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Q. हाल ही में गैर-निर्धारित ऑपरेटरों (NSOP) से जुड़ी घातक विमान दुर्घटनाओं ने भारत के विमानन सुरक्षा तंत्र में संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया है। भारत में छोटे विमान संचालन को प्रभावित करने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाlलिए। DGCA को मजबूत करने और सभी विमानन क्षेत्रों में एकसमान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधारों का सुझाव दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

February 28, 2026

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत में छोटे विमानों के परिचालन को प्रभावित करने वाली चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
  • नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को सुदृढ़ करने हेतु सुधार का उल्लेख कीजिए।
  • बताइए कि कैसे सभी खंडों में समान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जाए।

उत्तर

हाल ही में गैर-निर्धारित परिचालकों से संबंधित घातक दुर्घटनाएँ-जैसे बारामती लियरजेट दुर्घटना और झारखंड एयर एंबुलेंस हादसा– ने भारत के छोटे विमान पारितंत्र में विद्यमान कमजोरियों को उजागर किया है। यद्यपि वाणिज्यिक विमानन अपेक्षाकृत सुरक्षित बना हुआ है, किंतु चार्टर परिचालनों में पर्यवेक्षण, अनुरक्षण और नियामकीय प्रवर्तन से संबंधित अंतराल अभी भी विद्यमान हैं।

भारत में छोटे विमानों के परिचालन को प्रभावित करने वाली चुनौतियाँ

  • आंतरिक सुरक्षा पर्यवेक्षण की कमजोरी: कई गैर-निर्धारित परिचालकों के पास निर्धारित एयरलाइनों की तुलना में सुदृढ़ आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का अभाव है।
  • अनुरक्षण मानकों में कमी: छोटे परिचालक प्रायः संसाधन सीमाओं का सामना करते हैं, जिससे विमान अनुरक्षण और तकनीकी लेखा-परीक्षण प्रभावित होते हैं।
    • उदाहरण: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के निरीक्षणों में गैर-निर्धारित परिचालकों के बीच अनुरक्षण संबंधी त्रुटियाँ चिह्नित की गई हैं।
  • जोखिम आकलन तंत्र की अपर्याप्तता: चार्टर उड़ानें विविध भू-भागों और आपात परिस्थितियों में संचालित होती हैं, जिससे परिचालन जोखिम बढ़ जाता है।
    • उदाहरण: वर्ष 2026 की राँची–दिल्ली एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने उच्च-जोखिम परिचालन की कमजोरियों को रेखांकित किया।
  • प्रशिक्षण और चालक दल दक्षता में अंतराल: पुनरावृत्त प्रशिक्षण और सिमुलेटर सुविधा की सीमित उपलब्धता पायलटों की तैयारी को प्रभावित करती है।
    • उदाहरण: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अंतर्गत पुनरावृत्त प्रशिक्षण अनिवार्य है, किंतु गैर-निर्धारित खंड में अनुपालन का प्रवर्तन समान रूप से प्रभावी नहीं है।
  • नियामकीय पर्यवेक्षण क्षमता की सीमाएँ: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को छोटे परिचालकों की निगरानी में मानव संसाधन की कमी और पर्यवेक्षण संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
    • उदाहरण: संसदीय स्थायी समिति के प्रतिवेदनों में महानिदेशालय में कार्मिक अभाव की समस्या बार-बार उजागर की गई है।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को सुदृढ़ करने हेतु सुधार

  • संस्थागत क्षमता में वृद्धि: तकनीकी जनशक्ति तथा क्षेत्रीय सुरक्षा निरीक्षकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
    • उदाहरण: नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा महानिदेशालय के संवर्ग विस्तार के प्रस्ताव।
  • स्वतंत्र नागरिक उड्डयन प्राधिकरण की स्थापना: महानिदेशालय को पूर्णतः स्वायत्त वैधानिक निकाय में परिवर्तित किया जाना चाहिए, जिससे नियामकीय निष्पक्षता और दक्षता सुदृढ़ हो।
  • आँकड़ा-आधारित निगरानी प्रणाली: वास्तविक समय परिचालन आँकड़ों के विश्लेषण पर आधारित जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण प्रणाली अपनाई जानी चाहिए।
    • उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के सार्वभौमिक सुरक्षा पर्यवेक्षण लेखा-परीक्षण कार्यक्रम के मानक।
  • गैर-निर्धारित परिचालकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा लेखा-परीक्षण: वार्षिक तृतीय-पक्ष लेखा-परीक्षण तथा सुदृढ़ सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
    • उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के परिशिष्ट 19 के अंतर्गत संरचित सुरक्षा प्रबंधन ढाँचे की अनिवार्यता।
  • दुर्घटना अन्वेषण तंत्र का सुदृढ़ीकरण:  विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो के साथ समन्वय को बेहतर बनाया जाए, जिसकी स्थापना विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच) नियम, 2017 के अंतर्गत की गई है।

सभी खंडों में समान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना

  • समान अनुरक्षण प्रोटोकॉल: निर्धारित और गैर-निर्धारित दोनों प्रकार के परिचालकों के लिए अनुरक्षण मानकों का एकरूपीकरण किया जाए।
  • सिमुलेटर-आधारित प्रशिक्षण की अनिवार्यता: चार्टर पायलटों के लिए भी पुनरावृत्त प्रशिक्षण के समान मानक लागू किए जाएँ।
    • उदाहरण: नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं, खंड 7 (उड़ान दल मानक) के प्रावधान।
  • एकीकृत डिजिटल अनुपालन निगरानी: नागरिक उड्डयन के लिए ई-शासन मंच के अंतर्गत केंद्रीकृत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
    • उदाहरण: महानिदेशालय का ई-पोर्टल, जिसके माध्यम से लाइसेंसिंग और अनुपालन का डिजिटलीकरण किया गया है।
  • पारदर्शी सुरक्षा प्रतिवेदन प्रणाली: दंडात्मक पूर्वाग्रह के बिना स्वैच्छिक घटना-प्रतिवेदन को प्रोत्साहित किया जाए।
    • उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की सुरक्षा प्रतिवेदन प्रणाली का मॉडल।
  • सुरक्षा संस्कृति प्रमाणन: गैर-निर्धारित परिचालकों के लिए श्रेणीबद्ध सुरक्षा मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाए।
    • उदाहरण: एयरलाइनों के लिए प्रचलित अनुपालन मॉडल को चार्टर परिचालकों तक विस्तारित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

भारत की विमानन क्षेत्र में तीव्र वृद्धि के साथ सभी खंडों में कठोर और अविचल सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। नियामकीय क्षमता को सुदृढ़ करना, एकरूप अनुपालन व्यवस्था स्थापित करना तथा सक्रिय सुरक्षा संस्कृति को संस्थागत रूप देना अत्यंत आवश्यक है।

Recent fatal crashes involving non-scheduled operators (NSOPs) have exposed structural weaknesses in India’s aviation safety ecosystem. Highlight the challenges affecting small aircraft operations in India. Suggest comprehensive reforms to strengthen the DGCA and ensure uniform safety standards across all aviation segments. in hindi

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