प्रश्न की मुख्य माँग
- वैश्विक प्रथाओं के उदाहरणों के साथ आर्थिक उत्पादकता पर वर्क-ऑवर नीतियों में बदलाव के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।
- वैश्विक प्रथाओं के उदाहरणों के साथ वर्क-ऑवर नीतियों में बदलाव के कारण श्रमिकों के कल्याण पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा कीजिए।
- वैश्विक प्रथाओं के उदाहरणों के साथ सामाजिक गतिशीलता पर वर्क-ऑवर की बदलती नीतियों के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।
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उत्तर
वर्क-ऑवर नीतियों में परिवर्तन से कार्यस्थल के मानदंडों में बदलाव करके आर्थिक उत्पादकता, श्रमिकों का कल्याण और सामाजिक गतिशीलता प्रभावित होती है । हाल ही में, L&T के चेयरमैन S.N. सुब्रमण्यन के 90 ऑवर वर्कवीक के सुझाव ने भारत में वर्क-लाइफ संतुलन पर बहस छेड़ दी। इसके विपरीत, आइसलैंड के 4-दिवसीय वर्कवीक जैसी वैश्विक प्रथाएँ कम वर्क-ऑवर के लाभों को उजागर करती हैं, जिससे उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
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आर्थिक उत्पादकता पर वर्क-ऑवर नीतियों में परिवर्तन का प्रभाव
- कम वर्क ऑवर वीक के माध्यम से दक्षता में वृद्धि: कम वर्क-ऑवर से कर्मचारियों का ध्यान और वर्किंग-ऑवर्स के दौरान दक्षता में वृद्धि होती है।
- उदाहरण के लिए: आइसलैंड के चार दिवसीय वर्कवीक ट्रायल्स ने उत्पादकता में वृद्धि की जबकि बर्नआउट को कम किया, जिससे सभी क्षेत्रों में उत्पादन में कोई गिरावट नहीं आई।
- अनुपस्थिति और टर्नओवर में कमी: संतुलित वर्क-ऑवर, बर्नआउट को कम करते हैं और कर्मचारियों की अनुपस्थिति को भी कम करते हैं तथा कार्यबल स्थिरता और आर्थिक उत्पादन को बढ़ाते हैं।
- उदाहरण के लिए: जापान में, इक्रोसॉफ्ट के चार दिवसीय वर्क–वीक के कार्यान्वयन से उत्पादकता में 40% की वृद्धि हुई, साथ ही अनुपस्थिति में भी कमी आई।
- अनुकूलित संसाधन आवंटन: व्यवसाय उत्पादकता से समझौता किए बिना, कम वर्क-ऑवर को लागू करके विद्युत और यूटिलिटी जैसे परिचालन लागतों को कम किया जा सकता है।
- उदाहरण के लिए: उच्च उत्पादकता वाला लघु वर्क-वीक का जर्मनी का मॉडल कुशल संसाधन उपयोग का एक उदाहरण है।
- उच्च नौकरी संतुष्टि और नवाचार: संतुलित कार्य शेड्यूल वाले कर्मचारी रचनात्मक समस्या-समाधान में संलग्न होते हैं, जिससे नवाचार और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: डेनमार्क में कम वर्क-ऑवर के परिणामस्वरूप, नवाचार रैंकिंग और कर्मचारी संतुष्टि के संबंध में अच्छे परिणाम मिले हैं।
- बेहतर आर्थिक भागीदारी: कम वर्क-ऑवर, लैंगिक समानता को बढ़ावा देते हैं जिससे अधिक महिलाएँ कार्यबल में शामिल हो पाती हैं और अर्थव्यवस्था में योगदान दे पाती हैं।
- उदाहरण के लिए: स्वीडन की लचीली कार्य नीतियों से महिला श्रम शक्ति की भागीदारी बढ़ी, जिससे राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हुई।
वर्क-ऑवर नीतियों में बदलाव का श्रमिकों के कल्याण पर प्रभाव
- बेहतर मानसिक स्वास्थ्य: संतुलित वर्क-ऑवर, तनाव को कम करते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, जिससे एक खुशहाल और स्वस्थ कार्यबल को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: फिनलैंड का वर्क-लाइफ संतुलन पर ध्यान केंद्रित करना, उसे विश्व स्तर पर सबसे खुशहाल देश के रूप में स्थान दिलाने में योगदान देता है।
- बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य: वर्क-ऑवर कम होने से शारीरिक गतिविधियों के लिए समय मिलता है, जिससे मोटापे और उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है।
- उदाहरण के लिए: नीदरलैंड में कर्मचारियों को कम वर्क-वीक का लाभ मिलता है, जिससे उनके शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- कार्य-जीवन एकीकरण: कम वर्क-ऑवर, कर्मचारियों को परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने में मदद करते हैं, जिससे रिश्तों और समग्र संतुष्टि में सुधार होता है।
- उदाहरण के लिए: फ्रांस में 35 घंटे का वर्क–वीक, परिवार के लिए समय और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ाता है, जिससे राष्ट्रीय कल्याण स्कोर में वृद्धि होती है।
- बर्नआउट दरों में कमी: संतुलित शेड्यूल थकान को कम करता है, जिससे कर्मचारियों को पुनः स्वयं को तैयार करने और लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलता है।
- उदाहरण के लिए: लचीली वर्क-ऑवर नीतियाँ अपनाने वाली न्यूजीलैंड की कंपनियों ने कर्मचारियों के बर्नआउट स्तर में महत्त्वपूर्ण गिरावट दर्ज की है।
- कर्मचारी जुड़ाव में वृद्धि: पर्याप्त व्यक्तिगत समय वाले कर्मचारी अधिक व्यस्त और प्रेरित होते हैं, जिससे बेहतर प्रदर्शन होता है।
सामाजिक गतिशीलता पर वर्क-ऑवर नीतियों में परिवर्तन का प्रभाव
- मजबूत पारिवारिक बंधन: वर्क-ऑवर कम होने से व्यक्ति अपने पारिवारिक जीवन में अधिक योगदान दे पाता है, जिससे मजबूत रिश्ते बनते हैं और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
- उदाहरण के लिए: नॉर्वे में, लघु वर्क-वीक परिवारों को घरेलू जिम्मेदारियों को समान रूप से साझा करने में सक्षम बनाता है।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा: संतुलित नीतियाँ, महिलाओं को पेशेवर और घरेलू भूमिकाओं में समान रूप से भाग लेने की सुविधा प्रदान करती हैं, जिससे लैंगिक अंतर कम होता है।
- उदाहरण के लिए: स्वीडन की लिंग-तटस्थ पैतृक अवकाश नीति पुरुषों को घरेलू कर्तव्यों को साझा करने में सक्षम बनाती है, जिससे समानता को बढ़ावा मिलता है।
- आय असमानता में कमी: उचित वेतन और वर्क-ऑवर समायोजन असमानताओं को कम करते हैं, जिससे समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।
- उदाहरण के लिए: डेनमार्क के वर्क-ऑवर विनियमन और प्रगतिशील वेतन नीतियाँ, कम आय असमानता को बनाए रखने में मदद करती हैं।
- सामुदायिक भागीदारी में वृद्धि: कम वर्क-वीक, नागरिक सहभागिता और स्वयंसेवा के लिए समय प्रदान करते हैं, जिससे सामुदायिक बंधन मजबूत होते हैं।
- उदाहरण के लिए: स्विटजरलैंड में कम वर्क-ऑवर के परिणामस्वरूप स्वयंसेवकों की भागीदारी अधिक होती है तथा स्थानीय नेटवर्क मजबूत होता है।
- कार्य मानदंडों में सांस्कृतिक बदलाव: वर्क-ऑवर की बदलती नीतियाँ, उत्पादकता की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देती हैं, तथा स्थायी कार्य संस्कृतियों को बढ़ावा देती हैं।
- उदाहरण के लिए: जापान की “प्रीमियम फ्राइडे” पहल कर्मचारियों को काम से जल्दी छुट्टी लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, तथा अवकाश और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
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लचीली वर्क-ऑवर नीतियाँ जो आर्थिक उत्पादकता को श्रमिकों के कल्याण के साथ संतुलित करती हैं, समावेशी सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने, 4-दिवसीय वर्क-वीक जैसी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और वर्क–लाइफ सामंजस्य की संस्कृति को बढ़ावा देने से एक संधारणीय, न्यायसंगत और कुशल भविष्य कार्यबल सुनिश्चित हो सकता है।
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