Q. वर्ष 2026 के इबोला प्रकोप के संदर्भ में, वैश्विक स्वास्थ्य शासन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका की जाँच कीजिए। 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित करने में WHO के जोखिम-विरोधी दृष्टिकोण के गुणों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

May 20, 2026

GS Paper IIInternational Relations

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वैश्विक स्वास्थ्य शासन को सुदृढ़ करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका। 
  • ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित करने में WHO के जोखिम-विरोधी दृष्टिकोण के गुण / लाभ।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जोखिम-विरोधी PHEIC रणनीति से जुड़ी चुनौतियाँ/सीमाएँ। 

उत्तर

परिचय

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में वर्ष 2026 के इबोला प्रकोप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को त्वरित रूप से ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित करने के लिए प्रेरित किया। यह कदम वायरस के अनिश्चित व्यवहार और संघर्ष-प्रेरित संचरण के जोखिमों के बीच, एहतियाती वैश्विक स्वास्थ्य शासन पर बढ़ती प्राथमिकता को परिलक्षित करता है।

वैश्विक स्वास्थ्य शासन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भूमिका 

  • वैश्विक समन्वय: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान देशों, विशेषज्ञों और संस्थानों को एकत्रित कर के अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है।
    • उदाहरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने के लिए वर्ष 2026 के इबोला प्रकोप हेतु सर्वोच्च वैश्विक अलर्ट जारी किया।
  • प्रारंभिक चेतावनी: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO),बीमारी के प्रकोप की निरंतर निगरानी करता है और वैश्विक प्रसार को रोकने के लिए समय पर अलर्ट प्रदान करता है।
  • तकनीकी मार्गदर्शन: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), निगरानी, उपचार, टीकाकरण और रोकथाम रणनीतियों पर वैज्ञानिक प्रोटोकॉल प्रदान करता है।
    • उदाहरण: इबोला प्रकोप के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांटेक्ट ट्रेसिंग (Contact Tracing), शवों का सुरक्षित निस्तारण और सामुदायिक सहभागिता की सिफारिश की।
  • संसाधन जुटाना: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), प्रभावित क्षेत्रों में वित्तीय, चिकित्सा और मानवीय सहायता पहुँचाने करने में सहायता करता है।
  • मानक निर्धारण: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (IHR) जैसे ढाँचों के तहत अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों/मानदंडों को स्थापित करता है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के जोखिम-विरोधी दृष्टिकोण के गुण/लाभ 

  • त्वरित अनुक्रिया: समय से पूर्व या शुरुआती चरण में की गई घोषणा चिकित्सा संसाधनों को शीघ्रता से सक्रिय करने और रोकथाम के उपायों को लागू करने में सक्षम बनाती है।
  • एहतियाती कदम: अत्यधिक संक्रामक और उच्च मृत्यु दर वाले रोगों के विरुद्ध ऐसा सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाना, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के हित में तार्किक रूप से न्यायोचित है। 
    • उदाहरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला की मृत्यु दर लगभग 50% तक पहुँच सकती है।
  • वैश्विक ध्यान आकर्षण: अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) की घोषणाएँ महामारी प्रबंधन के प्रति अंतरराष्ट्रीय जागरूकता और राजनीतिक तत्परता को दर्शाती हैं।
    • उदाहरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस अलर्ट ने बुंडिबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo strain) के प्रकोप की ओर त्वरित रूप से वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
  • रोकथाम को मजबूती: प्रारंभिक चेतावनी महामारी के व्यापक प्रसार से पूर्व ही देश के महामारी विज्ञान संबंधी तंत्र (Epidemiological Framework)—जैसे रोग निगरानी, नैदानिक परीक्षण और संपर्क अनुरेखण—को सुदृढ़ व सक्रिय करने का अवसर प्रदान करती है। 
  • संघर्ष के प्रति संवेदनशीलता: संवेदनशील या संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है, जहाँ कमजोर शासन व्यवस्था बीमारी के प्रसार को और अधिक गंभीर बना सकती है।

PHEIC घोषित करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोखिम-विरोधी दृष्टिकोण से जुड़ी चुनौतियाँ/सीमाएँ 

  • सार्वजनिक जन-उन्माद (Public Panic): समय से पूर्व या जल्दबाजी में की गई आपातकालीन घोषणाएँ समाज में भय, भ्रामक सूचनाओं और सामाजिक व्यवधान को जन्म दे सकती हैं।
  • आर्थिक दुष्प्रभाव: यात्रा प्रतिबंध और व्यापार में व्यवधान, संवेदनशील/कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को असमान रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
    • उदाहरण: वर्ष 2014-16 के इबोला प्रकोप के दौरान अफ्रीकी देशों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था।
  • वैज्ञानिक अनिश्चितता: सीमित साक्ष्यों के आधार पर आपातकाल घोषित करने से विश्व स्वास्थ्य संगठन की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं, विशेषकर तब जब प्रकोप स्वतः ही सीमित हो जाए।
  • संसाधनों का विस्थाप: अति-सतर्कतापूर्ण आपातकालीन प्रतिक्रियाएँ, चिकित्सा अवसंरचना और मानव संसाधन (डॉक्टर्स, नर्स) पर अत्यधिक दबाव डालती हैं, जिसके परिणामस्वरूप गैर-आपातकालीन परंतु गंभीर स्वास्थ्य सेवाओं में ‘संसाधनों का विस्थापन’ हो जाता है। 
    • उदाहरण: अफ्रीकी देशों की अल्प-विकसित और वित्तीय संकट से जूझ रही स्वास्थ्य प्रणालियाँ, व्यापक स्तर पर मौजूद कई स्थानिक महामारियों के कारण पहले से ही अपनी ‘अधिकतम वहन क्षमता’ को पार कर चुकी हैं। 
  • टीकाकरण अंतराल: ऐसी सुरक्षात्मक घोषणाएँ अक्सर ‘चिकित्सीय अनिश्चितता’ के माहौल में की जाती हैं, जिससे बिना किसी प्रमाणित उपचार या टीकों के ही, व्यवस्था पर आपातकालीन प्रबंधन का भारी दबाव आ जाता है। 
    • उदाहरण: वर्तमान में उपलब्ध इबोला वैक्सीन (Ervebo) मुख्य रूप से ‘जायरे इबोलावायरस’ (Zaire ebolavirus) के विरुद्ध ही विनिर्दिष्ट  इम्युनोग्लोबुलिन प्रभावशीलता प्रदर्शित करती हैं, जबकि उभरते हुए ‘बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन’ के विरुद्ध इनका कोई प्रमाणित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 

निष्कर्ष

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का यह एहतियाती दृष्टिकोण एक अंतर्संबंधित विश्व की वास्तविकताओं को परिलक्षित करता है, जहाँ प्रतिक्रिया में की गई साधारण-सी देरी भी विनाशकारी सिद्ध हो सकती है। आगामी महामारियों में प्रभावी और विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य शासन (Global Health Governance) को बनाए रखने के लिए वैश्विक रोग निगरानी, वैज्ञानिक पारदर्शिता, स्वास्थ्य सेवाओं तक समतामूलक पहुँच और समन्वित आपातकालीन तत्परता को सुदृढ़ करना अत्यंत अनिवार्य रहेगा।

In the context of the 2026 Ebola outbreak, examine the role of the World Health Organization in global health governance. Discuss the merits and challenges of WHO’s risk-averse approach in declaring a Public Health Emergency of International Concern (PHEIC). in hindi

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