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उत्तर:
दृष्टिकोण:
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प्रस्तावना:
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान में 80,344 से अधिक मामले लंबित हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
मुख्य विषयवस्तु:
सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं:
“न्यायिक दक्षता को पुनर्जीवित करना: भारत के सर्वोच्च न्यायालय के लिए प्रस्तावित संरचनात्मक सुधार”
चुनौतियाँ और व्यवहार्यता:
इन संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में करने में चुनौतियाँ हैं, जैसे संवैधानिक संशोधन और प्रशासनिक पुनर्गठन आदि। हालाँकि, अनुच्छेद 145 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के नियमों में संशोधन कर एक उपयुक्त विकल्प प्राप्त किया जा सकता है, जिसके लिए केवल राष्ट्रपति की सहमति की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष:
हालांकि इन सुधारों को लागू करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के लिए अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से पूरा करने और सभी भारतीयों के लिए इसके दरवाजे खुले होने के अपने वादे को बनाए रखने के लिए ये आवश्यक हैं। हालिया पहल और घोषणाएं सही दिशा में उठाए गए कदम हैं, लेकिन इन महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित करने के लिए एक ठोस प्रयास की आवश्यकता है।
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