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Q. भारत में विकसित हो रहेकोषीय संघवाद के संदर्भ में, न्यायसंगत अंतरसरकारी हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख चुनौतियों और संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

August 28, 2023

GS Paper IIIndian Polity

उत्तर:

दृष्टिकोण:

  • परिचय: भारत में राजकोषीय संघवाद और न्यायसंगत अंतरसरकारी हस्तांतरण के महत्व को परिभाषित कीजिए।
  • मुख्य विषयवस्तु
    • न्यायसंगत अंतरसरकारी हस्तांतरण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।
    • इन चुनौतियों के समाधान के लिए संभावित समाधान प्रदान कीजिए
  • निष्कर्ष: राजकोषीय संघवाद से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के महत्व पर जोर देते हुए निष्कर्ष निकालिए। साथ ही, सुझाए गए समाधानों को लागू करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालिए।

परिचय:

भारत में राजकोषीय संघवाद में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जिम्मेदारियों और संसाधनों का विभाजन शामिल है, जिसमें वित्त आयोग कर आय वितरण की सिफारिश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यायसंगत अंतरसरकारी हस्तांतरण, जिसमें केंद्र से राज्य सरकारों को धन हस्तांतरण शामिल है, संतुलित क्षेत्रीय विकास, राजकोषीय असंतुलन को कम करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

 मुख्य विषयवस्तु:

 चुनौतियाँ:

  • क्षैतिज असंतुलन:
    • असमान आर्थिक विकास: महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में आर्थिक रूप से अधिक विकसित हैं
    • इससे राज्यों के बीच राजकोषीय क्षमताएं अलग-अलग हो जाती हैं।
    • क्षेत्रीय असमानताएँ: विभिन्न राज्यों के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में महत्वपूर्ण असमानताएँ हैं, जिससे समान अंतर-सरकारी हस्तांतरण सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  • लंबवत असंतुलन:
    • राजस्व और व्यय में असमानताएँ: केंद्र सरकार की राजस्व जुटाने की क्षमता अधिक है, जबकि राज्यों की व्यय जिम्मेदारियाँ अधिक हैं।
    • इससे राज्यों के राजस्व और व्यय के बीच असंतुलन पैदा होता है।
  • राजनीतिक महत्व:
    • पक्षपात के आरोप: राज्यों को धन के आवंटन में राजनीतिक पूर्वाग्रह के आरोप लगे हैं, जो समान वितरण के सिद्धांतों को कमजोर करता है।
  • आवश्यकताओं का अपर्याप्त मूल्यांकन:
    • अपर्याप्त डेटा और मूल्यांकन: अपर्याप्त डेटा और आवंटन के लिए अलग-अलग मानदंडों के कारण राज्यों की जरूरतों का आकलन हमेशा सटीक नहीं हो सकता है।

संभावित समाधान:

  • वित्त आयोग की भूमिका को सुदृढ़ बनाना:
    • वित्त आयोग को यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत किया जाना चाहिए कि उसकी सिफारिशों को अक्षरश: लागू किया जाए।
    • इससे वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंड:
    • धन आवंटन का मानदंड पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ और नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए।
    • इससे पक्षपात के आरोपों को कम करने और समान वितरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • क्षेत्रीय असमानताओं को संबोधित करना:
    • उन राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए जो सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के मामले में पीछे हैं।
    • इससे क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और संतुलित विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
  • स्थानीय सरकारों को मजबूत बनाना:
    • स्थानीय सरकारों को पर्याप्त संसाधन और शक्तियाँ प्रदान करके मजबूत किया जाना चाहिए।
    • इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि फंड का उपयोग जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से किया जाए।

निष्कर्ष:

संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने, राजकोषीय असंतुलन को कम करने और भारत में सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए न्यायसंगत अंतर सरकारी हस्तांतरण आवश्यक है। वित्त आयोग की भूमिका को मजबूत करके, आवंटन के लिए पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंड सुनिश्चित करके, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करके और स्थानीय सरकारों को मजबूत करके अंतर-सरकारी हस्तांतरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना महत्वपूर्ण है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि संसाधनों को राज्यों के बीच समान रूप से वितरित किया जाए और लोगों के कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।

In the context of India’s evolving fiscal federalism, discuss the challenges and potential solutions to ensure equitable intergovernmental transfers in hindi

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