ितों को होने वाले तात्कालिक नुकसान पर प्रकाश डालें।
  • मुख्य विषयवस्तु
    • संपत्ति की असमानता और पीड़ितों के दीर्घकालिक आर्थिक वंचना में जबरन या बलात श्रम और आधुनिक काल की गुलामी के योगदान पर चर्चा कीजिए।
    • मानवाधिकारों के उल्लंघन, सामाजिक कलंक और इन प्रथाओं के अंतर-पीढ़ीगत प्रभाव का पता लगाएं।
    • कानून के शासन, राजनीतिक भागीदारी और इन प्रक्रियाओं को कायम रखने में भ्रष्टाचार की संभावित भूमिका के निहितार्थों पर गहराई से विचार कीजिए।
  • निष्कर्ष: एक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक दुनिया के लिए इन आचरणों के विरुद्ध वैश्विक समुदाय का ध्यान और उस पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए निष्कर्ष निकालें।

परिचय:

बलात या जबरन श्रम और आधुनिक काल की गुलामी निंदनीय प्रथाएं हैं जो दुर्भाग्य से दुनिया के कई हिस्सों में अब भी जारी हैं। हालाँकि पीड़ितों पर उनका तात्कालिक प्रभाव भी स्पष्ट है, किन्तु व्यापक रूप से इसका सामाजिक प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जो असमानता को बढ़ावा देने के साथ, सामाजिक न्याय की नींव को हिला रहे हैं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को खतरे में डाल रहे हैं।

मुख्य विषयवस्तु:

आर्थिक असमानता का बढ़ना:

  • धन संचय: जबरन श्रम व्यवसायों और व्यक्तियों को श्रमिकों को उचित मुआवजा दिए बिना धन इकट्ठा करने की अनुमति देता है। इससे शोषकों और शोषितों के बीच संपत्ति में असमानता बढ़ती है।
  • साधनों तक पहुंच से वंचित करना: आधुनिक काल की गुलामी से पीड़ितों को अकसर शिक्षा और आर्थिक उन्नति के अन्य साधनों तक पहुंच से वंचित कर दिया जाता है, जिससे आर्थिक अंतर और बढ़ जाता है।
    • उदाहरण के लिए, खाड़ी देशों में, कई प्रवासी श्रमिक, मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया से, शोषणकारी कफाला (प्रायोजन) प्रणालियों में फंसे हुए हैं। वे अकसर न्यूनतम वेतन के लिए कठोर परिस्थितियों में काम करते हैं, जबकि उनके नियोक्ता और मध्यस्थों को बहुत लाभ होता है।

सामाजिक न्याय की अनदेखी:

  • मानवाधिकारों का उल्लंघन: आधुनिक काल की गुलामी और जबरन श्रम मानवाधिकारों का मौलिक उल्लंघन करते हैं। वे व्यक्तियों से उनकी स्वतंत्रता, गरिमा और अकसर, उनके स्वास्थ्य और कल्याण को बलपूर्वक छीन लेते हैं।
  • सामाजिक कलंक को कायम रखना: जो लोग जबरन श्रम में फंसे हुए हैं, खासकर यौन तस्करी जैसे क्षेत्रों में, अगर वे बच भी जाते हैं तो उन्हें सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है, जिससे पुनर्वास मुश्किल हो जाता है।
  • अंतर-पीढ़ीगत प्रभाव: इस तरह के शोषण के प्रभाव अकसर पीढ़ियों पर पड़ते हैं। बंधुआ मज़दूरी करने वालों के बच्चों का जन्म भी इसी तकदीर में हो सकता है, जिससे उन्हें बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा सकता है और अन्याय का चक्र जारी रखा जा सकता है।
    • उदाहरण के लिए, भारत के कुछ हिस्सों में सुमंगली योजना के तहत युवा लड़कियों को अनुबंध पर काम करने के लिए भर्ती किया जाता है। अनुबंध के अंत में एकमुश्त भुगतान के वादे के साथ उन्हें बंधुआ मजदूरी में धकेल दिया। जिससे कई लोगों को शोषण का शिकार होना पड़ा, और वादा की गई राशि अकसर अस्वीकार कर दी जाती है।

लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ख़तरा:

  • कानून का शासन: लगातार बलात या जबरन श्रम प्रथाएं कानून के शासन में विफलता को दर्शाती हैं, जो यह बताती हैं कि सरकारें या तो अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकती हैं या नहीं करेंगी।
  • राजनीतिक भागीदारी: आधुनिक काल की गुलामी के पीड़ितों को अकसर कानूनी तौर पर या सूचना और संसाधनों तक पहुंच की कमी के कारण राजनीतिक प्रक्रियाओं से बाहर रखा जाता है।
  • भ्रष्टाचार और मिलीभगत: कुछ मामलों में, अधिकारी और कानून प्रवर्तन सक्रिय भागीदारी के माध्यम से या आंखें मूंदकर गुलामी की प्रथाओं में शामिल हो सकते हैं।
    • उदाहरण के लिए, उत्तर कोरिया में, जेल शिविरों में राज्य-प्रायोजित जबरन श्रम न केवल राजनीतिक दमन के एक उपकरण के रूप में कार्य करता है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों के सम्मान की अनुपस्थिति को भी रेखांकित करता है।

निष्कर्ष:

बलात श्रम और आधुनिक काल की गुलामी न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का अपमान करता है; बल्कि वे समाज के ताने-बाने को भी खतरे में डालते हैं। इन मुद्दों को संबोधित करना केवल पीड़ितों के लिए न्याय का मामला नहीं है, बल्कि समानता, न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक विश्व के बड़े लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है। वैश्विक नागरिकों के रूप में, सभी के लिए एक न्यायपूर्ण दुनिया सुनिश्चित करने के लिए इन मुद्दों को पहचानना, संबोधित करना और मुकाबला करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Explain how forced labour and modern day slavery would increase inequality, unstable social justice and threaten democracy. in hindi

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