प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत में विनिर्माण क्षेत्र में मूल्य संवर्द्धन के निम्न स्तर के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
- इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (Inverted Duty Structure) की भूमिका पर विशेष बल देते हुए इसके प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
- मूल्य संवर्द्धन, प्रतिस्पर्द्धात्मकता एवं घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु सुधारात्मक उपाय सुझाइए।
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उत्तर
परिचय
मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का उद्देश्य बाजार पहुँच, व्यापारिक प्रतिस्पर्द्धा एवं आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है। किंतु भारत के अनुभव से स्पष्ट होता है कि टैरिफ असमानताओं (Tariff Asymmetries) तथा घरेलू संरचनात्मक विकृतियों के कारण अनेक मामलों में आयात में वृद्धि हुई है, जबकि घरेलू विनिर्माण एवं मूल्य संवर्द्धन अपेक्षित गति से विकसित नहीं हो पाए हैं।
इस प्रवृत्ति के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक चुनौतियाँ
- टैरिफ असमानता: भारत की अपेक्षाकृत उच्च एमएफएन (MFN) टैरिफ दरें विदेशी निर्यातकों को भारतीय निर्यातकों की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करती हैं।
- उदाहरण: भारत की व्यापार-भारित MFN टैरिफ दर लगभग 12.6% है, जबकि जापान, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया एवं UAE में यह 4% से कम है।
- बढ़ता व्यापार घाटा: FTA साझेदार देशों से आयात, निर्यात की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है।
- उदाहरण: वर्ष 2007-09 से 2024-25 के बीच भारत का व्यापार घाटा आसियान (ASEAN) के साथ 381%, जापान के साथ 318% तथा दक्षिण कोरिया के साथ 268% बढ़ा है।
- कम उपयोग: सीमित लाभ एवं अनुपालन संबंधी जटिलताओं के कारण भारतीय निर्यातक FTA प्रावधानों का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पाते।
- उदाहरण: पात्र भारतीय निर्यातों में से केवल 20-30% ही FTA वरीयताओं का उपयोग कर पाते हैं, क्योंकि शुल्क बचत अक्सर प्रमाणन लागत को उचित नहीं ठहराती।
- अनुपालन बोझ: रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin) एवं दस्तावेजी प्रक्रियाएँ विशेष रूप से MSMEs पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं।
- उत्पादन का स्थानांतरण: FTA व्यवस्थाएँ कंपनियों को भारत के बजाय अन्य देशों में उत्पादन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
- उदाहरण: भारतीय एवं चीनी कंपनियों ने वियतनाम, थाईलैंड तथा इंडोनेशिया में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित कर भारत में ड्यूटी-फ्री पहुँच का लाभ उठाया है।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर: विशेष बल
- लागत विकृति: जब इनपुट वस्तुओं पर लगने वाला शुल्क, तैयार उत्पादों पर लगने वाले शुल्क से अधिक होता है, तो इससे घरेलू उत्पादन लागत में वृद्धि होती है।
- उदाहरण: इस्पात एवं एल्युमिनियम पर 7.5–10% MFN शुल्क लगाया जाता है, जबकि इनसे निर्मित मशीनरी FTAs के अंतर्गत शुल्क-मुक्त आयात की जा सकती है।
- मूल्य संवर्द्धन का क्षरण: अपस्ट्रीम उद्योगों को संरक्षण मिलने के बावजूद डाउनस्ट्रीम विनिर्माता अपनी प्रतिस्पर्द्धात्मकता खो देते हैं।
- रासायनिक क्षेत्र पर लागत दबाव: इनपुट पर लगाए गए शुल्क विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की उत्पादन लागत में वृद्धि करते हैं।
- उदाहरण: कॉस्टिक सोडा, पॉलीप्रोपाइलीन एवं पीवीसी पर शुल्क उत्पादन व्यय को बढ़ाते हैं।
- आयात-पक्षीय झुकाव: तैयार उत्पादों का आयात घरेलू उत्पादन की तुलना में अधिक सस्ता हो जाता है।
- उदाहरण: अनेक वस्त्र एवं रबर उत्पाद FTAs के अंतर्गत कम अथवा शून्य शुल्क पर भारत में प्रवेश करते हैं।
- विदेश-आधारित विनिर्माण को प्रोत्साहन: इनवर्टेड शुल्क संरचना “मेक इन आसियान, सेल इन इंडिया (Make in ASEAN, Sell in India)” की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है, जिससे कंपनियाँ अपतटीय (Offshore) विनिर्माण को प्राथमिकता देती हैं।
सुधारात्मक उपाय
- ड्यूटी युक्तिकरण: इनपुट टैरिफों को FTA प्रतिबद्धताओं के अनुरूप बनाकर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को समाप्त किया जाए।
- आवधिक समीक्षा: मुक्त व्यापार समझौतों के परिणामों तथा सुरक्षा प्रावधानों (Safeguard Clauses) की साक्ष्य-आधारित नियमित समीक्षा की जाए।
- उदाहरण: भारत ने व्यापार असंतुलन संबंधी चिंताओं के समाधान हेतु आसियान FTA की समीक्षा की है।
- MSME समर्थन: रूल्स ऑफ ओरिजिन (Rules of Origin) के अनुपालन एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
- उदाहरण: डीजीएफटी (DGFT) का डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन प्लेटफॉर्म निर्यातकों के लिए FTA लाभों के उपयोग को आसान बनाता है।
- घरेलू एकीकरण को सुदृढ़ करना: उत्पादन-आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत किया जाए।
- उदाहरण: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण की प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने का प्रयास करती है।
- रणनीतिक वार्ता: पारस्परिकता एवं क्षेत्र-विशिष्ट संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का संचालन करना।
निष्कर्ष
मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को भारत की औद्योगिक आकांक्षाओं को कमजोर करने के बजाय उन्हें सशक्त बनाने के साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। टैरिफ संरचना में विद्यमान विकृतियों का निराकरण, निर्यातकों की प्रतिस्पर्द्धात्मकता में वृद्धि तथा रणनीतिक एवं संतुलित व्यापार वार्ताओं के माध्यम से FTAs को सुदृढ़ घरेलू विनिर्माण, उच्च मूल्य संवर्द्धन एवं सतत् व्यापार वृद्धि के प्रभावी उत्प्रेरक में परिवर्तित किया जा सकता है।