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Q. भारत के शहरी मध्यम वर्ग पर केंद्रीय बजट 2025 के व्यक्तिगत आयकर कटौती के प्रभाव और उपभोग पैटर्न और आर्थिक विकास पर उनके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

March 31, 2025

GS Paper IIIIndian Economy

प्रश्न की मुख्य माँग

  • भारत के शहरी मध्यम वर्ग पर केंद्रीय बजट 2025 के व्यक्तिगत आयकर कटौती के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
  • उपभोग पैटर्न पर उनके संभावित प्रभाव पर चर्चा कीजिए।
  • आर्थिक विकास पर उनके संभावित प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

उत्तर

केंद्रीय बजट 2025 में व्यक्तिगत आयकर में महत्त्वपूर्ण कटौती की गई, जिससे कर छूट की सीमा ₹7 लाख से बढ़कर ₹12 लाख सालाना हो गई। इस कदम का उद्देश्य भारत के शहरी मध्यम वर्ग के बीच प्रयोज्य आय को बढ़ाना और खपत को प्रोत्साहित करना है। OECD के अनुसार, मध्यम वर्ग में $10 से $ 100 के बीच कमाने वाले परिवार शामिल हैं। भारत में, यह जनसांख्यिकी बढ़े हुए खर्च और निवेश के माध्यम से आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

केंद्रीय बजट 2025 के व्यक्तिगत आयकर कटौती का भारत के शहरी मध्यम वर्ग पर प्रभाव

  • प्रयोज्य आय में वृद्धि: 12 लाख रुपये तक की कर छूट से प्रयोज्य आय में वृद्धि होती है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को  बेहतर वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होती है और अधिक विवेकाधीन खर्च संभव होता है।
    • उदाहरण के लिए: ₹12 लाख कमाने वाला एक वेतनभोगी व्यक्ति अब सालाना ₹5 लाख बचा पायेगा, जिससे बचत या खर्च बढ़ जायेगा।
  • उच्चतर जीवन स्तर:  अधिक वित्तीय लचीलापन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और जीवन शैली उत्पादों की बेहतर खपत की सुविधा प्रदान करता है, जिससे समग्र जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • परिसंपत्तियों में निवेश: बचत बढ़ने पर लोग आवास, म्यूचुअल फंड या स्टॉक में निवेश कर सकते हैं, जिससे परिसंपत्तियों में वृद्धि होती है और धन सृजन होता है।
  • वित्तीय समावेशन को बढ़ावा: अधिक वित्तीय सुरक्षा लोगों को बैंकिंग, बीमा और सेवानिवृत्ति योजनाओं को चुनने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।
    • उदाहरण के लिए: अधिक बचत लोगों को NPS, PPF और योजनाओं में शामिल करने में मदद करती है, जिससे भारत का वित्तीय परिवेश मजबूत होता है।
  • क्षेत्र-विशिष्ट लाभ: मध्यम वर्ग की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और पर्यटन, में बढ़ी हुई क्रय शक्ति के कारण वृद्धि हो‌ रही है।

उपभोग पैटर्न पर प्रभाव

  • उपभोक्ता माँग में वृद्धि: प्रयोज्य आय में वृद्धि से आवश्यक और विवेकाधीन वस्तुओं की माँग बढ़ी है, जिससे खुदरा और FMCG क्षेत्रों को लाभ हुआ है।
  • प्रीमियम उत्पादों की ओर रुझान: उपभोक्ता ब्रांडेड सामान, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और प्रीमियम सेवाओं का विकल्प चुन सकते हैं, जिससे बाजार का विस्तार होगा।
    • उदाहरण के लिए: प्रीमियम स्मार्टफोन, जैविक खाद्य और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की माँग बढ़ जाती है।
  • उच्चतर ऋण उपयोग: अधिक वित्तीय आत्मविश्वास के साथ, लोग बड़ी खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड, EMI और ऋण का उपयोग कर सकते हैं।
  • ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में वृद्धि: उच्च प्रयोज्य आय, ऑनलाइन शॉपिंग और सदस्यता-आधारित सेवाओं को बढ़ावा देती है।
    • उदाहरण के लिए: नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम और OTT सदस्यता में वृद्धि मध्यम वर्ग के खर्च में बदलाव को दर्शाती है।
  • बचत बनाम व्यय अनुपात पर प्रभाव: कुछ लोग अधिक बचत करते हैं, जबकि अन्य खर्च को प्राथमिकता देते हैं, जिससे समग्र आर्थिक व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है।
    • उदाहरण के लिए: म्यूचुअल फंड और FD में निवेश बढ़ता है, जबकि लक्जरी ब्रांडों की माँग बढ़ती है।

आर्थिक विकास पर प्रभाव

  • उपभोग-संचालित GDP वृद्धि: अधिक व्यय क्षमता से उपभोग में वृद्धि होती है, जो भारत के GDP का एक प्रमुख चालक है।
    • उदाहरण के लिए: वर्ष 2030 तक मध्यम वर्ग और धनी वर्ग मिलकर 2.7 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त उपभोग करेंगे।
  • रोजगार सृजन: प्रमुख क्षेत्रों में खपत बढ़ने से खुदरा, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार का सृजन होता है।
    • उदाहरण के लिए: ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट की माँग से निर्माण और सहायक उद्योगों में रोजगार सृजन होता है।
  • कर राजस्व में वृद्धि: अधिक व्यय के परिणामस्वरूप GST और कॉर्पोरेट कर संग्रह में वृद्धि होती है, जिससे सरकारी राजस्व में वृद्धि होती है।
    • उदाहरण के लिए: लक्जरी कारों और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि से अप्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि हुई है।
  • घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन: बढ़ती माँग से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जिससे MSME और स्थानीय निर्माताओं को लाभ होता है।
    • उदाहरण के लिए: परिधान उद्योग में वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि मध्यम वर्ग का खर्च गुणवत्तायुक्त भारतीय ब्रांडों की ओर बढ़ रहा है।
  • शहरों को बढ़ावा: जयपुर, लखनऊ जैसे टियर 2 और टियर 3 शहर मध्यम वर्ग के उच्च उपभोग पैटर्न के कारण तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

व्यक्तिगत आयकर में कटौती से प्रयोज्य आय में वृद्धि हो सकती है, जिससे शहरी खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विकास को बनाए रखने के लिए, लक्षित सब्सिडी, किफायती आवास और MSME प्रोत्साहन जैसे पूरक उपायों को मजबूत किया जाना चाहिए। कर सुधारों को राजकोषीय विवेक और डिजिटल वित्तीय समावेशन के साथ संरेखित करना, दीर्घकालिक आर्थिक प्रत्यास्थता और समावेशी समृद्धि सुनिश्चित करेगा।

Analyze the impact of the Union Budget 2025’s personal income tax cuts on India’s urban middle class and their potential effect on consumption patterns and economic growth. in hindi

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