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Q. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में समाजवादी नेताओं के महत्व की व्याख्या कीजिए, विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक सुधारों में उनके योगदान को लिखिए। (10 अंक, 150 शब्द) (अतिरिक्त)

January 12, 2024

GS Paper IModern History

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • प्रस्तावना: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान समाजवादी नेताओं के बारे में लिखिए।
  • मुख्य विषयवस्तु:
    • भारत के स्वतंत्रता संग्राम में समाजवादी नेताओं के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
    • सामाजिक और आर्थिक सुधारों की दिशा में समाजवादी नेताओं के योगदान पर प्रकाश डालिए।
  • निष्कर्ष: इस संबंध में उचित निष्कर्ष दीजिए।

 

प्रस्तावना:

समाजवाद एक सामाजिक और आर्थिक सिद्धांत है जो संसाधनों के निजी स्वामित्व या नियंत्रण के बजाय सार्वजनिकता पर बल देता है। भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और अशोक मेहता जैसे भारतीय समाजवादी नेता जनता के कल्याण और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए समाजवादी सिद्धांतों से प्रेरित स्वतंत्रता की लड़ाई में प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे।

मुख्य विषयवस्तु:

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में समाजवादी नेताओं का महत्व 

  • वैचारिक बदलाव: उदाहरण के लिए, जवाहरलाल नेहरू और राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं ने स्वतंत्र भारत के लिए समाजवादी समाज के विचार का समर्थन किया। उदाहरण- पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में राष्ट्रीय योजना समिति 1938।
  • श्रमिक आंदोलन: एस.ए. डांगे और ई.एम.एस. नंबूदरीपाद जैसे नेताओं ने श्रमिकों को संगठित किया और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, उचित वेतन और श्रम अधिकारों के लिए अभियान चलाया। उदाहरण- 1928 में दक्षिण भारतीय रेलवे की हड़ताल।
  • किसान विद्रोह: एन.जी. रंगा और स्वामी सहजानंद सरस्वती जैसे नेता किसानों के अधिकारों के मुखर समर्थक थे और किसान आंदोलनों का नेतृत्व करते थे। उदाहरण- अवध किसान सभाएँ।
  • कांग्रेस में भूमिका: उन्होंने कांग्रेस के ढांचे के भीतर सामाजिक और आर्थिक सुधारों सहित प्रगतिशील नीतियों पर जोर दिया। उदाहरण- कांग्रेस ने अपने गया अधिवेशन 1922 में एआईटीयूसी(AITUC) के गठन का स्वागत किया।

सामाजिक एवं आर्थिक सुधारों की दिशा में समाजवादी नेताओं का योगदान

  • बॉम्बे योजना पर प्रभाव: इसके उद्देश्यों में धन का समान वितरण, अर्थव्यवस्था में राज्य का हस्तक्षेप और सामाजिक कल्याण के उपाय देखे गए।
  • राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम: कराची सत्र में उल्लिखित, राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम समाजवादी विचारों से प्रभावित था और लगान और राजस्व में कमी, कृषि ऋणग्रस्तता से राहत आदि पर केंद्रित था।
  • शिक्षा एवं सामाजिक न्याय: डॉ. बी.आर. एक प्रमुख समाजवादी नेता अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए अथक प्रयास किया और शिक्षा और सामाजिक समानता तक उनकी पहुंच का समर्थन किया।
  • महिला सशक्तिकरण: समाजवादी नेता कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार के अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वकालत की।
  • भूमि सुधार: राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने न्यायसंगत भूमि वितरण और जमींदारी उन्मूलन की वकालत की। कांग्रेस ने भी भूमि संबंधी असमानताओं को दूर करने के महत्व को पहचाना और भूमिहीनों को भूमि के पुनर्वितरण और कृषि स्थितियों में सुधार के लिए भूमि सुधारों की वकालत की।
  • सहकारी आंदोलन: आचार्य नरेंद्र देव ने छोटे किसानों को ऋण, उचित मूल्य आदि तक पहुंच प्रदान करने के लिए कृषि सहकारी समितियों की स्थापना की वकालत की।
  • औद्योगिक पूंजीपतियों पर प्रभाव: समाजवादी नेताओं ने औद्योगिक पूंजीपतियों पर सामाजिक रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने और बड़े पैमाने पर श्रमिकों और समाज के कल्याण में योगदान करने के लिए दबाव डाला।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, समाजवादी नेताओं ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत किया, राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय पर जोर दिया और भारत के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ा।

 

Explain the significance of socialist leaders in India’s struggle for independence, with special attention to their contributions towards social and economic reforms. (Additional) in hindi

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