प्रश्न की मुख्य माँग
- भारत की उच्च रक्षा प्रबंधन प्रणाली में विद्यमान संरचनात्मक एवं संस्थागत बाधाएँ।
- रक्षा सुधारों को आगे बढ़ाने में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की भूमिका की सीमाएँ।
- एकीकृत सैन्य योजना, क्षमता विकास तथा संयुक्तता को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपाय सुझाइए।
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उत्तर
परिचय
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सशस्त्र बलों के एकीकरण, संयुक्तता को बढ़ावा देने तथा सरकार को एकीकृत सैन्य सलाह प्रदान करने के उद्देश्य से सृजित किया गया था। तथापि, संरचनात्मक एवं संस्थागत बाधाएँ अभी भी रक्षा सुधारों की गति को धीमा बनाए हुए हैं, जिससे रक्षा प्रबंधन में व्यापक एवं परिवर्तनकारी सुधार लाने की CDS की क्षमता सीमित हो जाती है।
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संरचनात्मक एवं संस्थागत बाधाएँ
- विखंडित नागरिक-सैन्य समन्वय: सैन्य सलाह प्रायः संस्थागत एवं दीर्घकालिक शांतिकालीन योजना का हिस्सा बनने के बजाय संकट से प्रेरित रहती है।
- उदाहरण: ऑपरेशन सिंदूर ने प्रभावी नागरिक-सैन्य समन्वय को प्रदर्शित किया, किंतु ऐसी व्यवस्थाएँ अभी नियमित संस्थागत अभ्यास का हिस्सा नहीं हैं।
- वित्तीय असंगति: क्षमता विकास योजनाओं के लिए सुनिश्चित वित्तीय संसाधनों का अभाव होने से रक्षा खरीद एवं अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं में विलंब होता है।
- उदाहरण: लड़ाकू विमान, पनडुब्बी एवं टैंक संबंधी परियोजनाएँ वार्षिक बजटीय चक्रों के कारण दशकों तक लंबित रहती हैं।
- अंतर-सेवा सहमति की चुनौतियाँ: थिएटर कमान, वायु शक्ति के आवंटन तथा समुद्री प्राथमिकताओं जैसे विषयों पर तीनों सेनाओं के भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण एकीकृत निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की भूमिका की सीमाएँ
- तीनों सेनाओं पर प्रत्यक्ष कमान का अभाव: CDS सलाह दे सकता है, परंतु वह संयुक्त सैन्य अभियानों को प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं कर सकता तथा संसाधनों के आवंटन को बाध्यकारी रूप से सुनिश्चित नहीं कर सकता।
- उदाहरण: CDS एकीकृत क्षमता विकास योजना (ICDP) को प्राथमिकता दे सकता है, किंतु उसका क्रियान्वयन संबंधित सेनाओं की सहमति एवं अनुपालन पर निर्भर करता है।
- वित्तीय, खरीद एवं औद्योगिक तंत्र पर सीमित नियंत्रण: CDS न तो बजट स्वीकृत कर सकता है और न ही अनुसंधान, उत्पादन एवं रक्षा अधिग्रहण की समय-सीमा को निर्देशित कर सकता है, जबकि क्षमता रूपांतरण के लिए ये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- उदाहरण: रक्षा अधिग्रहण परिषद एकीकृत क्षमता विकास योजना (ICDP) को स्वीकृति देती है, किंतु वास्तविक वित्तीय आवंटन वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया जाता है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन बजटीय सीमाओं पर निर्भर हो जाता है।
- सुधार संबंधी निर्णयों के लिए राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भरता: थिएटराइजेशन एवं परिचालनात्मक संयुक्तता जैसे सुधारों के लिए राजनीतिक स्वीकृति आवश्यक होती है; CDS अकेले संस्थागत मतभेदों का समाधान नहीं कर सकता।
- उदाहरण: महाद्वीपीय एवं समुद्री प्राथमिकताओं के बीच वायु शक्ति के आवंटन का अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाता है, न कि CDS द्वारा।
आगे की राह
- सुधारों का राजनीतिक स्वामित्व: थिएटराइजेशन एवं एकीकृत कमान संरचनाओं को स्पष्ट समय-सीमा के साथ सरकार-प्रेरित प्राथमिकताओं के रूप में लागू किया जाए।
- दीर्घकालिक एवं सुनिश्चित वित्तपोषण: रक्षा बजट को क्षमता विकास योजनाओं के अनुरूप बनाया जाए, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग एवं अनुसंधान एवं विकास (R&D) को स्थिर समर्थन मिल सके।
- शीर्ष स्तर की सैन्य सलाह का संस्थानीकरण: केवल संकट की स्थितियों में ही नहीं, बल्कि शांतिकाल में भी एकीकृत सैन्य आकलन एवं रणनीतिक परामर्श के लिए स्थायी संस्थागत व्यवस्थाएँ विकसित की जाएँ।
- संयुक्त सिद्धांत एवं युद्धक रणनीतियों का विकास: CDS को बहु-क्षेत्रीय एवं मल्टी-फ्रंट अभियानों के लिए वैचारिक एवं परिचालनात्मक आधार तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
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निष्कर्ष
यद्यपि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद एकीकृत रक्षा प्रबंधन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, किंतु व्यापक सैन्य सुधारों के लिए संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण, सशक्त संस्थागत तंत्र, सुनिश्चित वित्तपोषण तथा दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। इन सभी तत्त्वों के समन्वित प्रयासों से ही CDS अपनी भूमिका को प्रभावी संयुक्तता एवं क्षमता विकास में रूपांतरित कर सकेगा।