प्रश्न की मुख्य माँग
- विकसित होते भारत-कनाडा साझेदारी में अवसरों का वर्णन कीजिए।
- विकसित होते भारत-कनाडा साझेदारी में चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- आगे की राह सुझाइए।
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उत्तर
भारत और कनाडा ने 10 वर्ष के लिए 1.9 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते के माध्यम से अपने संबंधों को पुनः सक्रिय किया है, जो वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक तनावों के बाद रणनीतिक विश्वास को पुनर्निर्मित करने के प्रयासों को दर्शाता है। यह समझौता भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को समर्थन प्रदान करता है और साथ ही व्यापक सहयोग के नए अवसर भी खोलता है।
विकसित होती भारत-कनाडा साझेदारी में अवसर
- भारत की नाभिकीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना: कनाडा के यूरेनियम भंडार भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए विस्तारित हो रहे नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को समर्थन दे सकते हैं।
- उदाहरण: वर्ष 2026 का कैमेको (Cameco) समझौता, जिसके तहत लगभग 10,000 टन यूरेनियम (2027–2035) की आपूर्ति भारतीय नाभिकीय रिएक्टरों के लिए की जाएगी।
- CEPA के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर वार्ता व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा कर सकती है।
- उदाहरण: भारत और कनाडा ने सीईपीए वार्ताओं को अंतिम रूप देने तथा वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग: नवीकरणीय ऊर्जा, एलपीजी और बायोफ्यूल में साझेदारी जलवायु और ऊर्जा सहयोग को मजबूत कर सकती है।
- उदाहरण: कनाडा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) और वैश्विक बायोफ्यूल गठबंधन (Global Biofuel Alliance) में शामिल हुआ, जो भारत द्वारा समर्थित पहलें हैं।
- महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग: तकनीकी सहयोग नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अनुसंधान सहयोग को बढ़ा सकता है।
- उदाहरण: वर्ष 2026 के शिखर वार्ता के दौरान महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग पर चर्चा।
- शैक्षिक और सांस्कृतिक जुड़ाव: शैक्षणिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक समझौते, लोगों के बीच संपर्क तथा ज्ञान साझेदारी को मजबूत कर सकते हैं।
- उदाहरण: कनाडा के प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoUs)।
विकसित होती भारत–कनाडा साझेदारी में चुनौतियाँ
- निज्जर मामले को लेकर कूटनीतिक तनाव: कार्यकर्ताओं की हत्या से द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न हुआ है।
- कनाडा में खालिस्तानी उग्रवाद को लेकर चिंताएँ: भारत ने बार-बार कनाडा की भूमि से संचालित भारत-विरोधी अलगाववादी समूहों पर चिंता व्यक्त की है।
- विदेशी हस्तक्षेप के आरोप: विदेशी हस्तक्षेप और जासूसी से जुड़े आरोपों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक अविश्वास को बढ़ाया है।
- आर्थिक सहयोग में पूर्व व्यवधान: पहले भी राजनीतिक तनावों के कारण कई समझौतों पर प्रभाव पड़ा, जिससे आर्थिक साझेदारी की निरंतरता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुईं।
- भूराजनीतिक दृष्टिकोण में भिन्नता: अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग रुख रणनीतिक समन्वय को जटिल बना सकते हैं।
- उदाहरण: यात्रा के दौरान कनाडा ने ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन किया, जबकि भारत ने कूटनीति और संवाद पर जोर दिया।
आगे की राह
- रणनीतिक संवाद का संस्थानीकरण: नियमित उच्च-स्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद विश्वास को पुनर्स्थापित करने तथा विवादों के बढ़ने को रोकने में सहायक हो सकता है।
- उदाहरण: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और कूटनीतिक माध्यमों के बीच परामर्श को मजबूत करना।
- आतंकवाद-रोधी सहयोग को सुदृढ़ करना: संयुक्त तंत्र दोनों देशों को प्रभावित करने वाले उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध से जुड़ी चिंताओं का समाधान कर सकते हैं।
- उदाहरण: दोनों देशों ने आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) की बैठक बुलाने पर सहमति व्यक्त की।
- CEPA समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देना: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) को पूरा करना व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के लिए एक स्थिर ढाँचा प्रदान कर सकता है।
- उदाहरण: दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के भीतर CEPA वार्ताओं को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई।
- ऊर्जा और जलवायु सहयोग को गहरा करना: नाभिकीय, नवीकरणीय ऊर्जा और बायोफ्यूल में सहयोग का विस्तार जलवायु और ऊर्जा प्राथमिकताओं को समन्वित कर सकता है।
- उदाहरण: वर्ष 2026 में घोषित रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी (Strategic Energy Partnership), जिसमें यूरेनियम, एलपीजी और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।
- लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना: शैक्षणिक आदान-प्रदान, प्रवासी समुदाय की भागीदारी और सांस्कृतिक संबंधों को प्रोत्साहित करना दीर्घकालिक संबंधों को स्थिर बना सकता है।
- उदाहरण: शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoUs) समाजों के बीच संबंधों को मजबूत करने का उद्देश्य रखते हैं।
निष्कर्ष
यूरेनियम समझौता भारत–कनाडा संबंधों में सावधानीपूर्ण पुनर्स्थापन का संकेत देता है। यदि इसे निरंतर संवाद, आर्थिक सहयोग और विश्वसनीय सुरक्षा साझेदारी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए, तो यह साझेदारी भू-राजनीतिक मतभेदों के संतुलन के साथ एक सुदृढ़ रणनीतिक संबंध में विकसित हो सकती है, जो स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, व्यापार विस्तार और वैश्विक शासन में सहयोग को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
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