UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

Q. चरखे को लेकर गांधी और टैगोर के बीच वैचारिक मतभेद उपयोगितावादी जन-राजनीति और बौद्धिक व्यक्तिवाद के बीच एक गहन विमर्श को प्रतिबिंबित करते हैं। स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

May 9, 2026

GS Paper IIndian History

प्रश्न की मुख्य माँग

  • उपयोगितावादी जन राजनीति (गांधीजी का दृष्टिकोण) की चर्चा कीजिए।
  • बौद्धिक व्यक्तिवाद (टैगोर का दृष्टिकोण) का उल्लेख कीजिए।
  • व्यापक दार्शनिक बहस का वर्णन कीजिए।

उत्तर

महात्मा गांधी और रबींद्रनाथ टैगोर के बीच चरखे (Charkha) को लेकर हुआ विवाद केवल कपड़ा कातने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता, श्रम और भारत के सामाजिक परिवर्तन के आदर्श मार्ग को लेकर दो भिन्न दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करता था।

उपयोगितावादी जन राजनीति (गांधीजी का दृष्टिकोण)

  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: गांधीजी ने चरखे को स्वदेशी का साधन तथा ब्रिटिश वस्त्र आयातों पर निर्भरता कम करने के उपकरण के रूप में देखा।
    • उदाहरण: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी के प्रचार ने मैनचेस्टर के कपड़ों के आयात को चुनौती दी।
  • श्रम की गरिमा: कताई, शारीरिक श्रम के सम्मान तथा हाथ से काम करने के प्रति सामाजिक पूर्वाग्रहों को समाप्त करने का प्रतीक थी।
    • उदाहरण: गांधीजी का मत था कि प्रत्येक भारतीय को प्रतिदिन सूत कातना चाहिए।
  • जन-संगठन: चरखा एक ऐसी सरल गतिविधि बन गया था, जिसके माध्यम से लाखों लोग राष्ट्रीय आंदोलन में भाग ले सके।
  • नैतिक अनुशासन: गांधीजी का विश्वास था कि कताई से नागरिकों में धैर्य, आत्मसंयम और नैतिक प्रतिबद्धता का विकास होता है।
    • उदाहरण: द पोएट एंड द चरखा (1925) में गांधीजी ने कताई को नैतिक परिवर्तन से जोड़ा।
  • ग्रामीण रोजगार: चरखे को भारत की गरीब ग्रामीण जनता के लिए आजीविका सृजन के साधन के रूप में भी देखा गया।
    • उदाहरण: गांधीजी का तर्क था कि मशीनों को आवश्यक मानवीय श्रम का स्थान नहीं लेना चाहिए।

बौद्धिक व्यक्तिवाद (टैगोर का दृष्टिकोण)

  • चयन की स्वतंत्रता: टैगोर ने अनिवार्य कताई का विरोध किया और इसे व्यक्ति की स्वतंत्रता पर नैतिक दबाव के रूप में देखा।
  • रचनात्मक अभिव्यक्ति: उनका मानना था कि निरंतर कताई केवल मांसपेशियों को सक्रिय करती है, मन को नहीं; इससे मानव की रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता सीमित होती है।
  • वैज्ञानिक उदारता: टैगोर ने आर्थिक पृथकतावाद को अस्वीकार किया तथा विज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ सहभागिता का समर्थन किया।
    • उदाहरण: उन्होंने चेतावनी दी कि आधुनिकता से दूरी भारत को सशक्त करने के बजाय कमजोर करेगी।
  • मानवीय विविधता: उन्होंने जन-राजनीतिक प्रतीकों के माध्यम से थोपी गई एकरूपता का विरोध किया और व्यक्तित्व तथा प्रतिभा की विविधता का समर्थन किया।
  • सार्वभौमिक मानवतावाद: टैगोर ने संकीर्ण राष्ट्रवादी प्रतीकों और कठोर राजनीतिक अनुरूपता की अपेक्षा वैश्विक मानवीय मूल्यों को अधिक महत्त्व दिया।
    • उदाहरण: उन्होंने बौद्धिक उदारता के समर्थन में उदार एथेंस की तुलना रूढ़िवादी स्पार्टा से की।

व्यापक दार्शनिक बहस

  • अनुशासन बनाम स्वतंत्रता: गांधीजी ने सामूहिक अनुशासन पर बल दिया, जबकि टैगोर ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नैतिक स्वायत्तता का समर्थन किया।
  • राष्ट्रवाद बनाम मानवतावाद: गांधीजी ने आर्थिक राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दी, जबकि टैगोर को उग्र राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पृथकतावाद का भय था।
    • उदाहरण: असहयोग आंदोलन के बाद टैगोर ने अत्यधिक भावनात्मक राष्ट्रवाद का विरोध किया।
  • कर्म बनाम विचार: गांधीजी ने व्यावहारिक भागीदारी को महत्त्व दिया, जबकि टैगोर ने चिंतन, सौंदर्यबोध और बौद्धिक स्वतंत्रता पर बल दिया।
  • समानता बनाम उत्कृष्टता: गांधीजी ने सरल कार्यों के माध्यम से सामान्य जन-भागीदारी को बढ़ावा दिया, जबकि टैगोर ने व्यक्तिगत उत्कृष्टता और रचनात्मक विविधता को महत्त्व दिया।
  • ग्रामीण जीवन बनाम आधुनिकता: गांधीजी ने ग्रामीण श्रम का आदर्श प्रस्तुत किया, जबकि टैगोर ने नैतिक विकास के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान को स्वीकार किया।
    • उदाहरण: टैगोर का मानना था कि प्रगति का मार्ग तकनीक से दूरी बनाने में नहीं, बल्कि उसके प्रति उदारीकरण और सहभागिता में निहित है।

निष्कर्ष

गांधी-टैगोर चरखा विवाद भारत के व्यापक संघर्ष को प्रतिबिंबित करता था, जिसमें एक ओर सामूहिक जन-संगठन और दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रश्न निहित था। दोनों ही भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण के पक्षधर थे, किंतु उनके मार्ग भिन्न थे—गांधीजी ने अनुशासित जन-आंदोलन को माध्यम माना, जबकि टैगोर ने रचनात्मक और बौद्धिक मुक्ति को अधिक महत्त्व दिया।

The ideological differences between Gandhi and Tagore over the ‘Charkha’ reflect a deeper debate between utilitarian mass politics and intellectual individualism. Elucidate. in hindi

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.