प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत–जापान संबंधों में अद्यतन मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) की रणनीतिक महत्ता
- क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग
- आगे की राह।
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उत्तर
परिचय
भारत और जापान ने मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific–FOIP) की अद्यतन रणनीति के अंतर्गत अपनी द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया है। यह पहल क्वाड (QUAD) से जुड़ी अनिश्चितताओं तथा चीन–अमेरिका संबंधों में बदलते समीकरणों के मध्य दोनों देशों के साझा हितों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। बहुपक्षीय व्यवस्थाओं पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए, भारत और जापान समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा लचीलापन तथा क्षेत्रीय विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से अपने साझा रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
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मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) का रणनीतिक महत्त्व
- समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करना: संयुक्त नौसैनिक प्लेटफॉर्म एवं समुद्री क्षेत्र जागरूकता से संबंधित पहलें महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करती हैं।
- क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संतुलन: FOIP भारत–जापान सहयोग को क्वाड (QUAD) की गतिशीलताओं तथा अमेरिका की प्रतिबद्धताओं से जुड़ी अनिश्चितताओं से स्वतंत्र एक रणनीतिक ढाँचा प्रदान करता है। दक्षिण चीन सागर एवं पूर्वी चीन सागर से संबंधित संयुक्त वक्तव्यों के माध्यम से दोनों देश औपचारिक बहुपक्षीय सीमाओं के बिना अपनी साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं को व्यक्त करते हैं।
- पारस्परिक सीख एवं प्रौद्योगिकी साझाकरण: समन्वित रणनीतियाँ भारत और जापान को उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकी को अपने रणनीतिक उद्देश्यों के साथ जोड़ने में सक्षम बनाती हैं।
- उदाहरण: नौसैनिक युद्धपोतों के लिए यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना (UNICORN) समझौता तथा जहाज निर्माण एवं लॉजिस्टिक्स के लिए नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप (NGMP)।
ऊर्जा सुरक्षा सहयोग
- खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करना: सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्त्वपूर्ण निकटवर्ती स्रोतों से तेल एवं गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
- अवसंरचना विकास एवं लचीलापन: बंदरगाहों तथा औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं में समन्वित निवेश ऊर्जा वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता एवं लचीलेपन को बढ़ाते हैं।
- क्षेत्रीय संकट प्रतिक्रिया क्षमता: FOIP के अंतर्गत समन्वय ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करने वाले संघर्षों एवं क्षेत्रीय संकटों के लिए तैयारियों को मजबूत करता है।
- उदाहरण: अमेरिका–इजरायल–ईरान संघर्ष जैसी संभावित परिस्थितियों में ऊर्जा परिवहन की निरंतरता बनाए रखने हेतु आकस्मिक उपाय तैयार करना।
मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) से संबद्ध पूर्वोत्तर भारत का विकास
- औद्योगिक कनेक्टिविटी: FOIP जापान समर्थित क्षेत्रीय परियोजनाओं को भारत के औद्योगिक गलियारों के साथ जोड़ने में सक्षम बनाता है।
- उदाहरण: मातरबारी डीप सी पोर्ट (Matarbari Deep Sea Port), बांग्लादेश को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जोड़ना।
- क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ावा देना: अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स एवं ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है तथा क्षेत्रीय आर्थिक संभावनाएँ मजबूत होती हैं।
- उदाहरण: बिम्सटेक के नेतृत्व वाली क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पहलों में जापान की भागीदारी।
आगे की राह
- एकीकृत ऊर्जा–परिवहन रणनीतियाँ: खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा स्रोतों को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जोड़ने वाले मल्टी-मॉडल कॉरिडोर का विकास किया जाना चाहिए, ताकि आपूर्ति जोखिम को कम किया जा सके।
- उदाहरण: ऊर्जा परिवहन के विविधीकरण के लिए मातरबारी बंदरगाह एवं अंतर्देशीय जलमार्गों का संयुक्त उपयोग।
- संयुक्त प्रौद्योगिकी एवं कौशल विकास: रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए समुद्री एवं औद्योगिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्थानीय विशेषज्ञता का निर्माण किया जाना चाहिए।
- उदाहरण: पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक समूहों के लिए जापान समर्थित कौशल विकास कार्यक्रम।
- संस्थागत द्विपक्षीय संवाद: रक्षा, ऊर्जा एवं अवसंरचना योजनाओं में समन्वय हेतु नियमित FOIP कार्य समूहों की स्थापना की जानी चाहिए।
- उदाहरण: त्रैमासिक भारत–जापान समुद्री सुरक्षा एवं ऊर्जा समन्वय मंच।
- सतत अवसंरचना निवेश: विकास लक्ष्यों के अनुरूप पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील ऊर्जा एवं परिवहन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- उदाहरण: FOIP समर्थित औद्योगिक गलियारों में नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण।
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निष्कर्ष
अद्यतन मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत (FOIP) रणनीति ने समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा लचीलापन तथा क्षेत्रीय विकास, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत के विकास, को एकीकृत करते हुए भारत–जापान संबंधों को और अधिक रणनीतिक गहराई प्रदान की है। रणनीतिक समन्वय, अवसंरचना विकास एवं कौशल निवेश के साथ मिलकर, जटिल हिंद-प्रशांत भू-राजनीतिक परिवेश में इस साझेदारी को सुरक्षा एवं विकास दोनों उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम बना सकता है।